नरेश वत्स
Balochistan: पाकिस्तान के सबसे बड़े प्रांत बलूचिस्तान से जुड़े संगठनों ने 11 अगस्त को “स्वतंत्रता दिवस” के रूप में मनाने की घोषणा कर दी है। एक बार फिर बलूचिस्तान के प्रश्न को अंतरराष्ट्रीय चर्चा में ला दिया है। इस घोषणा के साथ दुनिया भर में रहने वाले बलोच समुदाय से स्वतंत्र बलूचिस्तान का झंडा फहराने और समर्थन जुटाने की अपील भी की गई है। बलूचिस्तान में लगातार हालात बिगड़ते जा रहे हैं। पाकिस्तान सेना पर हमले हो रहे हैं। बलूचिस्तान की जनता सड़कों पर है।(Balochistan)
11 अगस्त की तारीख क्यों महत्वपूर्ण?
बलोच संगठनों का दावा है कि 11 अगस्त 1947 को तत्कालीन कलात रियासत ने स्वयं को स्वतंत्र घोषित किया था। उनका कहना है कि यह घोषणा भारत और पाकिस्तान के औपचारिक विभाजन से पहले हुई थी। बाद में 1948 में कलात के पाकिस्तान में विलय को लेकर आज भी विवाद बना हुआ है। कई बलोच संगठन ने घइसे जबरन विलय बताते हैं। इसलिए ये ऐतिहासिक तारीख 11 अगस्त बलूचिस्तान के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।(Balochistan)
क्या पाकिस्तान टूटने की कगार पर है?
पिछले कुछ महीनों में बलूचिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में विरोध प्रदर्शनों की खबरें सामने आई हैं। पाकिस्तान की सेवा पर हमले हो रहे हैं इसलिए विदेशी मीडिया में भी चर्चा होने लगी है कि “पाकिस्तान टूटने की कगार पर है”बलूच विद्रोह दशकों पुराना है। लेकिन इस बार बलोच आंदोलनकारी आर- पार की लड़ाई के मूड में। हालांकि,अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान की मौजूदा सीमाओं को ही मान्यता देता है।(Balochistan)
भारत सरकार का संभावित रुख
“हिंदुस्थान पोस्ट ” ने इस बारे में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के विदेशी मामलों के जानकार अमिताभ कुंडू से यह सवाल किया तो उनका जवाब था कि यह फिलहाल शुरुआती चरण में है। यह मामला राजनीतिक है। इस पर कोई भी टिप्पणी नहीं करेंगे। लेकिन विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार भारत की आधिकारिक विदेश नीति लंबे समय से यह रही है कि वह दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में सार्वजनिक हस्तक्षेप से बचता है। यदि बलूचिस्तान का मुद्दा उठता भी है तो भारत सामान्यतः मानवाधिकारों और नागरिक अधिकारों की बात करेगा और भारत हमेशा से पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर दुनिया का ध्यान खींचता रहा है। हालांकि,विदेश मंत्रालयकी ओर से कोई आधिकारिक बयान नहींआया है।(Balochistan)
विश्व के देशों का नजरिया
अमेरिका, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, चीन, रूस और संयुक्त राष्ट्र सहित अधिकांश देश पाकिस्तान की क्षेत्रीय अखंडता को मान्यता देते हैं। लेकिन कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन बलूचिस्तान में पाकिस्तान सेना के अत्याचार,जबरन गुमशुदगी ,मानवाधिकार उल्लंघन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाने की मुनीर की सेना की लगातार हो रही कार्रवाई जैसे मुद्दों पर समय-समय पर चिंता जताते रहे हैं।(Balochistan)
पाकिस्तान के सामने चुनौती
11 अगस्त को बलूचिस्तान में स्वतंत्रता दिवस मनाने के फैसले ने पाकिस्तान सेना के राष्ट्रीय एकता के दावे की पोल खोल दी है। पाकिस्तान के सामने कूटनीतिक चुनौती पैदा हो गई है।यदि मानवाधिकारों का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अधिक प्रमुखता पाता है और संगठनों का जनसमर्थन बढ़ता है तो पाकिस्तानी सेवा के लिए गंभीर संकट पैदा हो जाएगा।(Balochistan)
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आगे क्या?
11 अगस्त को होने वाले कार्यक्रमों पर पाकिस्तान की प्रतिक्रिया, बलोच संगठनों की भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया पर सबकी नजर रहेगी। बलूचिस्तान में 11 अगस्त को “स्वतंत्रता दिवस” मनाने की घोषणा निश्चित रूप से पाकिस्तान के लिए एक चेतावनी है कि पाकिस्तान इसी तरह से आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा तो उसकी आग उसके घर को ही आग लगा देगा। बलूचिस्तान में यह आग लग चुकी है।(Balochistan)

