Bankipur Seat:बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के संस्थापक और चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर ने इतिहास रच दिया है। भाजपा के सबसे अभेद्य दुर्ग माने जाने वाले पटना की बांकीपुर सीट पर प्रशांत किशोर ने 18,953 मतों के बड़े अंतर से ऐतिहासिक जीत दर्ज की। प्रशांत किशोर को कुल 63,203 वोट हासिल हुए, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा को 44,250 वोटों से ही संतोष करना पड़ा। इस परिणाम के साथ ही बांकीपुर में जन सुराज पार्टी का पहला खाता खुल गया है और प्रशांत किशोर अपनी पार्टी के पहले विधायक बन गए हैं।
तीन दशक से बरकरार भाजपा का एकछत्र वर्चस्व समाप्त
बांकीपुर सीट (पूर्व में पटना पश्चिम) पर बीते लगभग तीन दशकों यानी 1995 से भारतीय जनता पार्टी का निरंतर कब्जा रहा था। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद बने नितिन नवीन यहां से लगातार 5 बार विधायक चुनकर आते रहे थे। ऐसे में इस हाई-प्रोफाइल उपचुनाव को भाजपा का सबसे सुरक्षित गढ़ माना जा रहा था। हालांकि, प्रशांत किशोर ने पहले ही राउंड की मतगणना से जो बढ़त बनाई, वह अंतिम 31वें राउंड तक लगातार मजबूत होती गई। इस चुनावी नतीजे ने पटना के शहरी वोट बैंक पर भाजपा के तीन दशक पुराने प्रभुत्व को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है।
राजद तीसरे स्थान पर पिछड़ा, मुख्य मुकाबला जन सुराज बनाम भाजपा
इस उपचुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की उम्मीदवार रेखा कुमारी बेहद पीछे छूट गईं और उन्हें मात्र 11,933 वोट ही प्राप्त हो सके। चुनावी रुझानों से साफ हो गया कि बांकीपुर में मुख्य मुकाबला पारंपरिक राजद बनाम एनडीए के बजाय पूरी तरह से ‘जन सुराज बनाम भाजपा’ में बदल गया था। स्थानीय मतदाताओं ने पारंपरिक दलगत राजनीति से इतर हटकर प्रशांत किशोर की पदयात्रा, सुशासन के एजेंडे और नए राजनीतिक विकल्प पर अपना भरोसा जताया। जन सुराज की इस जीत ने बिहार के पारंपरिक वोट समीकरणों को हिलाकर रख दिया है।
पहले ही प्रयास में जन सुराज का शानदार पदार्पण
चुनावी रणनीतिकार के रूप में देश के कई बड़े दलों को जीत दिलाने वाले प्रशांत किशोर के लिए यह चुनाव उनकी अपनी राजनीतिक यात्रा की सबसे बड़ी परीक्षा माना जा रहा था। अपनी ‘जन सुराज पदयात्रा’ के जरिए बिहार के गांव-गांव घूमने के बाद जब प्रशांत किशोर ने खुद चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया, तो इसे एक बड़ा राजनीतिक जोखिम माना जा रहा था। बांकीपुर की जनता द्वारा दिए गए इस प्रचंड जनादेश ने साबित कर दिया है कि बिहार का युवा और शहरी वर्ग अब विकास और सुशासन के नाम पर नए विकल्पों को स्वीकार करने के लिए तैयार है।
बिहार की भावी राजनीति पर पड़ेगा दूरगामी असर
बांकीपुर उपचुनाव के नतीजे सिर्फ एक विधानसभा सीट की हार-जीत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह आने वाले बिहार विधानसभा चुनावों के लिए एक नया राजनीतिक संदेश हैं। इस जीत के साथ ही राज्य में भाजपा और राजद के द्विध्रुवीय मुकाबले को चुनौती देने वाला एक मजबूत तीसरा कोण स्थापित हो गया है। मतगणना केंद्र पर जीत की घोषणा होते ही जन सुराज के कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल छा गया। विश्लेषकों का मानना है कि इस जीत से जन सुराज का ढांचा पूरे राज्य में और मजबूत होगा तथा बिहार की भावी राजनीति को एक नई दिशा मिलेगी।

