वाशिंगटन डी.सी. (Washington D.C.) में अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (Former National Security Advisor) जैक सुलिवन (Jack Sullivan) ने यह सनसनीखेज दावा किया है कि डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान (Pakistan) में अपने संभावित निजी व्यावसायिक हितों को साधने के लिए भारत और अमेरिका के मजबूत रणनीतिक संबंधों को दांव पर लगा दिया था। सुलिवन के अनुसार, ट्रंप अक्सर विदेश नीति के अहम फैसलों को व्यक्तिगत लाभ-हानि के नजरिए से देखते थे, जिसका असर दक्षिण एशिया में अमेरिका की रणनीति पर भी पड़ा।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जैक सुलिवन ने विस्तार से बताया है कि ट्रंप प्रशासन में फैसले कैसे लिए जाते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप की पाकिस्तान नीति अक्सर इस बात से प्रभावित होती थी कि वहां उनके रियल एस्टेट साम्राज्य, विशेष रूप से ‘ट्रंप टावर्स’, के लिए क्या अवसर हो सकते हैं। सुलिवन का दावा है कि कई महत्वपूर्ण चर्चाओं के दौरान, ट्रंप भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने के बजाय इस बात में अधिक रुचि दिखाते थे कि पाकिस्तानी नेतृत्व के साथ व्यक्तिगत सौदे कैसे किए जाएं, जो उनके ब्रांड को फायदा पहुंचा सकते थे।
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भारत-अमेरिका संबंधों पर क्या पड़ा असर?
पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सुलिवन के दावे उस दौर की याद दिलाते हैं जब ट्रंप के कार्यकाल में भारत-अमेरिका संबंधों में काफी उतार-चढ़ाव देखे गए थे। एक तरफ ‘हाउडी, मोदी!’ और ‘नमस्ते ट्रंप’ जैसे भव्य कार्यक्रम हुए, तो दूसरी तरफ व्यापार शुल्कों को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव भी बढ़ा। सुलिवन के आरोपों से यह संकेत मिलता है कि पर्दे के पीछे, भारत को एक विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार के रूप में देखने के बजाय, ट्रंप प्रशासन उसे एक ऐसे ‘डील’ के हिस्से के रूप में देख रहा था, जहां अन्य व्यक्तिगत हितों को भी साधा जा सके।
ट्रंप की ‘डील-मेकिंग’ डिप्लोमेसी और विवाद
यह पहली बार नहीं है जब डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति पर उनके व्यावसायिक हितों के हावी होने का आरोप लगा है। उनकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति की कई विश्लेषकों ने ‘डील-मेकिंग’ या लेन-देन वाली कूटनीति कहकर आलोचना की थी। तुर्की, सऊदी अरब और चीन जैसे देशों के साथ उनके संबंधों में भी अक्सर उनके पारिवारिक व्यावसायिक हितों पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। बोल्टन के इस नए दावे ने एक बार फिर इस बहस को तेज कर दिया है कि क्या ट्रंप के कार्यकाल में अमेरिकी विदेश नीति राष्ट्रीय हित के बजाय निजी हितों से प्रेरित थी।
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