Srinagar: पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती एक बार फिर राष्ट्रध्वज को लेकर राजनीतिक विवादों के केंद्र में आ गई हैं। श्रीनगर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने की वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक धरना-प्रदर्शन के दौरान वह हाथ में तिरंगा थामे नजर आईं। हालांकि, वायरल वीडियो और तस्वीरों में वह राष्ट्रीय ध्वज को उल्टा (हरा भाग ऊपर और केसरिया नीचे) पकड़े हुए दिखीं, जिसके बाद से भाजपा और विभिन्न राजनीतिक संगठनों ने उनके खिलाफ राष्ट्रीय ध्वज के अपमान की धाराओं में कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग शुरू कर दी है।(Srinagar)
राष्ट्रीय ध्वज संहिता (Flag Code of India) और तय नियम
भारत में राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान, प्रदर्शन और फहराने के नियमों को ‘भारतीय ध्वज संहिता, 2002’ (Flag Code of India) के तहत विनियमित किया जाता है। इस कानून के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार, तिरंगे को कभी भी उल्टा, क्षतिग्रस्त, या कटा-फटा नहीं प्रदर्शित किया जा सकता। प्रदर्शन के दौरान हमेशा केसरिया रंग की पट्टी सबसे ऊपर और हरी पट्टी सबसे नीचे होनी चाहिए। राष्ट्रीय ध्वज को किसी भी प्रकार की सजावट, झंडी या उल्टा पकड़कर इस्तेमाल करना इसके मान-सम्मान के विपरीत माना जाता है।(Srinagar)
राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के कानूनी प्रावधान
यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर या सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करता है, तो उसके खिलाफ ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971’ (Prevention of Insults to National Honour Act, 1971) की धारा 2 के तहत कार्रवाई की जाती है। इस अधिनियम के अनुसार, सार्वजनिक स्थान पर भारतीय राष्ट्रध्वज को जलाने, कुचलने, विकृत करने, उल्टा प्रदर्शित करने या इसके प्रति मौखिक या शारीरिक रूप से अनादर प्रकट करने पर सख्त दंड का प्रावधान है।(Srinagar)
क्या हो सकती है संभावित कार्रवाई और सजा?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम’ के तहत दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को 3 साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों की सजा दी जा सकती है। यदि कोई व्यक्ति इस अपराध को दोहराता है, तो उसे कम से कम एक वर्ष के कारावास का सामना करना पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त, गंभीर मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत लोक शांति भंग करने और राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान की जांच भी शामिल की जा सकती है।(Srinagar)
राजनीतिक घमासान और जांच की प्रक्रिया
घटना के सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने पूरे मामले का संज्ञान लिया है और यह जांच की जा रही है कि यह कृत्य जानबूझकर किया गया या फिर प्रदर्शन की हड़बड़ी में हुई कोई लापरवाही थी। भाजपा नेताओं का कहना है कि एक पूर्व मुख्यमंत्री और जिम्मेदार जन प्रतिनिधि से ऐसी चूक की उम्मीद नहीं की जा सकती, इसलिए प्रशासन को बिना किसी पक्षपात के मामला दर्ज कर जांच करनी चाहिए। वहीं दूसरी ओर, समर्थकों द्वारा इसे मानवीय भूल बताया जा रहा है।(Srinagar)
ये भी पढ़ेंः Sheikh Hasina जल्द लौटेंगी बांग्लादेश, बेटे सजीब का बड़ा ऐलान
राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान पर संवैधानिक दायित्व
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51A (a) के अनुसार, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करना प्रत्येक भारतीय नागरिक का पहला मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duty) है। सार्वजनिक पदों पर रहे व्यक्तियों के लिए इन संवैधानिक दायित्वों का पालन करना और भी अनिवार्य हो जाता है। पुलिस और कानूनी एजेंसियां फिलहाल वीडियो क्लिप्स और गवाहियों के आधार पर कानूनी राय जुटा रही हैं कि क्या इस मामले में सीधे FIR दर्ज कर कानूनी शिकंजा कसा जाए।(Srinagar)

