भारत (India) ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) में पाकिस्तान (Pakistan) को कड़ी फटकार लगाते हुए उसे बाल अधिकारों का “सबसे गंभीर उल्लंघनकर्ताओं” में से एक बताया है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे (BJP MP Nishikant Dubey) ने पाकिस्तान पर भारत (India) और अफगानिस्तान (Afghanistan) में स्कूलों और छात्रों को निशाना बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि पाकिस्तान को उपदेश देने के बजाय अपने गिरेबान में झांकना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र में ‘बच्चों के अधिकारों का प्रचार और संरक्षण’ एजेंडे पर भारत का पक्ष रखते हुए, दुबे ने कहा कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र के ‘बच्चे और सशस्त्र संघर्ष’ (Children and Armed Conflict – CAAC) एजेंडे का लगातार उल्लंघन कर रहा है। उन्होंने सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने और बच्चों के खिलाफ गंभीर दुर्व्यवहार से दुनिया का ध्यान हटाने की पाकिस्तानी कोशिशों की भी कड़ी निंदा की।
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अफगानिस्तान में पाकिस्तानी हमलों का किया जिक्र
निशिकांत दुबे ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव की 2025 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पाकिस्तान की सेना द्वारा अफगानिस्तान सीमा पर की गई गोलाबारी और हवाई हमलों में कई अफगान बच्चे मारे गए हैं और अपंग हुए हैं। उन्होंने कहा, “रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कैसे पाकिस्तान ने स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और स्कूलों, विशेषकर लड़कियों के स्कूलों पर हमले किए।”
‘ऑपरेशन सिंदूर’ को बताया जरूरी
भाजपा सांसद ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए भारत की जवाबी कार्रवाई को जायज ठहराया। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान प्रशिक्षित आतंकवादियों द्वारा किए गए क्रूर हमलों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय भूला नहीं है। इसके जवाब में, भारत ने मई 2025 में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत नौ आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की थी।” उन्होंने कहा कि यह आतंकवाद के खिलाफ अपने लोगों की रक्षा के लिए भारत का एक संतुलित और आवश्यक कदम था।
भारत ने गिनाए बाल संरक्षण के काम
दुबे ने इसके विपरीत पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि वह जानबूझकर भारत के सीमावर्ती गांवों को निशाना बनाता है, जिसमें कई निर्दोष नागरिक और बच्चे मारे जाते हैं। उन्होंने पाकिस्तान को नसीहत देते हुए कहा, “पाकिस्तान को आईने में खुद को देखना चाहिए, इस मंच पर उपदेश देना बंद करना चाहिए, अपनी सीमाओं के भीतर बच्चों की रक्षा के लिए कार्य करना चाहिए, और अपनी सीमाओं के पार महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाना बंद करना चाहिए।”
इस दौरान दुबे ने भारत में बाल संरक्षण के लिए उठाए गए कदमों, जैसे ‘चाइल्ड हेल्पलाइन 1098’ की भी जानकारी दी और इन प्रयासों को सराहने के लिए संयुक्त राष्ट्र का धन्यवाद किया।
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