Bankipur By-election: राजद तीसरे नंबर पर खिसकी, क्या बिहार विधानसभा चुनाव में ‘एनडीए बनाम जन सुराज’ होगा मुख्य मुकाबला?

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प्रशांत किशोर, जन सुराज पार्टी के संस्थापक, चुनावी जीत के बाद
प्रशांत किशोर ने बांकीपुर सीट पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की।

नरेश वत्स
Bankipur By-election: बिहार की राजनीति की सबसे चर्चित सीटों में शामिल बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भाजपा के प्रत्याशी नीरज कुमार को 18,953 मतों से हराकर बड़ी राजनीतिक जीत दर्ज की है। चुनावी रणनीतिकार के रूप में देशभर में पहचान बनाने वाले प्रशांत किशोर अब पहली बार विधायक बनकर विधानसभा पहुंचेंगे। इसे उनकी सक्रिय चुनावी राजनीति की औपचारिक शुरुआत माना जा रहा है।(Bankipur By-election)

पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट उपचुनाव केवल एक सीट का चुनाव नहीं था, बल्कि बिहार की बदलती राजनीतिक दिशा का संकेत भी माना गया। प्रचार के दौरान NEET पेपर लीक आंदोलन, भरत तिवारी एनकाउंटर और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सरकार के कामकाज जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठे। प्रशांत किशोर ने इन्हीं विषयों को जनता के बीच प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया।

भाजपा के गढ़ में सेंध
बांकीपुर सीट लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ रही है। यह सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद खाली हुई थी। वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में नितिन नवीन ने राजद की रेखा गुप्ता को लगभग 52 हजार मतों से हराया था।

हालांकि इस उपचुनाव में मतदान प्रतिशत गिरकर लगभग 35 प्रतिशत रह गया, जबकि 2025 के विधानसभा चुनाव में यहां 41.35 प्रतिशत मतदान हुआ था। कम मतदान और विपक्ष की आक्रामक रणनीति का लाभ प्रशांत किशोर को मिलता दिखाई दिया।

टिकट बदलने का फैसला बना चर्चा का विषय
भाजपा के लिए सबसे बड़ी चर्चा अंतिम समय में उम्मीदवार बदलने का निर्णय रहा। पार्टी ने पहले अभिषेक कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उन्होंने 10 जुलाई को पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए नामांकन वापस ले लिया। दिलचस्प बात यह रही कि नामांकन वापसी से कुछ घंटे पहले तक मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी उनके समर्थन में चुनाव प्रचार कर रहे थे।

इसके बाद भाजपा ने आनन-फानन में नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया। नीरज कुमार 2006 से भाजपा से जुड़े हैं और दो बार मंडल अध्यक्ष रह चुके हैं, लेकिन अचानक उम्मीदवार बदलने के फैसले ने चुनावी समीकरणों को प्रभावित किया।

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क्या संदेश देती है यह जीत?
प्रशांत किशोर की जीत कई राजनीतिक संदेश देती है। पहला, जन सुराज अब केवल एक वैकल्पिक राजनीतिक मंच नहीं बल्कि चुनावी चुनौती देने वाली ताकत के रूप में उभरता दिखाई दे रहा है। दूसरा, भाजपा के पारंपरिक गढ़ में मिली यह हार संगठनात्मक रणनीति और टिकट वितरण पर सवाल खड़े करती है। तीसरा, बिहार की राजनीति में विकास, शिक्षा और सुशासन जैसे मुद्दों पर केंद्रित राजनीति के लिए भी यह परिणाम महत्वपूर्ण माना जाएगा।

अब सभी की निगाहें इस बात पर होंगी कि विधानसभा में प्रशांत किशोर अपनी राजनीति को किस तरह आगे बढ़ाते हैं और क्या यह जीत बिहार की आगामी राजनीति की दिशा बदलने का आधार बनती है।

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