पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में हालात बेकाबू हो गए हैं। नागरिक संगठन ‘जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (JAAC) पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद पूरे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर असंतोष और हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। रावलकोट में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई हिंसक झड़पों में अब तक 11 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 70 से अधिक लोग घायल हो गए हैं। तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए आज यानी 9 जून, 2026 को POK बंद की घोषणा की गई है। (Pakistan)
कैसे बिगड़े हालात?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हिंसा की शुरुआत तब हुई जब जेएएसी के समर्थक एक अस्पताल के शवगृह के बाहर एकत्र हुए, जहां फायरिंग में मारे गए संगठन के एक कार्यकर्ता का शव रखा हुआ था। भीड़ को हटाने के लिए जब पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने कार्रवाई की, तो स्थिति हिंसक हो गई। (Pakistan)
फायरिंग और हिंसक झड़पों में 11 की जान गई
प्रशासनिक दावों के अनुसार, सुरक्षाबलों पर कुछ उपद्रवियों द्वारा की गई फायरिंग के जवाब में 6 प्रदर्शनकारी मारे गए। इस दौरान हुई हिंसक झड़पों में 4 पुलिसकर्मियों और एक राहगीर ने भी अपनी जान गंवा दी। पुलिस प्रमुख लियाकत मलिक के मुताबिक, घटनाओं में 23 सुरक्षाकर्मी और 50 प्रदर्शनकारी जख्मी हुए हैं। (Pakistan)
सरकारी आंकड़ों पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों और जेएएसी समर्थकों ने सरकारी आंकड़ों को खारिज करते हुए आशंका जताई है कि हताहत होने वाले आम नागरिकों की वास्तविक संख्या सरकारी रिपोर्ट से कहीं अधिक है। (Pakistan)
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विरोध प्रदर्शनों की मुख्य वजह क्या है?
POK में हुए इस बवाल के पीछे मुख्य रूप से राजनीतिक और आर्थिक कारण शामिल हैं। 45 सदस्यीय असेंबली में 12 सीटें उन कश्मीरी शरणार्थियों (Refugee) के लिए आरक्षित हैं, जो इस समय पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में रह रहे हैं। स्थानीय संगठनों और जेएएसी का आरोप है कि इस निर्णय से मूल निवासियों का प्रतिनिधित्व कमजोर होगा और बाहरी लोगों का हस्तक्षेप बढ़ेगा। उनका मानना है कि क्षेत्र के भविष्य का फैसला केवल वहीं रहने वाले नागरिकों को करना चाहिए। (Pakistan)
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