डॉ. मयंक चतुर्वेदी
Terrorism: आतंकवाद को संरक्षण देने में जिस देश का दुनिया भर में नाम बदनाम हो, यदि वह भारत के गुनहगार आतंकियों को भारत को सौंपना स्वीकार कर ले और इस तरह की मांग जनता एवं राजनेताओं के बीच से आने लगे तो समझ लिया जाए कि पाकिस्तान की हालत लगातार बद से बदतर होती जा रही है। सोचनेवाली बात यह है कि अब जब मानसून का दौर चल रहा है, नदियां उफान पर हैं, तब पाकिस्तान में पानी का संकट गहराता दिख रहा है। ऐसे में जब तेज गर्मी का मौसम होगा, तब क्या हालात यहां पैदा होंगे इसका आज सहज अंदाजा ही लगाया जा सकता है।
बिलावल भुट्टो की मजबूरी
वस्तुत: 22 अप्रैल को जम्मू एवं कश्मीर के पहलगाम में लश्कर से जुड़े आतंकवादियों द्वारा किए गए आतंकी हमले के बाद भारत ने पड़ोसी देश में आतंकी शिविरों को निशाना बनाकर ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इसके बाद ब्रह्मोस की मार से घायल पाकिस्तान को आखिर में 10 मई को भारत के साथ शांति “समझौता” करने के लिए विवश होना पड़ा था। वहीं, भारत की ओर से पाकिस्तान पर जो प्रतिबंध लगाए गए, वह अब भी निरंतर हैं। ऐसे में पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने पाकिस्तान की ओर से विश्वास बहाली के उपाय के रूप में ‘जांच के दायरे में आए व्यक्तियों’ को भारत को प्रत्यर्पित करने में कोई आपत्ति नहीं होने की बात कही है, वह बहुत ही गौर करने लायक है।
हाफिज और मसूद पर बड़ा बयान
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल का कहना है कि लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज सईद और जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर को संभावित समझौते और सद्भावनापूर्ण रुख के तहत भारत को प्रत्यर्पित करने के बारे में विचार किया जा सकता है। पाकिस्तान हाफिज और मसूद अजहर को भारत को सौंपने के लिए तैयार है, लेकिन जरूरी यह है कि इसके लिए नई दिल्ली का पूरा सहयोग मिले।
सबको पता है सच्चाई
यहां बिलावल यह दावा करते हुए भी दिखे कि पाकिस्तान के साथ एक व्यापक वार्ता के हिस्से के रूप में, जहां आतंकवाद उन मुद्दों में से एक है, जिन पर हम चर्चा करते हैं, मुझे यकीन है कि पाकिस्तान इनमें से किसी भी चीज का विरोध नहीं करेगा। राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक प्राधिकरण (नैक्टा) के अनुसार, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद दोनों को पाकिस्तान ने प्रतिबंधित कर रखा है, जबकि 26/11 मुंबई आतंकी हमले का मुख्य षड्यंत्रकारी हाफिज सईद वर्तमान में आतंकवाद के वित्तपोषण के लिए 33 साल की सजा काट रहा है। इसी तरह संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक आतंकवादी घोषित अजहर को भी नैक्टा ने प्रतिबंधित कर रखा है। पर इन दोनों आतंकियों के बारे में यहां हकीकत क्या है, वह किसी से आज छिपा हुआ नहीं है।
हमलों की लंबी श्रृंखला
कहना होगा कि भारत के सबसे वांछित आतंकवादियों में से एक अजहर का नाम भारत में कई बड़े हमलों से जुड़ा है, जिसमें 2001 का संसद हमला, 26/11 का मुंबई हमला, 2016 का पठानकोट एयरबेस हमला और 2019 का पुलवामा आत्मघाती हमला शामिल है। इसके अलावा भी अन्य कई हमलों में उसका एवं उसके संगठन का नाम सामने आया है, यही कारण रहा कि उसे 2019 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक आतंकवादी घोषित किया गया था। इसके बाद भी पाकिस्तान का इस आतंकवादी पर नर्म रुख लगातार देखने को मिला है।
