JPSC: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में धांधली और अनियमितताओं के आरोपों को लेकर राजधानी रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में अभ्यर्थियों का अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी है। पिछले कई दिनों से जारी इस विरोध-प्रदर्शन में कई छात्र भूख हड़ताल पर बैठ चुके हैं। छात्रों की मांग है कि पूरे मामले की सीबीआई से निष्पक्ष जांच कराई जाए और पारदर्शी व्यवस्था बहाल की जाए।(JPSC)
मुख्यमंत्री का आश्वासन बनाम जमीनी हल का इंतजार
आंदोलन की गंभीरता और आक्रोश को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बयान जारी कर युवाओं को न्याय और पारदर्शी जांच का आश्वासन दिया है। सीआईडी की जांच और गिरफ्तारियों का हवाला देते हुए सरकार संवेदनशील होने का दावा तो कर रही है, लेकिन लगातार परीक्षा निरस्त करने और स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे अभ्यर्थियों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। (JPSC)
NEET यूजी पर घमासान, पर झारखंड पर खामोशी
NEET-UG और केंद्रीय परीक्षाओं के समय सड़कों पर उतरकर देशव्यापी आंदोलन छेड़ने वाले राजनीतिक दल, विपक्षी नेता और खुद को जनहितैषी बताने वाले संगठन इस स्थानीय छात्र आंदोलन पर काफी हद तक मौन हैं। जहां केंद्रीय एजेंसियों और केंद्र सरकार के खिलाफ त्वरित विरोध-प्रदर्शन देखने को मिलते हैं, वहीं झारखंड जैसे राज्यों में प्रतियोगी परीक्षाओं के घोटालों पर वही तीखा रुख दिखाई नहीं देता।(JPSC)
चुनिंदा एक्टिविज्म और ‘टूलकिट’ वाली कार्यशैली पर उठते सवाल
NEET विवाद के दौरान जंतर-मंतर से लेकर राज्यों की राजधानियों तक बड़ा माहौल तैयार करने वाले विभिन्न वामपंथी गुटों, महिला संगठनों और नागरिक अधिकार समूहों की इस मुद्दे पर अनुपस्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का मानना है कि जो समूह राष्ट्रीय मंचों पर केंद्र सरकार को घेरने में अग्रिम पंक्ति में रहते हैं, वे गैर-भाजपा शासित राज्यों में युवाओं के वास्तविक अधिकारों से जुड़े विषयों पर चुप्पी साध लेते हैं।(JPSC)
विवादित चेहरों और चुनिंदा एक्टिविस्टों का गायब होना
निवेदिता मेनन, अरुंधति रॉय, कासिम रसूल इलियास जैसे नामचीन विचारक व सामाजिक कार्यकर्ता और फिल्म जगत से स्वरा भास्कर व सोनाक्षी सिन्हा जैसे चेहरे जो राष्ट्रीय स्तर पर अक्सर अभियानों में मुखर दिखते हैं, वे झारखंड के इन अभ्यर्थियों के समर्थन में नहीं दिख रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का तर्क है कि इससे यह धारणा मजबूत होती है कि कई आंदोलन युवाओं की वास्तविक भलाई के बजाय राजनीतिक सुविधा और एजेंडे के आधार पर तय किए जाते हैं।(JPSC)
समान मापदंड की मांग करते आंदोलित परीक्षार्थी
राजनैतिक और सामाजिक संगठनों के इस दोहरे रवैये से परे, रांची की सड़कों पर बैठे युवाओं का कहना है कि भ्रष्टाचार चाहे किसी भी राज्य में हो या किसी भी सरकार के कार्यकाल में हो, प्रतियोगी छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ पर कार्रवाई का मापदंड एक समान होना चाहिए। केवल चुनिंदा मंचों पर आवाज उठाने से युवाओं का भरोसा व्यवस्था और निष्पक्षता दोनों से उठता है।(JPSC)
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पारदर्शी जांच से ही सुधरेगी व्यवस्था की साख
झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं की साख को पुनर्जीवित करने के लिए आवश्यक है कि सरकार निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराकर दोषियों को कड़ी सजा दे। छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ रोकने के लिए न केवल ठोस प्रशासनिक कदम उठाने होंगे, बल्कि राजनीतिक लाभ-हानि देखकर रुख बदलने वाले संगठनों के बजाए परीक्षा तंत्र की शुचिता पर ध्यान केंद्रित करना होगा।(JPSC)

