पीएम कर्ज योजना के नाम पर लोगों को फंसाने वाले गैंग का ऐसे हुआ पर्दाफाश!

मुंबई पुलिस की साइबर सेल ने प्रधानमंत्री योजना के तहत कर्ज दिलाने के नाम पर लोगों को ठगनेवाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है।

पैसे की जरुत हर किसी को होती है। इस हालत में अगर कोई आपको फोन कर ये कहे कि हम आपको प्रधानमंत्री ऋण योजना के तहत 2 लाख तक कर्ज उपलब्ध करा सकते हैं, तो आप आसानी से उसकी बात पर भरोसा कर सकते हैं। लोगों की इसी मानसिकता का फायदा उठाने वाले एक गैंग का पर्दाफाश साइबर अपराध शाखा ने किया है। मिली जानकारी के अनुसार इस गैंग ने चार हजार से ज्यादा लोगों को कर्ज देने के नाम पर अपना शिकार बनाया है।

प्रधानमंत्री योजना के तहत कर्ज दिलाने के नाम पर लोगों को ठगनेवाले इस रैकेट के लोग जरुरतमंदों से संपर्क करते थे। इस काम के लिए ये एक-दो नहीं, 9 मोबाइल का इस्तेमाल करते थे।

चार आरोपी गिरफ्तार
इस गैंग के लोग फोन कर कर्ज दिलाने के नाम पर लोगों से उनके बारे में विस्तार से जानकारी लेते थे। इसका मुख्य आरोपी संजीव कुमार महाराष्ट्र के अलिगढ़ में रहता है। संजीव के साथ ही इस गैंग के चार आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया है। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गैंग में और कितने लोग शामिल हैं।

अखबारों में देते थे विज्ञापन
महत्वपूर्ण बात यह है कि गैंग के लोग इस फर्जी योजना के लिए अखबारों में विज्ञापन भी देते थे। इसके साथ ही वेबसाइट के माध्यम से भी इस फर्जी योजना का प्रचार करते थे। वे लोगों को बताते थे कि इस योजना के तहत दो लाख रुपए तक कर्ज दिया जाता है। इसके लिए ये लोगों को अप्लाई करने को कहते थे। इस तरह इन्होंने
दो लाख 80 हजार लोगों के अप्लीकेशन डाउनलोड कर रखे थे। इन अप्लीकेशन में लोगों ने अपने बारे में पूरी जानकीर खुद ही दी थी।

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प्रत्येक व्यक्ति से लिए गए 8 से 20 हजार रुपए
साइबर सेल की पुलिस के मुताबिक लोन के लिए अप्लाई करनेवाले प्रत्येक व्यक्ति से 8 से 20 हजार तक की राशि ली गई थी। इसके लिए इन्होंने एक कॉलसेंटर ऑपरेटर भी नियुक्त कर रखा था। लेकिन एक दिन गैंग के सभी लोग अचानक गायब हो गए और लोगों के भरे हुए पैसों पर हाथ साफ कर दिया। इसके बाद मामले की शिकायत मिलने पर साइबर अपराध शाखा सक्रिय हो गई और आरोपियों के बारे में जानकारी हासिल करनी शुरू कर दी। जल्द ही साइबर पुलिस ने गैंग के चार लोगों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल कर ली। इनकी गिरफ्तारी के बाद इस पूरे गैंग और इसके मॉडस ऑपरेंडी का पर्दाफाश हुआ।

चार हजार से ज्यादा लोगों को बनाया शिकार
इसकी प्राथमिक जांच में चार हजार लोगों के फंसाए जाने का मामला प्रकाश में आया है। पुलिस ने लोगों को सतर्क करते हुए अपील की है कि वे कोई भी प्राइवेट ऐप को डाउनलोड न करें और अपने बारे में उन पर किसी तरह की जानकारी उपलब्ध न कराएं।

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