भारत से तनावपूर्ण संबंध
दूसरी ओर भारत का रुख पहले दिन से स्पष्ट है, इसलिए ही पाकिस्तान से उसके संबंध तभी से तनावपूर्ण बने हुए हैं, भारत यह मांग कर रहा है कि सभी आतंकियों पर कठोर कार्रवाई करने के साथ वह उन सभी को भारत कि लिए प्रत्यार्पित करे। इतना होने के बाद भी भारत ने बीच-बीच में हर संभव प्रयास किया कि पाकिस्तान के साथ पड़ोसी धर्म निभाया जाए, वह एक बड़े भाई की भूमिका में भी नजर आया। संबंध सुधारने के लिए हर संभव प्रयास किए गए, यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने पहले कार्यकाल के शुरुआती सालों में पाकिस्तान के साथ अच्छे रिश्ते बनाने की कोशिश करते हुए 25 दिसंबर, 2015 को ही अचानक पाकिस्तान पहुंचने में संकोच नहीं किया, उस दिन वे तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पोती की निकाह में भी शामिल हुए थे। उन्होंने नवाज़ शरीफ को अफगानिस्तानी स्टाइल का गुलाबी साफा भी तोहफे में दिया था, जिसे शरीफ पहने हुए भी नजर आए थे।
शांति बहाली के कई प्रयास
कूटनीति की मेज पर शांति बहाली के प्रयास किए गए, पर हर बार पाकिस्तानी आतंकियों ने भारत के विश्वास को तोड़ा। जिसके बाद भारत सरकार का यह स्पष्ट मत बना है कि वह पाकिस्तान के साथ आगे की कोई भी चर्चा केवल आतंकवाद और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) पर ही करेगा। भारत ने आज पाकिस्तानियों का वीजा रद्द करने के साथ ही अटारी-वाघा सीमा क्रॉसिंग बंद करना, आयात-निर्यात को पूरी तरह से रोकना, अपना हवाई क्षेत्र बंद करने जैसे कई प्रतिबंध आतंकवाद के विरोध में भारत ने पाकिस्तान पर लागू किए हैं।
बिलावल के बयान अहम
ऐसे में स्वभाविक है कि पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल जो आज कह रहे हैं, वह बहुत अहम हो जाता है, क्योंकि इस बात को अभी एक माह भी नहीं हुआ है, जब उन्होंने भारत के खिलाफ जमकर जहर उगला था। बिलावल भारत को चेतावनी दे रहे थे कि अगर पाकिस्तान का पानी रोकने की कोशिश की गई तो देश के लिए युद्ध ही एकमात्र विकल्प रह जाएगा। यहां तक कि बिलावल के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय पाकिस्तानी संसदीय प्रतिनिधिमंडल भारत के साथ संघर्ष करने की बात कहने के बाद अपने देश का पक्ष रखने के लिए वाशिंगटन, न्यूयॉर्क और लंदन पहुंचा था। यह प्रतिनिधिमंडल अमेरिका में भारी बेइज्जती के बाद यूरोपीय यूनियन के नेताओं को बरगलाने के लिए ब्रसेल्स भी पहुंचा। जहां अमेरिका की तरह ही यूरोप में कई सांसदों और जिम्मेदार पदाधिकारियों ने पाकिस्तान से आए इस प्रतिनिधिमंडल के समक्ष आतंकवाद का साथ छोड़ने और आतंकवादियों को भारत प्रत्यर्पित करने को कहा था।
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पानी और खून एक साथ नहीं
भारत ने भी दुनिया को यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि पाकिस्तान के साथ पानी और खून एक साथ नहीं बहाए जा सकते। भारत ने पहले भी कई बार पाकिस्तान को सिंधु जल संधि की समीक्षा करने का अनुरोध किया था, लेकिन इसे अनसुना कर दिया गया। अब भारत को इस सिंधु जल संधि को सतत बनाए रखने का कोई कारण नजर नहीं आता है। कुल मिलाकर कर बिलावल का दिया हाल का बयान यही दर्शा रहा कि पाकिस्तान की हेकड़ी अब निकल चुकी है, वह अब भारत के सामने घुटनों पर आने को तैयार हो रहा है। निश्चित ही इसे भारत की एक बड़ी जीत के रूप में देखा जाना चाहिए।

