Lok Sabha: ऑपरेशन सिंदूर पर प्रधानमंत्री ने कांग्रेस की पाकिस्तान से की तुलना, जानिये क्या कहा

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कांग्रेस से जुड़ी विदेश नीति और आतंक के खिलाफ रणनीति दोनों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि तुष्टिकरण की राजनीति के कारण आतंक के खिलाफ देश की लड़ाई को कमजोर करने की कोशिश की गई।

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प्रधानमंत्री मोदी लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर भाषण देते हुए।
प्रधानमंत्री मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा की।

Lok Sabha:  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 29 जुलाई को लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर हुई चर्चा के दौरान कांग्रेस के नेतृत्व वाली पिछली सरकारों पर आतंक के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया और बताया कि उनकी सरकार ने भारत की विदेश और रक्षा नीति में पिछले 11 सालों के दौरान बड़े बदलाव कर देश को सशक्त बनाया है। उन्होंने इस बात पर अफसोस जाहिर किया कि आतंकवाद पर दुनिया के देशों से समर्थन मिला लेकिन कांग्रेस से समर्थन नहीं मिला। साथ ही कहा कि ऑपरेशन सिंदूर से आज आतंक के आकाओं को डर सताता है कि भारत आएगा और मार कर जाएगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाने के दावे का खंडन किया और विपक्ष पर कटाक्ष किया कि उनके नेता ‘बयान बहादुरों’ की तरह केवल सवाल उठाते हैं। वे आतंकी हमले पर की गई कार्रवाई पर सवाल उठाते हैं और हमला होने पर यह सवाल उठाते हैं कि कार्रवाई को क्यों रोका गया।

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कांग्रेस से जुड़ी विदेश नीति और आतंक के खिलाफ रणनीति दोनों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि तुष्टिकरण की राजनीति के कारण आतंक के खिलाफ देश की लड़ाई को कमजोर करने की कोशिश की गई। यहां तक कि वोट बैंक की राजनीति के कारण 26/11 के हमले को हिंदू आतंकवाद से जोड़ने की कोशिश की गई।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, “देश हैरान है कि कांग्रेस ने पाकिस्तान को क्लीन चिट दे दी है। वे कह रहे हैं कि पहलगाम के आतंकवादी पाकिस्तान से थे। हमें इसका सबूत दीजिए। पाकिस्तान भी वही मांग कर रहा है जो कांग्रेस कर रही है।”

प्रधानमंत्री ने इस दौरान रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता का जिक्र किया और कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने मेक इन इंडिया के हथियारों का दुनिया में डंका बजा दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास राष्ट्रीय सुरक्षा का कोई विजन नहीं था। उनके कालखंड में छोटे-छोटे हथियार के लिए भी विदेशों पर निर्भरता थी। उनकी सरकार ने रक्षा क्षेत्र में बड़े बदलाव किये जिससे आज भारत का रक्षा उत्पादन ढाई सौ प्रतिशत और निर्यात 30 गुना बड़ा है और भारत के हथियार दुनिया के 100 देशों तक पहुंच रहे हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे का स्पष्ट रूप से खंडन करते हुए उन्होंने सदन को बताया कि दुनिया के किसी भी नेता ने भारत को अपने ऑपरेशन को रोकने के लिए नहीं कहा था। उन्होंने कहा कि भारत युद्ध का नहीं बल्कि बुद्ध का देश है और हम समृद्धि और शांति चाहते हैं पर यह नहीं भूलना चाहिए की समृद्धि और शांति का मार्ग शक्ति से होकर जाता है।

प्रधानमंत्री कहा कि कांग्रेस ने भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ हमेशा समझौता किया है। आज उसके नेता पूछ रहे हैं कि भारत सरकार ने पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) को वापस क्यों नहीं लिया। वह पूछना चाहते हैं कि आखिर पीओके पर कब्जा किसकी सरकार ने होने दिया। उन्होंने कहा कि लम्हों ने खता की सदियों ने सजा पाई। आजादी के बाद कांग्रेस सरकार के गलत निर्णय की कीमत आज भी भारत चुका रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की आतंक के खिलाफ कार्रवाई से आज आतंकियों के मन में दहशत का माहौल है। उन्होंने कहा कि हमले के बाद अब उनकी आंखों में नींद नहीं आती। उन्हें डर सताता है कि भारत आएगा और मार कर जाएगा। यह आज का न्यू नॉर्मल सेट किया गया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को भी आतंकी हमले के बाद भारत की ओर से हमले की आशंका थी। इसीलिए वह न्यूक्लियर हमले की भी धमकियां दे रहा था। भारत ने जैसा सोच वैसी कार्रवाई की और पाकिस्तान कुछ नहीं कर पाया। पाकिस्तान को भारी नुकसान झेलना पड़ा और आज भी उसके एयर बेस ‘आईसीयू’ में पड़े हैं।

