Textile Industry में क्रांतिकारी पहल, क्या अलसी की खेती से किसानों को मिलेगी नई ताकत और विदेशों पर निर्भरता होगी खत्म?

 केन्द्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने सोमवार को कहा कि वर्ष 2029-30 तक फ्लैक्स (अलसी) की देशी किस्मों की खेती के जरिए लिनेन के आयात को शून्य करने का लक्ष्य है।

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Inauguration ceremony of the Centre of Excellence for Handloom Technology
The inauguration ceremony of the Centre of Excellence for Handloom Technology.

Textile Industry: केन्द्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने सोमवार को कहा कि वर्ष 2029-30 तक फ्लैक्स (अलसी) की देशी किस्मों की खेती के जरिए लिनेन के आयात को शून्य करने का लक्ष्य है।(Textile Industry)

कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह आज दिल्ली स्थित आईआईटी में ‘हथकरघा प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता केंद्र’ (‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) के उद्घाटन पर यह बात कही, जिसका मुख्य उद्देश्य डिजिटल प्रौद्योगिकियों के माध्यम से भारत के हथकरघा क्षेत्र को और मजबूत करना है। आईआईटी दिल्ली और आईआईटी खड़गपुर जैसे प्रमुख संस्थानों के सहयोग से शुरू किए गए ये अनुसंधान उत्कृष्टता केंद्र, क्षमता निर्माण, टिकाऊपन और उद्यमिता के चार प्रमुख स्तंभों पर काम करेंगे।(Textile Industry)

गिरिराज सिंह ने कहा, “पर्यावरण संरक्षण और सस्टेनेबिलिटी की बढ़ती वैश्विक मांग को देखते हुए मंत्रालय ऐसे नए प्राकृतिक रेशों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।”(Textile Industry)

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के 11.99 करोड़ रुपये के निवेश से स्थापित किया गया यह केंद्र एक राष्ट्रीय ज्ञान और नवाचार हब के रूप में कार्य करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य भारत की पारंपरिक हथकरघा विरासत को आधुनिक अनुसंधान, एआई और डिजिटल तकनीकों से जोड़ना है। यह केंद्र शिक्षाविदों, उद्योग जगत, डिजाइनरों, प्रौद्योगिकीविदों और स्टार्टअप्स को एक मंच पर लाएगा। अगले पांच वर्षों में यह केंद्र हथकरघा ज्ञान का एक राष्ट्रीय डिजिटल भंडार विकसित करेगा। एआई-सक्षम उपकरण और बेहतर करघा प्रौद्योगिकियां तैयार करेगा। पेटेंट, अनुसंधान और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देगा। देशभर के बुनकरों और पेशेवरों को आधुनिक प्रशिक्षण प्रदान करेगा।

मंत्री ने बताया कि वर्तमान में 35 लाख बुनकरों के डिजिटल सत्यापन के साथ सर्टिफिकेट जारी किए जा रहे हैं। हाल ही में 1 लाख नए बुनकर इस प्रणाली से जुड़े हैं।

देश के आर्थिक संकेतकों पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा, कि भारत की जीडीपी 2 खरब डॉलर से बढ़कर 4.2 खरब डॉलर हो चुकी है, विदेशी मुद्रा भंडार 299 अरब डॉलर से बढ़कर 698 अरब डॉलर और कुल निर्यात 468 अरब डॉलर से बढ़कर 863 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। महंगाई दर 7.7 प्रतिशत से घटकर 3.9 प्रतिशत पर आना और पूंजीगत व्यय का 11.21 लाख करोड़ रुपये होना आम जनता की क्रय शक्ति में वृद्धि को दर्शाता है, जिसका सीधा लाभ हथकरघा और कपड़ा क्षेत्र को मिलेगा।(Textile Industry)

इस अवसर पर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस रिसर्च के एक लोगो का भी अनावरण किया गया। वहीं, हथकरघा क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए 5 मुख्य पहलों की शुरुआत की गई। इनमें पहली हैंडलूम 4.0: प्रत्येक करघे के लिए एक डिजिटल साथी है जो बुनकरों को उत्पादकता और स्थिरता मापने में मदद करेगा। दूसरी हैंडलूम ई-विद्या: बुनकरों और छात्रों के लिए एक समस्या-आधारित डिजिटल शिक्षण और ज्ञान केंद्र है। तीसरी पहल हैंडलूमएक्स: हथकरघा क्षेत्र में नए स्टार्टअप्स और नवाचारों को बढ़ावा देने वाला एक्सेलेरेटर प्लेटफॉर्म शामिल है। वहीं, चौथी कलागृह हैंडलूम स्टूडियो: डिजिटल विजुअलाइजेशन और कस्टमाइजेशन के जरिए नई पीढ़ी को हथकरघा से जोड़ने का स्टूडियो। इसके बाद, पांचवी पहल थ्रेड्स ऑफ वैलोर: पुनर्चक्रित रक्षा वस्त्रों को प्रीमियम हथकरघा उत्पादों में बदलेगी।(Textile Industry)

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इस मौके पर वस्त्र सचिव नीलम शमी राव, विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीना और हस्तशिल्प की विकास आयुक्त अमृत राज समेत वस्त्र मंत्रालय, आईआईटी दिल्ली के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।(Textile Industry)

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