Gandhi’s assassination: किसका फायदा, किसका षड्यंत्र? रणजीत सावरकर की पुस्तक में विस्फोटक दावा

पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में पुस्तक के लेखक और स्वातंत्र्यवीर सावरकर के पौत्र रणजीत सावरकर ने कहा कि गोडसे को हत्या के लिए नहीं बल्कि ' मर्डर टू अटेंप' के लिए सजा दी जानी चाहिए थी।

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गांधी की हत्या(Gandhi’s assassination) में नाथूराम गोडसे(Nathuram Godse) का अपराध सिद्ध होने से पहले ही उसे फांसी दे दी गई। राम के नाम पर घटी ये घटना घृणित पाप है। ‘Make Sure Gandhi Is Dead’ पुस्तक के द्वारा उस पाप को सामने लाया गया है। प्रभु श्री राम अयोध्या पधारे हैं। वीर सावरकर के पोते और स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक के कार्याध्यक्ष रणजीत सावरकर(Ranjit Savarkar, Executive Chairman of Swatantraveer Savarkar National Memorial) ने जोर देकर कहा कि प्रभु राम(Prabhu Ram) के आने से साथ ही वह पाप भी सामने आ गया है।

रणजीत सावरकर की किताब ‘Make Sure Gandhi Is Dead’ का विमोचन 29 जनवरी को दिल्ली के नये महाराष्ट्र सदन में ‘इकोनॉमिक टाइम्स’ के पूर्व संपादक, राजनीतिक विशेषज्ञ राजीव सोनी और प्रख्यात वकील वीरेंद्र इचलकरंजीकर द्वारा किया गया। इस अवसर पर रणजीत सावरकर बोल रहे थे।

सरकार का सबूत मिटाने का प्रयास
पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में पुस्तक के लेखक और स्वातंत्र्यवीर सावरकर के पौत्र रणजीत सावरकर ने कहा कि गोडसे को हत्या के लिए नहीं बल्कि ‘ मर्डर टू अटेंप’ के लिए सजा दी जानी चाहिए थी। इस विषय पर किताब लिखने की प्रेरणा उन्हें कैसे मिली, इस बारे में बोलते हुए रणजीत सावरकर ने कहा कि मूल रूप से जब गांधी की हत्या हुई थी, तब तत्कालीन सरकार ने परिस्थितियों का लाभ उठाते हुए कई सबूत नष्ट करने की कोशिश की थी। यह बात कई बार स्पष्ट हो चुकी है।

संभव है कि हत्या किसी और ने की हो!
गांधी जैसे महत्वपूर्ण व्यक्ति को सरकार ने पर्याप्त सुरक्षा क्यों नहीं दी, यह एक पहेली है। इस पहेली को सुलझाने के लिए प्रयास करने की जरूरत है। कपूर कमीशन में कई गलत बातें पेश की गईं। इसमें स्वातंत्र्यवीर सावरकर को बदनाम किया गया। मैं इस संदर्भ में सच्चाई सामने लाने हेतु पुस्तक लिखने के लिए पिछले सात वर्षों से शोध कर रहा हूं। इस दौरान मेरे ध्यान में आया कि नाथूराम गोडसे को तो सिर्फ बहाना बनाया गया है। सच तो यह है कि यह पूरी तरह से संभव है कि हत्या किसी और ने की हो।

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गोडसे की बंदूक की गोलियां उसके पैरों के पास पड़ी थीं
बेशक नाथूराम गोडसे के पास बंदूक थी, परंतु बुलेट उसके पैरों के पास पड़े थे। इसके चलते हम इस संभावना से इनकार नहीं कर सकते कि किसी और ने दूर से गांधी पर गोली चलाई हो। इसके अलावा नाथूराम गोडसे नाम कमाना चाहता था। इसलिए हो सकता है कि उसने गांधी की हत्या की जिम्मेदारी स्वीकार ली हो। इसके अलावा गांधी की हत्या से दो दिन पहले जब गोडसे दिल्ली में घूम रहा था तो उसे किसी ने नहीं रोका। रणजीत सावरकर ने दावा किया कि नेहरू ने गांधी की हत्या का इस्तेमाल केवल राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए किया।

