Maharashtra Sadan Ganesh Utsav: नई दिल्ली स्थित महाराष्ट्र सदन में गणेश उत्सव के मौके पर भक्ति और महाराष्ट्र की समृद्ध खान-पान परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिला। गणपति बप्पा की आराधना के साथ यहां पारंपरिक व्यंजन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें महिलाओं ने अपने हाथों से तैयार किए गए अलग-अलग महाराष्ट्रीयन व्यंजन पेश किए।
प्रतियोगिता में महाराष्ट्र के पारंपरिक स्वाद और पाक कला की विविधता देखने को मिली। महिलाओं ने बेहद उत्साह के साथ अपने-अपने क्षेत्र के पारंपरिक व्यंजन तैयार कर प्रतियोगिता में प्रस्तुत किए। इन व्यंजनों में महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों की खान-पान संस्कृति की झलक साफ दिखाई दी।
इस आयोजन का खास आकर्षण रहा मोदक। गणेश चतुर्थी और गणेश उत्सव में मोदक को भगवान गणेश का प्रिय भोग माना जाता है और महाराष्ट्र के घर-घर में इसे विशेष रूप से तैयार किया जाता है। प्रतियोगिता में महिलाओं ने अलग-अलग तरह के मोदक बनाकर अपनी पाक कला का प्रदर्शन किया।
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कोंकण से लेकर विदर्भ तक महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों में मोदक बनाने की अपनी अलग परंपरा है। कहीं उकडीचे मोदक का पारंपरिक स्वाद देखने को मिलता है, तो कहीं अलग तरह की भरावन और स्वाद के साथ मोदक तैयार किया जाता है। यही विविधता इस आयोजन में भी देखने को मिली।
इस मौके पर महाराष्ट्र के मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल की धर्मपत्नी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। उन्होंने प्रतियोगिता में शामिल महिलाओं द्वारा तैयार किए गए विभिन्न व्यंजनों को देखा और महाराष्ट्र की पारंपरिक पाक कला से रूबरू हुईं। उन्होंने महिलाओं के हुनर और उनके द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक व्यंजनों की सराहना भी की।
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आयोजन में महिलाओं ने केवल अपने हाथों का स्वाद ही नहीं दिखाया, बल्कि महाराष्ट्र की उस पाक परंपरा को भी सामने रखा, जो पीढ़ियों से परिवारों और घरों में चली आ रही है। पारंपरिक व्यंजनों के जरिए महाराष्ट्र की संस्कृति और क्षेत्रीय विविधता को भी प्रदर्शित किया गया।
गणेश उत्सव के इस आयोजन में भक्ति के साथ संस्कृति और परंपरा का रंग भी देखने को मिला। गणपति बप्पा के भोग से लेकर महाराष्ट्र की रसोई तक, मोदक यहां सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और पीढ़ियों से चली आ रही पाक विरासत का प्रतीक बनकर सामने आया।
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