एनआईए की एक विशेष अदालत (NIA Special Court) ने 29 सितंबर, 2008 को मालेगांव भिक्कू चौक विस्फोट मामले (Malegaon Bhikku Chowk Blast Case) में सभी 7 आरोपियों (Accused) को बरी (Acquitted) कर दिया है। अदालत ने कहा कि संदेह के आधार पर किसी को भी दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
साध्वी प्रज्ञा सिंह, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, सुधाकर चतुर्वेदी, समीर कुलकर्णी, मेजर (सेवानिवृत्त) रमेश उपाध्याय, सुधाकर द्विवेदी और अजय राहिरकर को आज एक विशेष अदालत ने बरी कर दिया। इस फैसले ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा हिंदुओं को आतंकवादी घोषित करने की रची गई साजिश को ध्वस्त कर दिया है।
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29 सितंबर, 2008 को रमज़ान के महीने में हुए इस विस्फोट में छह लोग मारे गए थे और सौ से ज़्यादा घायल हुए थे। एक मस्जिद के पास खड़े एक दोपहिया वाहन में विस्फोट हो गया था। इस मामले में, तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने निर्दोष हिंदू नेताओं को हिंदू आतंकवाद की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया और उन्हें बेरहमी से प्रताड़ित किया।
19 अप्रैल को सुनवाई पूरी हुई और अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। एनआईए ने आरोपियों को उचित सजा देने की मांग की। मालेगांव विस्फोटों की जाँच शुरू में आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने की थी, लेकिन 2011 में यह जाँच राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दी गई। सात आरोपियों के खिलाफ आरोप तय होने के बाद 2018 में वास्तविक मुकदमा शुरू हुआ। एटीएस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था, लेकिन बाद में मामला वापस ले लिया गया।
आज अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
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