Ujjain में युवा धर्म संसद का शुभारंभ, संघ प्रमुख मोहन भागवत ने युवाओं को दिया ये संदेश

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत अपने उज्जैन प्रवास के दूसरे दिन गीता भवन में आयोजित युवा धर्म संसद-2026 में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए।

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Ujjain में युवा धर्म संसद का शुभारंभ, संघ प्रमुख मोहन भागवत ने युवाओं को दिया ये संदेश
Ujjain में युवा धर्म संसद का शुभारंभ, संघ प्रमुख मोहन भागवत ने युवाओं को दिया ये संदेश

Ujjain: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत अपने उज्जैन प्रवास के दूसरे दिन शुक्रवार (18 सितंबर) को गीता भवन में आयोजित युवा धर्म संसद-2026 में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। गीतकार मनोज मुंतशिर भी कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं। (Ujjain)

सेवाज्ञ संस्थानम् की ओर से सिद्धपीठ हनुमत निवास अयोध्या के पीठाधीश्वर एवं संरक्षक आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरणजी महाराज के मार्गदर्शन में 17 से 19 सितंबर तक आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से करीब 1,700 युवा छात्र-छात्राएं शामिल होने पहुंचे हैं। दूसरे दिन करीब 300 विद्वान, शिक्षक, शोधकर्ता और धर्माचार्य भी कार्यक्रम का हिस्सा ले रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 19 सितंबर को समापन सत्र में शामिल होंगे। (Ujjain)

दूसरे दिन शुक्रवार सुबह 10 बजे युवा धर्म संसद का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर सरसंघचालक डॉ. भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि जब मैंने ‘युवा धर्म संसद’ के बारे में सुना तो मुझे खुशी हुई कि युवा धर्म के बारे में सोच रहे हैं। आजकल ऐसी बातें सुनने को कम ही मिलती हैं। जब भी धर्म की बात होती है तो लोग कहते हैं कि यह बुढ़ापे की चीज है। (Ujjain)

उन्होंने कहा कि गीता और रामायण को रिटायरमेंट के बाद पढ़ने वाली किताबें माना जाता है लेकिन असल में ऐसा नहीं है। धर्म तो जीवन की शुरुआत से लेकर अंत तक बना रहता है और सब कुछ उसी के अनुसार चलता है। आप इसमें यकीन करें या न करें, कुछ चीजें नियमों से चलती हैं। (Ujjain)

संघ प्रमुख ने कहा कि जब कोई व्यक्ति अहंकार में आकर काम करता है और सोचता है कि सब कुछ उसके कंट्रोल में है और उसकी मर्जी से होना चाहिए, तो उसे गलतफहमी हो जाती है कि चीजें वैसी ही होंगी जैसा वह चाहता है। लेकिन असल में ऐसा नहीं होता। (Ujjain)

फिलहाल, कार्यक्रम जारी है। उद्घाटन समारोह में सेवाज्ञ संस्थानम् के आचार्य मिथिलेशनंदिनी शरण महाराज, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी और सेवाज्ञ संस्थानम् के अध्यक्ष आशीष कुमार आशु उपस्थित रहे। (Ujjain)

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कार्यक्रम में ‘धर्म की अस्तित्वपरक अवधारणा एवं चारित्रिक उत्तरदायित्व’ विषय पर व्याख्यान सत्र होगा। इसमें आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि महाराज, गीतकार मनोज मुंतशिर, प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी, स्मृति अनंतलक्ष्मी और जे. नंदकुमार विचार रखेंगे। (Ujjain)

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