ISI Module: जंतर मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी आंदोलन को लेकर अब बहस एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस द्वारा पाकिस्तान स्थित आईएसआई से जुड़े आतंकी मॉड्यूल का खुलासा किए जाने के बाद आंदोलन की टूलकिट, उसके पीछे सक्रिय तत्वों और संभावित पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई को लेकर नए सवाल उठने लगे हैं।(ISI Module)
पंजाब पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किए गए 9 आरोपियों में पांच बालिग और चार नाबालिग शामिल हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि इन्हें पेट्रोल बम बनाने का प्रशिक्षण दिया गया था और प्रारंभिक पूछताछ में जंतर मंतर आंदोलन के दौरान उनकी सक्रियता के संकेत भी मिले हैं। यदि जांच में यह संबंध पुष्ट होता है, तो यह केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रहेगा बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का गंभीर विषय बन सकता है।(ISI Module)
विरोध और घुसपैठ के बीच की महीन रेखा
लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञ लंबे समय से चेतावनी देते रहे हैं कि बड़े आंदोलनों में असामाजिक, कट्टरपंथी अथवा विदेशी हितों से जुड़े तत्व घुसपैठ कर सकते हैं। ऐसे मामलों में मूल आंदोलन और उसमें शामिल संदिग्ध तत्वों के बीच स्पष्ट अंतर करना आवश्यक होता है।(ISI Module)
जंतर मंतर आंदोलन के दौरान भी हिंसक घटनाओं, उत्तेजक नारों और सोशल मीडिया पर संगठित प्रचार को लेकर समय-समय पर प्रश्न उठे थे। अब पंजाब पुलिस के ताजा खुलासे ने उन आशंकाओं को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।(ISI Module)
विदेशी फंडिंग और टूलकिट की बहस
पिछले कुछ वर्षों में भारत में कई बड़े आंदोलनों के दौरान “विदेशी फंडिंग”, “डिजिटल टूलकिट” और “सूचना युद्ध” जैसे मुद्दे सामने आते रहे हैं। जांच एजेंसियां पहले भी यह कहती रही हैं कि सोशल मीडिया के माध्यम से नैरेटिव तैयार करना, भीड़ जुटाना और असंतोष को संगठित करना आधुनिक हाइब्रिड युद्ध का हिस्सा हो सकता है। यदि वर्तमान मामले में भी विदेशी एजेंसियों या पाकिस्तान समर्थित नेटवर्क की भूमिका सामने आती है, तो यह जांच का महत्वपूर्ण विषय होगा।(ISI Module)
दिल्ली पुलिस की पाकिस्तान के सोशल मीडिया हैंडलर पर कार्रवाई
दिल्ली पुलिस पहले ही 400 से अधिक पाकिस्तान में बैठे हैंडलर के सोशल मीडिया खातों को ब्लॉक कर चुकी है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि जंतर मंतर पर हुए आंदोलन में भारत विरोधी सोशल मीडिया पोस्ट करके आंदोलन को हिंसक बनाने में मदद की। आंदोलन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।(ISI Module)
सामाजिक संगठनों की चिंता
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक ने भी हाल के वक्त में युवाओं से संवाद बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका कहना है कि युवाओं के मन में उठ रहे प्रश्नों को समझना और उनसे सकारात्मक संवाद स्थापित करना समय की मांग है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि युवाओं के असंतोष का लोकतांत्रिक समाधान नहीं होगा तो कट्टरपंथी और विदेशी तत्व ऐसे अवसरों का लाभ उठाने की कोशिश कर सकते हैं।(ISI Module)
ये भी पढ़ेंः Mark Zuckerberg झुके! बच्चों के यौन शोषण और डीपफेक मामले में मांगी सार्वजनिक माफी
आगे की
जंतर मंतर आंदोलन की जांच में विदेशी हस्तक्षेप या आतंकी नेटवर्क की भूमिका सिद्ध होती है, तो यह केवल एक आंदोलन का मामला नहीं बल्कि भारत की आंतरिक सुरक्षा और लोकतांत्रिक संस्थाओं को अस्थिर करने की व्यापक साजिश के रूप में देखा जाएगा। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि लोकतांत्रिक आंदोलनों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि उनमें किसी भी प्रकार की हिंसा, विदेशी प्रभाव या राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के लिए कोई स्थान न हो ।(ISI Module)

