Civil War: सूडान गृहयुद्ध में बर्बरता की हदें पार, सिविल कोर्ट को निशाना बनाने के बाद अंतरराष्ट्रीय मंचों पर घिरेगी सेना?

सूडान के संघर्षग्रस्त उत्तरी दारफुर प्रांत में एक बार फिर भयंकर हवाई हमले की खबर सामने आई है। अल-जाविया गारा गांव स्थित एक सिविल कोर्ट परिसर को निशाना बनाकर किए गए इस घातक ड्रोन हमले में कम से कम 35 आम नागरिकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दर्जनों अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

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सूडान गृहयुद्ध में सशस्त्र लोग और यूएन वाहन
सूडान में संघर्ष के बीच सशस्त्र लोग और यूएन वाहन दिखाई दे रहे हैं।

Civil War: सूडान के संघर्षग्रस्त उत्तरी दारफुर प्रांत में एक बार फिर भयंकर हवाई हमले की खबर सामने आई है। अल-जाविया गारा गांव स्थित एक सिविल कोर्ट परिसर को निशाना बनाकर किए गए इस घातक ड्रोन हमले में कम से कम 35 आम नागरिकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दर्जनों अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमला उस समय हुआ जब अदालत परिसर में स्थानीय विवादों के निपटारे के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण और स्थानीय निवासी एकत्र थे।(Civil War)

सूडानी सेना की कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल
स्थानीय नागरिक अधिकार समूहों और प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि यह ड्रोन हमला सूडानी सशस्त्र बलों (SAF) द्वारा संचालित किया गया था। बताया जा रहा है कि सेना विरोधी गुटों और रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) के प्रभाव वाले इलाकों को निशाना बनाने के क्रम में यह हमला किया गया, लेकिन इसका सीधा शिकार निर्दोष नागरिक बन गए। हमले के बाद अदालत परिसर पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गया और चारों ओर अफरा-तफरी का माहौल कायम हो गया।(Civil War)

मानवीय स्थिति बेहद नाजुक, अस्पतालों में बेड कम पड़े
हमले के तुरंत बाद स्थानीय निवासियों और राहतकर्मियों ने घायलों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाया। हालांकि, दारफुर क्षेत्र में लंबे समय से जारी गृहयुद्ध के कारण स्वास्थ्य सेवाएं पहले से ही चरमराई हुई हैं। प्राथमिक उपचार केंद्रों में जीवनरक्षक दवाओं और सर्जिकल उपकरणों की भारी किल्लत देखी जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि कई घायलों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है, जिससे मृतकों का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।(Civil War)

मानवाधिकार संगठनों ने जताया गहरा आक्रोश
संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक मानवाधिकार संगठनों ने नागरिक बुनियादी ढांचे और अदालत परिसर को निशाना बनाए जाने पर गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त किया है। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का कहना है कि युद्धरत गुटों द्वारा आम नागरिकों और सार्वजनिक स्थानों पर लगातार किए जा रहे हमले अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन हैं। मानवाधिकार संस्थाओं ने इस घटना की स्वतंत्र जांच कराने और दोषियों की जवाबदेही तय करने की मांग उठाई है।(Civil War)

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सूडान में गहराता गृहयुद्ध और वैश्विक चिंताएं
सूडान में बीते लंबे समय से सेना और अर्धसैनिक बल (RSF) के बीच सत्ता का संघर्ष जारी है, जिसने पूरे देश को मानवीय त्रासदी के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। उत्तरी दारफुर का यह इलाका लगातार हिंसा का केंद्र बना हुआ है, जहाँ लाखों लोग पहले ही विस्थापित हो चुके हैं। इस ताज़ा सैन्य हमले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सूडान में जारी राजनीतिक और सैन्य टकराव की सबसे बड़ी कीमत वहां के बेकसूर आम नागरिकों को ही चुकानी पड़ रही है।(Civil War)

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