Nalanda Temple Case: मासूमियत के आड़ में नफरत फैलाने का खेल, आखिर कौन घोल रहा है मुस्लिम बच्चों के जहन में जहर?

बिहार के नालंदा के शिवमन्दिर में तोडफोड एवं लघुशंका, हिरासत में तीन नाबालिग मुसलमान बच्चे! इतनी कम उम्र के बच्चों में धार्मिक विद्वेष और आक्रामकता उनके पारिवारिक परिवेश और शिक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। बच्चों को नफरत सिखाने वाले अभिभावकों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

7

Nalanda Temple Case: बिहार के नालंदा जिले से एक संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां एक प्राचीन शिव मंदिर परिसर में तोड़फोड़ और मर्यादा भंग करने के आरोप में 4 से 5 वर्ष की आयु के तीन मुस्लिम बच्चों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। घटना मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरे में कैद हो गई, जिसमें बच्चे परिसर में पत्थर व ईंटें फेंकते, मूर्ति को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करते और अमर्यादित कृत्य करते हुए देखे गए। घटना की जानकारी मिलते ही क्षेत्र में तनाव की स्थिति को देखते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

इसे भी पढ़ें: Helicopter Crash: लॉस एंजेलिस में न्यूज हेलीकॉप्टर हुआ क्रैश, हादसे में 3 लोगों की गई जान

मुस्लिम बहुल क्षेत्र में बार-बार आघात, श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश

स्थानीय श्रद्धालुओं और मंदिर में पूजा करने वाले अमन कुमार के अनुसार, यह क्षेत्र मुख्य रूप से मुस्लिम बहुल है और आसपास के हिंदुओं के लिए यह इकलौता मुख्य मंदिर है। स्थानीय नागरिक सूरज कुमार ने बताया कि मंदिर की ओर जाने वाले मुख्य मार्गों पर अतिक्रमण कर लिया गया है, जिससे श्रद्धालुओं की आवाजाही पहले ही कठिन हो गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस परिसर में पहले भी चोरी और असामाजिक गतिविधियों जैसी घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे हिंदू समाज की धार्मिक भावनाएं बार-बार आहत हो रही हैं।

इसे भी पढ़ें: Nepal Earthquake: नेपाल में ढाई घंटे के अंदर दो बार कांपी धरती! 4.5 और 4.2 तीव्रता के झटकों से मची हलचल

बचपन में बोए जा रहे नफरत के बीज, माता-पिता पर सख्त कार्रवाई की मांग

इस घटना ने एक गंभीर और चिंतनीय प्रश्न खड़ा कर दिया है कि आखिर इतनी छोटी उम्र के बच्चों के मन में कट्टरता और हिंदुओं के प्रति आक्रामकता का ज़हर कौन घोल रहा है। स्थानीय समाज का मानना है कि यह कोई अनजाने में हुई घटना नहीं, बल्कि बच्चों के पारिवारिक और सामाजिक परिवेश में दी जा रही सीख का नतीजा है। यदि बचपन से ही मंदिर और हिंदू मान्यताओं के प्रति इस तरह की नफरत सिखाई जाएगी, तो भविष्य में यह प्रवृत्ति और अधिक उग्र रूप ले सकती है। यही कारण है कि अब न केवल बच्चों के सुधार बल्कि ऐसे कृत्यों को शह देने वाले उनके माता-पिता और अभिभावकों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग उठ रही है।

Join Our WhatsApp Community
Get The Latest News!
Don’t miss our top stories and need-to-know news everyday in your inbox.