कपूर रिपोर्ट जनता के लिए खुली की जाए
पुस्तक के बारे में बात करते हुए रणजीत सावरकर ने कहा कि केंद्र सरकार ने अभी तक कपूर रिपोर्ट को न तो स्वीकार किया है और न ही खारिज किया है। वह रिपोर्ट जनता के लिए खुली होनी चाहिए। इससे लोगों को सही स्थिति की जानकारी मिलेगी। ये सिर्फ सावरकर का मामला नहीं है, बल्कि मानवाधिकार का भी मामला है।

नाथूराम को लगा कि गोली उसने मारी है..
रणजीत सावरकर ने कहा कि नाथूराम गोडसे केवल आरएसएस का स्वयंसेवक था। अतः राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं हिन्दू महासभा पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया। ‘हे राम’ के नाम पर घृणित पाप को दफन कर दिया गया। इस पुस्तक में इसका खुलासा किया गया है। गांधी जी नाथूराम गोडसे की गोली से नहीं मरे थे। कर्नल तनेजा ने सावधानीपूर्वक रिपोर्ट तैयार की है। नाथूराम गोडसे को केवल ऐसा लगा कि मैंने गोली मारी हैं; लेकिन वास्तव में गोलियां दूसरों ने चलाई थीं। वहां 200 लोग थे और सुरक्षा व्यवस्था भी थी।

गांधी की हत्या के सबूत दबा दिए गए
नाथूराम गोडसे अपराधी नहीं था। वह पत्रकार था। इसलिए उसके द्वारा निशाना लगाना संभव नहीं था। इन सभी सबूतों को ध्यान में रखते हुए कहा जा सकता है कि गोडसे ने गांधी की हत्या नहीं की थी। गांधी की मृत्यु दूसरों की गोलियों से हुई। वे कौन थे, इसकी जांच होनी चाहिए। इसके बाद वल्लभभाई पटेल का गुट को किनारे कर दिया गया। फिर हमने ग्रेट ब्रिटेन के साथ व्यापार करना शुरू किया। 1971 में हंटर विमान का इस्तेमाल किया गया। इससे पंडित नेहरू और ब्रिटेन को लाभ हुआ। मेरी अपील है कि सरकार इस पर एक आयोग नियुक्त करे। गांधी की हत्या के सबूत दबा दिये गये। रणजीत सावरकर ने कहा कि इसकी जांच की जानी चाहिए।

पुलिस जो कहती है, वह सही नहीं हो सकता – एडवोकेट वीरेंद्र इचलकरंजीकर
इस अवसर पर वीरेंद्र इचलकरंजीकर ने कहा कि मालेगांव ब्लास्ट, अजमल कसाब मामले की जांच कई एजेंसियों से कराई गई। नाथूराम गोडसे को फांसी देने का तात्कालिक निर्णय केवल पुलिस जांच पर भरोसा करके लिया गया। इसके अलावा गांधीजी की हत्या की जांच भी बहुत लापरवाही से की गई। गांधी हत्याकांड में पुलिस जो कहती है, वह सही नहीं हो सकता।

अपराधियों को बचाने वाले कौन थे? -राजीव सोनी
राजीव सोनी ने कहा कि इस पुस्तक का प्रकाशन एक आंदोलन की शुरुआत है। गांधी की हत्या नाथूराम गोडसे ने नहीं की थी बल्कि यह किसी और का षड्यंत्र था। इसमें असली अपराधियों को बचाया गया। हमें पता करना होगा कि इससे किसे फायदा हुआ। उन्होंने कहा कि कि अपराधियों को बचाने वाले लोग कौन थे, यह पता लगाना समय की मांग है।

इस अवसर पर पुस्तक के संपादक मंगेश जोशी, धनंजय शिंदे, अनिल त्रिवेदी, दीपक कानूलकर का गणमान्य लोगों द्वारा सत्कार किया गया। कार्यक्रम का संचालन स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक की कोषाध्यक्ष मंजिरी मराठे ने किया।

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