मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ‘गुरु-द्रोही’ घोषित, अकाल तख्त के बड़े फैसले से पंजाब की राजनीति में आया भूचाल

पंजाब की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आया है। राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत मान को सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त द्वारा "गुरु-द्रोही" और "पंथ विरोधी" घोषित किए जाने के बाद राजनीतिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर बहस तेज हो गई है।

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-नरेश वत्स

पंजाब की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आया है। राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) को सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त द्वारा “गुरु-द्रोही” और “पंथ विरोधी” घोषित किए जाने के बाद राजनीतिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर बहस तेज हो गई है। पंजाब में धार्मिक और राजनीतिक मुद्दे अक्सर एक-दूसरे से जुड़े रहे हैं, इसलिए यह विवाद केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है बल्कि इसके दूरगामी राजनीतिक प्रभाव पड़ना तय हैं। (Bhagwant Mann)

भगवंत मान आम आदमी पार्टी के ऐसे नेता हैं जिन्होंने एक हास्य कलाकार से लेकर सांसद और फिर मुख्यमंत्री तक का लंबा सफर तय किया है। उनके राजनीतिक जीवन के साथ-साथ विवाद भी उनका पीछा करते रहे हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी यह सिलसिला नहीं थमा है। (Bhagwant Mann)

ताजा विवाद एक वायरल वीडियो को लेकर है। आरोप लगाया गया है कि वीडियो में सिख गुरुओं के चित्रों के सामने शराब का सेवन या शराब के छींटे पड़ते दिखाई दे रहे हैं। अकाल तख्त ने इस मामले को गंभीर धार्मिक अपराध मानते हुए भगवंत मान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। राजनीतिक विरोधी इसे मुद्दा बनाकर सरकार को घेरना चाहते हैं। लेकिन यह मामला अब केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रह गया है। सिख समाज में धार्मिक संस्थाओं का प्रभाव बहुत गहरा है और अकाल तख्त की टिप्पणी को गंभीरता से लिया जाता है। (Bhagwant Mann)

दरअसल भगवंत मान का नाम पहली बार किसी विवाद में नहीं आया है। मुख्यमंत्री बनने से पहले और बाद में भी शराब को लेकर उन पर कई बार सवाल उठते रहे हैं। राजनीति में आने से पहले उनके कार्यक्रमों और सार्वजनिक जीवन को लेकर भी चर्चाएं होती रही हैं। स्वयं भगवंत मान ने कुछ वर्ष पहले सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि उन्हें शराब की आदत रही है और उन्होंने अपनी मां तथा परिवार के आग्रह पर इसे छोड़ने का निर्णय लिया था। उस समय उनके इस स्वीकारोक्ति को ईमानदारी के रूप में देखा गया और कई लोगों ने इसकी सराहना भी की। (Bhagwant Mann)

लेकिन चंडीगढ़ प्रेस क्लब में एक कार्यक्रम के दौरान सहारा समय द्वारा उनसे शराब सेवन को लेकर पूछे गए सवाल का वीडियो लंबे समय तक सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना रहा। विपक्ष ने इसे बार-बार उठाकर उनकी छवि पर सवाल खड़े करने की कोशिश की। (Bhagwant Mann)

सबसे बड़ा विवाद 2022 में सामने आया था जब जर्मनी के फ्रैंकफर्ट हवाई अड्डे पर उन्हें विमान से उतारे जाने की खबरें आई थीं। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री नशे की हालत में थे जिसके कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई। पंजाब सरकार और भगवंत मान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था और इसे राजनीतिक दुष्प्रचार बताया था। बावजूद इसके यह मामला राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियां बना और लंबे समय तक चर्चा में रहा। (Bhagwant Mann)

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भगवंत मान की सबसे बड़ी ताकत उनकी जनसंपर्क क्षमता रही है। वे परंपरागत नेताओं की तुलना में आम लोगों से अधिक जुड़ाव रखते हैं। यही कारण है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को ऐतिहासिक जीत मिली। लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद उनसे अपेक्षाएं भी बढ़ी हैं। अब उनसे केवल जननेता की नहीं बल्कि एक जिम्मेदार प्रशासक की भूमिका निभाने की उम्मीद की जाती है। (Bhagwant Mann)

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वर्तमान विवाद इसलिए अधिक गंभीर माना जा रहा है क्योंकि इसमें धार्मिक भावनाएं जुड़ गई हैं। पंजाब का इतिहास बताता है कि जब भी कोई राजनीतिक मुद्दा धार्मिक स्वरूप ग्रहण कर लेता है तो उसके प्रभाव लंबे समय तक बने रहते हैं। अकाली दल, भाजपा और कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से हमले तेज कर दिए।, इसमें कोई संदेह नहीं है। खासकर शिरोमणि अकाली दल, जिसकी राजनीति का बड़ा आधार सिख धार्मिक संस्थानों से जुड़ा रहा है, इस विवाद को आगामी चुनावों तक जीवित रखने का प्रयास कर सकता है। (Bhagwant Mann)

पंजाब में धार्मिक मुद्दों के कारण चुनाव में हार जीत तय हो जाती है। बेरोजगारी, नशे की समस्या, कृषि संकट, उद्योगों का पलायन और कानून-व्यवस्था को लेकर भी भगवंत मान सरकार पर सवाल उठ रहे हैं। लेकिन यदि सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे तो यह विवाद राजनीतिक नुकसान को और बढ़ा सकता है। (Bhagwant Mann)

आज की स्थिति में भगवंत मान एक ऐसे मोड़ पर खड़े दिखाई देते हैं जहां उन्हें राजनीतिक और व्यक्तिगत दोनों स्तरों पर अपनी विश्वसनीयता साबित करनी होगी। मुख्यमंत्री के रूप में उनकी उपलब्धियों और विवादों के बीच चल रही यह लड़ाई आने वाले समय में पंजाब की राजनीति की दिशा तय कर सकती है। यह केवल एक वीडियो या एक बयान का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह मुख्यमंत्री की सार्वजनिक छवि, उनकी नैतिक विश्वसनीयता और आम आदमी पार्टी की राजनीतिक साख से जुड़ा प्रश्न बन गया है। (Bhagwant Mann)

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पंजाब की राजनीति में अक्सर कहा जाता है कि यहां जनता नेताओं को सिर आंखों पर भी बिठाती है और जरूरत पड़ने पर कठोर फैसला भी सुनाती है। भगवंत मान के लिए मौजूदा विवाद इसी कसौटी की तरह है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि वे इस संकट से और अधिक मजबूत होकर निकलते हैं या फिर यह विवाद उनके राजनीतिक सफर की सबसे बड़ी चुनौती साबित होता है। (Bhagwant Mann)

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