उन्होंने कहा कि दुनिया ने देखा कि हमारी कार्रवाई का कोई दायरा नहीं है। हम सिंधु से लेकर सिंदूर तक जा सकते हैं। हमने अपनी शर्तों पर हमला किया और दुनिया के केवल तीन देशों ने ही इस हमले को लेकर पाकिस्तान का साथ दिया। भारत की विदेश नीति के कारण दुनिया के कई देशों का समर्थन हमें मिला लेकिन अफसोस है कि देश के वीरों के पराक्रम को कांग्रेस का समर्थन नहीं मिला।

उन्होंने कहा, “22 अप्रैल के आतंकवादी हमले के सिर्फ 3-4 दिन बाद, वे (कांग्रेस) उछल-कूद करने लगे। वे कहने लगे, 56 इंच की छत कहाँ गई? कहाँ खो गया मोदी? मोदी फेल हो गया… वे पहलगाम में निर्दोष लोगों की हत्या पर भी अपनी राजनीति चमका रहे थे।”

मोदी ने कहा कि जब पायलट अभिनंदन पकड़े गए, तो पाकिस्तान में खुशी का माहौल होना स्वाभाविक था, क्योंकि उनके हाथ भारतीय सेना का पायलट लगा था। लेकिन यहां पर भी कुछ लोग थे जो कानों-कान कह रहे थे कि अब मोदी फंसा, अब देखते हैं, मोदी क्या करता है। उन्होंने कहा, “डंके की चोट पर अभिनंदन वापस आया।”

उन्होंने कांग्रेस नेताओं से आग्रह किया कि एक परिवार के दबाव में आकर पाकिस्तान को क्लीन चिट देना बंद करें। जो क्षण देश की विजय का है, कांग्रेस उसे उपहास का क्षण न बनाए। कांग्रेस को अपनी गलती सुधारनी चाहिए। एक तरफ भारत ‘आत्मनिर्भरता’ की ओर तेजी से बढ़ रहा है, और दूसरी तरफ कांग्रेस अब भी मुद्दों के लिए पाकिस्तान पर निर्भर होती जा रही है। दुर्भाग्य से कांग्रेस को मुद्दे भी पाकिस्तान से ‘इम्पोर्ट’ करने पड़ रहे हैं।

इस दौरान प्रधानमंत्री ने भारत के एयर डिफेंस सिस्टम की प्रशंसा की और कहा कि पाकिस्तान ने 09 मई की रात को एक हजार से अधिक ड्रोन हमले किए। उसकी कोशिश भयंकर तबाही मचाने की थी लेकिन सभी मिसाइल आसमान में चूर-चूर कर दी गई। हर देशवासियों को इस पर गर्व होना चाहिए। आदमपुर एयरपोर्ट पर पाकिस्तान ने हमले का झूठा दावा फैलाया, जिसके जवाब में वह अगले दिन एयर बेस पर पहुंचे और उसके दावों का खंडन किया।

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर यह स्पष्ट करता है कि भारत ने 3 बिंदुओं पर निर्णय लिया है। यदि भारत पर कोई आतंकवादी हमला होता है, तो हम अपने तरीके से, अपनी शर्तों पर और अपने समय पर जवाब देंगे। अब कोई परमाणु ब्लैकमेल काम नहीं करेगा। हम आतंकवाद का समर्थन करने वाली सरकारों और आतंकवादी मास्टरमाइंड को दो अलग-अलग संस्थाओं के रूप में नहीं देखेंगे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान दशकों तक युद्ध और छद्म युद्ध करता रहा। कांग्रेस सरकारों ने न तो सिंधु जल समझौते की समीक्षा की, न ही नेहरू जी की उस बड़ी गलती को कभी सुधारा। लेकिन अब भारत ने वह पुरानी गलती सुधारी है और ठोस निर्णय लिया है। नेहरू जी की ओर से किए गए ऐतिहासिक ब्लंडर सिंधु जल समझौता को सुधारा है। अब राष्ट्रहित और किसानों के हित में इसे स्थगित कर दिया गया है। देश का अहित करने वाला यह समझौता अब इस रूप में आगे नहीं चल सकता। भारत ने साफ कर दिया है कि खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते।

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उन्होंने भाषण के अंत में कहा, “करो चर्चा, और इतनी करो कि दुश्मन दहशत से दहल उठे। रहे ध्यान बस इतना कि सिंदूर का मान और सेना का सम्मान, प्रश्नों में भी अटल रहे। यदि हमला मां भारती पर हुआ, तो प्रचंड प्रहार करना ही होगा। दुश्मन जहां भी हो, हमें भारत के लिए ही जीना होगा।”

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