Snake Smuggling: मुंबई एयरपोर्ट पर वन्यजीव तस्करी रैकेट का भंडाफोड़, यात्री के बैग से मिले जिंदा सांप

बैंकॉक से उड़ान संख्या 6E1052 में सवार एक भारतीय यात्री को 27 जून को मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर जीवित सांपों की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

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मुंबई (Mumbai) के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (Chhatrapati Shivaji Maharaj International Airport) पर वन्यजीव तस्करी (Wildlife Smuggling) का एक बड़ा मामला सामने आया है। बैंकॉक (Bangkok) से आए एक यात्री को 16 जीवित सांपों (Snake Smuggling) के साथ पकड़ा गया है। यह घटना शुक्रवार (27 जून) की देर रात हुई, जब सीमा शुल्क विभाग (Customs Department) के अधिकारियों ने संदिग्ध व्यवहार के कारण एक भारतीय यात्री के सामान की तलाशी ली।

तलाशी के दौरान, बैग में कपड़े की थैलियों में बड़ी सावधानी से छिपाकर रखे गए विभिन्न प्रजातियों के 16 जीवित सांप बरामद हुए। इनमें केन्यन सैंड बोआ, राइनोसॉरस रैट स्नेक, एल्बिनो रैट स्नेक, गार्टर स्नेक, कैलिफ़ोर्निया किंग स्नेक और एल्बिनो होंडुरन मिल्क स्नेक जैसी विदेशी प्रजातियां शामिल हैं। इस बरामदगी ने एक बार फिर भारत में वन्यजीवों की अवैध तस्करी के बढ़ते खतरे को उजागर किया है।

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वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो और सीमा शुल्क विभाग की संयुक्त कार्रवाई
यह कार्रवाई सीमा शुल्क विभाग की सतर्कता और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) के समन्वय का परिणाम है। अधिकारियों ने यात्री के हाव-भाव में घबराहट महसूस की, जिसके बाद उसके सामान की गहन जांच की गई। इन सांपों को भारत में अवैध रूप से लाया जा रहा था, जो कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 का सीधा उल्लंघन है। बरामदगी के बाद, 28 जून को पंचनामा तैयार किया गया और आरोपी यात्री को सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है। प्रारंभिक जांच से संकेत मिलता है कि ये सांप अंतर्राष्ट्रीय काले बाजार में काफी मूल्यवान हो सकते हैं, जिनका उपयोग अक्सर विदेशी पालतू जानवरों के व्यापार या अन्य अवैध गतिविधियों के लिए किया जाता है।

तस्करी का बढ़ता जाल और अंतरराष्ट्रीय संबंध
हाल के दिनों में बैंकॉक से मुंबई आने वाली उड़ानों में इस तरह के वन्यजीव तस्करी के कई मामले सामने आए हैं। यह दर्शाता है कि भारत और थाईलैंड के बीच वन्यजीव तस्करी का एक सक्रिय अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क काम कर रहा है। तस्कर अक्सर इन जानवरों को छोटे प्लास्टिक के बक्सों या कपड़े की थैलियों में छिपाकर लाते हैं, जिससे उन्हें हवाई अड्डों पर पकड़ना मुश्किल हो जाता है। इस तरह की तस्करी न केवल जानवरों के जीवन को खतरे में डालती है, बल्कि इससे विभिन्न प्रजातियों के पर्यावरण संतुलन और जैव विविधता पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। वन्यजीव विशेषज्ञ बताते हैं कि इन विदेशी प्रजातियों के भारत में प्रवेश से स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को भी खतरा हो सकता है।

सख्त कानूनों और वैश्विक सहयोग की आवश्यकता
वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो और सीमा शुल्क विभाग अब इन सांपों को उनके मूल देश में वापस भेजने की प्रक्रिया पर काम कर रहे हैं। भारत में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत ऐसे अपराधों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है, जिसमें कारावास और भारी जुर्माना शामिल है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस बढ़ती प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए सीमा पार सहयोग और अधिक सख्त कानूनों की आवश्यकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वन्यजीव तस्करी एक गंभीर संगठित अपराध है और इसे रोकने के लिए विभिन्न देशों की एजेंसियों के बीच मजबूत समन्वय अनिवार्य है। इस घटना ने एक बार फिर हवाई अड्डों पर सुरक्षा जांच को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया है।

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