पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर कब्जे की जंग को लेकर चुनाव आयोग (Election Commission) ने अंतरिम फैसला सुना दिया है। पार्टी में मचे आंतरिक घमासान और आगामी उपचुनावों को देखते हुए आयोग ने दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिए हैं।
किसे क्या मिला? (TMC)
ममता बनर्जी गुट: इस खेमे को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ (MAITC) नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ का चुनाव चिन्ह दिया गया है।
ऋतब्रत बनर्जी गुट: बागी नेताओं के इस धड़े को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह मिला है।
इन दोनों गुटों को पश्चिम बंगाल, मेघालय और त्रिपुरा में मान्यता प्राप्त दलों का दर्जा रहेगा। (TMC)
विधानसभा चुनाव की हार ने हिला दी TMC की नींव
इस पूरे राजनीतिक ड्रामे की शुरुआत पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार के बाद हुई। चुनाव परिणामों से उपजे असंतोष के चलते अधिकांश विधायकों ने ममता बनर्जी का नेतृत्व नकार दिया और ऋतब्रत बनर्जी के साथ मिलकर अलग खेमा तैयार कर लिया। बागी नेताओं ने तर्क दिया कि फरवरी 2025 में पार्टी की नेशनल वर्किंग कमेटी का कार्यकाल पूरा हो चुका है, इसलिए वर्तमान संगठनात्मक ढांचा अवैध है। इसके बाद जून 2026 में हुई बैठक में नया नेतृत्व चुनने का दावा करते हुए इस धड़े ने मूल नाम और चुनाव चिन्ह पर अधिकार जता दिया। (TMC)
दूसरी ओर, ममता खेमे ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए बागी गुट की कार्रवाई को असंवैधानिक करार दिया। नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनावों के दौरान जब दोनों पक्षों ने पारंपरिक नाम और ‘फूल-घास’ चिन्ह पर दावा ठोक दिया, तो मामला चुनाव आयोग की चौखट तक पहुंच गया। (TMC)
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आयोग का अगला कदम
फिलहाल चुनाव आयोग की यह व्यवस्था पूरी तरह से अंतिम नहीं बल्कि अंतरिम है, जो आगामी उपचुनावों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मूल पार्टी के वास्तविक नियंत्रण, नाम और आरक्षित चुनाव चिन्ह पर कानूनी और तथ्यात्मक जांच के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। (TMC)
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