Nepal: जिहादियों का कांवड़ियों पर खूनी वार, कब तक सहेगा सनातनी परिवार?

नेपाल के तराई क्षेत्र में कांवड़ियों पर हुआ बर्बर हमला सनातनी आस्था पर गहरा आघात है। शांतिपूर्ण 'बोलबम' यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं पर हुए पथराव व हिंसा में तीन निर्दोष युवकों की जान चली गई। विडंबना यह है कि इस गंभीर जिहादी अपराध को वामपंथी मीडिया तंत्र ने महज एक 'झड़प' बताकर दबाने और वाइटवॉश करने का घिनौना प्रयास किया।

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Violence during the Kanwar Yatra in Nepal.
A violent clash erupted during the Kanwar Yatra in Nepal.

प्रीतम सिंह
Nepal: नेपाल के सुनसरी जिले से शुरू हुई शांतिपूर्ण ‘बोलबम’ कांवड़ यात्रा उस वक्त मातम और चीखों में बदल गई, जब निहत्थे सनातनियों पर अचानक पत्थरों, लाठियों और धारदार हथियारों से हमला बोल दिया गया। पवित्र जल लेकर शिवालय की ओर बढ़ रहे श्रद्धालुओं पर हुआ यह हमला कोई आकस्मिक घटना नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश का नतीजा था। इस बर्बरता में तीन निर्दोष श्रद्धालुओं—ओम प्रकाश मेहता, जयप्रकाश मेहता और गणेश यादव—की जान चली गई, जबकि दर्जनों कांवड़िए और सुरक्षाकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए।(Nepal)

विवाद का सच और प्रशासनिक विफलता
हिंसा की शुरुआत देवांगंज इलाके में एक मंदिर के सार्वजनिक परिसर में लगाए गए झंडे के विवाद को लेकर हुई थी। स्थानीय सनातनी समाज द्वारा इसका विरोध किया गया, लेकिन जब कांवड़िए वहाँ से गुजरे तो उन पर योजनाबद्ध तरीके से हमला कर दिया गया। यह आग देखते ही देखते इनरवा, जनकपुर, सिराहा और लहान तक फैल गई। स्थिति इतनी भयावह हो गई कि 6 से अधिक शहरों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगाना पड़ा, इंटरनेट सेवाएं ठप करनी पड़ीं और सड़कों पर नेपाली सेना की टुकड़ियों को फ्लैग मार्च के लिए उतारना पड़ा।(Nepal)

वामपंथी मीडिया का शर्मनाक ‘वाइटवॉश’
इस निर्मम और एकतरफा हिंसा के बाद अंतरराष्ट्रीय और वामपंथी मीडिया का दोहरा चरित्र एक बार फिर बेनकाब हुआ। कांवड़ियों की लक्षित हत्या और सनातनी पहचान पर हुए इस हमले को वामी तंत्र ने बड़ी चालाकी से “दो गुटों के बीच मामूली झड़प” बताकर खारिज करने की कोशिश की। जिहादी मानसिकता को संरक्षण देने और तुष्टिकरण के अपने पुराने एजेंडे के तहत मीडिया का यह वर्ग अपराधियों के घिनौने कृत्य को दबाने और पीड़ित समुदाय के आक्रोश को ही कटघरे में खड़ा करने में जुट गया।(Nepal)

तराई क्षेत्र में बदलता डेमोग्राफी: हिंसा की असली जड़
नेपाल के भारत से सटे तराई (मधेस) क्षेत्र—जैसे सुनसरी, रौतहट, बांके, पर्सा और सिराहा—में पिछले दो दशकों में हुआ अप्रत्याशित जनसांख्यिकीय बदलाव इस कट्टरपंथ का सबसे बड़ा कारण है। कई सीमावर्ती जिलों में एक खास समुदाय की आबादी बढ़कर 15% से 20% तक पहुँच चुकी है। बिना पंजीकरण के चल रहे मदरसों का बढ़ता नेटवर्क, खाड़ी देशों से आ रही संदिग्ध फंडिंग और भारत-नेपाल की 1800 किमी खुली सीमा का फायदा उठाकर होने वाली अवैध घुसपैठ ने तराई के पार पारंपरिक सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न कर दिया है, जिससे कट्टरपंथियों के हौसले बुलंद हुए हैं।

बालेन शाह सरकार की धर्मनिरपेक्षता पर सवाल
2015 में नेपाल के ‘धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र’ बनने के बाद से ही बहुसंख्यक हिंदू समाज खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। यद्यपि प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार खुद को कानून-व्यवस्था और संविधान के प्रति सख्त बताती है, लेकिन ‘हिंदू राष्ट्र’ की मांग को दरकिनार करने और सांप्रदायिक उपद्रवियों पर शुरुआती ढिलाई बरतने की नीति ने उपद्रवियों को शह दी है। जब भी सनातनी त्योहारों—जैसे रामनवमी, छठ या कांवड़ यात्रा—पर हमले होते हैं, तो सख्त मिसाल बनाने के बजाय केवल औपचारिकता निभाना कानून-व्यवस्था के इकबाल पर सवाल खड़े करता है।(Nepal)

अब याचना नहीं, कड़ा हिसाब होगा!
नेपाल की धरती पर सनातनी आस्था पर हो रहे यह लगातार हमले पूरे दक्षिण एशिया के लिए एक गंभीर चेतावनी हैं। तुष्टिकरण और छद्म-धर्मनिरपेक्षता की आड़ में जिहादी तत्वों को पनपने की छूट देना नेपाल की संप्रभुता के लिए भी बड़ा खतरा है। भारत और नेपाल दोनों ही देशों के सनातनी समाज में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। जिहादी मानसिकता और उनके मददगारों को स्पष्ट संदेश मिल जाना चाहिए कि अब आस्था पर हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और हर एक वार का कड़ा व निर्णायक हिसाब लिया जाएगा।(Nepal)

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जिहादी तत्वों को कड़ा संदेश देना जरुरी
नेपाल के तराई क्षेत्र में कांवड़ियों पर हुआ बर्बर हमला सनातनी आस्था पर गहरा आघात है। शांतिपूर्ण ‘बोलबम’ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं पर हुए पथराव व हिंसा में तीन निर्दोष युवकों की जान चली गई। विडंबना यह है कि इस गंभीर जिहादी अपराध को वामपंथी मीडिया तंत्र ने महज एक ‘झड़प’ बताकर दबाने और वाइटवॉश करने का घिनौना प्रयास किया। सीमावर्ती जिलों में तेजी से बदलते डेमोग्राफी, अनियंत्रित मदरसा नेटवर्क और तुष्टिकरण की राजनीति ने कट्टरपंथियों के हौसले बुलंद कर दिए हैं। अब समय आ गया है कि इस छद्म-धर्मनिरपेक्षता को नकारते हुए आस्था पर वार करने वाले जिहादी तत्वों को कड़ा और निर्णायक संदेश दिया जाए।(Nepal)

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