वाड्रा लिए जा सकते हैं हिरासत में.. क्यों? जानने के लिए पढ़िए ये खबर

बेनाम संपत्ति मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय ने अब उनके खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट में अर्जी पेश की है। बेनामी संपत्ति मामले में ईडी की ओर से रॉबर्ट वाड्रा और महेश नागर को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की इजाजत मांगी गई है।

कांग्रेस पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी के पति और बिजनेसमैन रॉबर्ट वाड्रा की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। बेनामी संपत्ति के मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अब उनके खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका की है। इस मामले में ईडी की ओर से रॉबर्ट वाड्रा और महेश नागर को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की इजाजत मांगी गई है। इस याचिका को लेकर अब कोर्ट 18 जनवरी को सुनवाई करेगा। मामले में जहां एसएसजी राजदीपक रस्तोगी और भानु प्रताप बोहरा ईडी का पक्ष रखेंगे, वहीं सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता केटीएस तुलसी वाड्रा का पक्ष रखेंगे।

ये है मामला
2007 में वाड्रा ने स्काइलाइट हॉस्पिटालिटी प्राइवेट लिमिटेड के नाम से एक कंपनी की शुरुआत की थी। वाड्रा और उनकी मां मौरीन इस कंपनी के निदेशक थे। बाद में इसका कंपनी का नाम बदलकर स्काइलाइट हॉस्पिटालिटी प्राइवेट लिमिटेड लायबिलिटी कर दिया गया था। रजिस्ट्रेशन के समय बताया गया था कि कंपनी रेस्टॉरेंट-बार और कैंटीन जैसे काम करेगी।

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कहां और कितनी है जमीन?
रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काइलाइट हॉस्पिटालिटी प्राइवेट लिमिटेड लायबिलिटी ने 2012 में कोलायाल क्षेत्र में कुछ लोगों से 270 बीघा जमीन खरीदी थी। इसके लिए उन्होंने 79 लाख रुपए दिए थे। बीकानेर में भारतीय सेना की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज के लिए जमीन आवंटित की गई थी। इस फील्ड से विस्थापित हुए लोगों के लिए 1400 बीघा जमीन आबंटित की गई थी। लेकिन कुछ लोगों ने इस जमीन के फर्जी कागजात तैयार कर इसे वाड्रा की कंपनी को बेंच दिया था।

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