Mahakal Shahi Sawari: मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण मास के पहले सोमवार काे आज भगवान महाकाल अपनी पहली शाही सवारी में चंद्रमौलेश्वर स्वरूप में नगर भ्रमण पर निकलेंगे। अवंतिकानाथ अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए पालकी में विराजमान होकर उज्जैन की सड़कों पर भ्रमण करेंगे। ढोल-नगाड़ों, शंखनाद, झांझ-मंजीरों और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से पूरी धर्मनगरी शिवमय हो जाएगी।
श्रावण-भाद्रपद मास में निकलने वाली छह पारंपरिक सवारियों में यह पहली सवारी होगी। इस वर्ष पहली सवारी 3 अगस्त को और अंतिम राजसी सवारी 7 सितंबर को निकाली जाएगी। परंपरा के अनुसार दोपहर 3:30 बजे सभा मंडप में भगवान चंद्रमौलेश्वर का विशेष पूजन होगा, जिसके बाद शाम 4 बजे महाकाल मंदिर से सवारी रवाना होगी। करीब डेढ़ किलोमीटर की यात्रा कर शाम लगभग 5 बजे सवारी रामघाट पहुंचेगी, जहां पवित्र शिप्रा नदी के जल से भगवान महाकाल का अभिषेक, पूजन और आरती होगी। इसके बाद सवारी पुनः मंदिर लौटेगी और शाम करीब 7 बजे महाकाल मंदिर पहुंचेगी।
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यह रहेगा सवारी का मार्ग
बाबा महाकाल की पालकी महाकाल मंदिर से निकलकर गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी होते हुए रामघाट पहुंचेगी। वापसी में सवारी रामघाट, रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, ढाबा रोड, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी चौराहा होते हुए पुनः महाकाल मंदिर पहुंचेगी।
रामघाट पर होगा जलाभिषेक, गोपाल मंदिर में हरि-हर मिलन
रामघाट पर शिप्रा के पवित्र जल से भगवान महाकाल का अभिषेक एवं महाआरती की जाएगी। वहीं गोपाल मंदिर पहुंचने पर हरि-हर मिलन का दिव्य और दुर्लभ दृश्य श्रद्धालुओं को देखने मिलेगा, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। सवारी के दौरान सशस्त्र पुलिस बल बाबा महाकाल को पारंपरिक गार्ड ऑफ ऑनर भी देगा।
प्रशासन ने किए व्यापक इंतजाम
महाकाल मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि इस वर्ष भी सभी आरतियों में कार्तिक मंडप की पहली तीन पंक्तियों से श्रद्धालुओं को चलित आरती दर्शन की सुविधा मिलेगी। प्रत्येक सवारी में जनजातीय सांस्कृतिक दल अपनी प्रस्तुतियां देंगे तथा पांच एलईडी रथ आकर्षण का केंद्र रहेंगे। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 15 स्थानों पर मेडिकल टीमों की तैनाती के साथ 24 घंटे एंबुलेंस सेवा उपलब्ध रहेगी। भीड़ को देखते हुए सुरक्षा, यातायात नियंत्रण और साफ-सफाई के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।
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भस्म आरती में हुआ दिव्य शृंगार
श्रावण मास के पहले सोमवार तड़के विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती विशेष धार्मिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। सुबह 2:30 बजे मंदिर के कपाट खुलने के बाद पुजारियों ने भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक एवं पूजन किया गया।
भगवान का भांग, चंदन, रुद्राक्ष, रजत आभूषणों, पुष्पमालाओं और शेषनाग के रजत मुकुट से राजाधिराज स्वरूप में भव्य शृंगार किया गया। भगवान गणेश, माता पार्वती और भगवान कार्तिकेय का पूजन कर फल एवं मिष्ठान का नैवेद्य अर्पित किया गया। महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को पवित्र भस्म अर्पित की गई।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। भस्म आरती में देशभर से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं भी कही। पूरे मंदिर परिसर में “हर-हर महादेव” और “जय श्री महाकाल” के जयघोष लगातार गूंजते रहे।
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