बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र में पिछले तीन दिनों से चल रही रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल पर खुद संज्ञान लेते हुए सख्त रुख अपनाया है। (6 अगस्त, 2026) को कोर्ट ने डॉक्टरों को निर्देश दिया है कि वे बिना किसी देरी के अपनी हड़ताल वापस लें और मरीजों के हित में काम पर लौटें। (Bombay HC)
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह डॉक्टरों की सभी दलीलें और परेशानियां सुनने को तैयार है, लेकिन इससे पहले हड़ताल खत्म होना अनिवार्य है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी नगर निगम अस्पताल में इलाज के अभाव में एक भी मरीज की जान नहीं जानी चाहिए। (Bombay HC)
रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA), महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (MARD) और राज्य के मेडिकल शिक्षा विभाग को नोटिस जारी किया हैं। (Bombay HC)
ब्रिज कोर्स पर रोक की मांग
जानकारी के अनुसार, रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष से बातचीत के दौरान कोर्ट ने कहा कि भले ही आपकी मांगें जायज हों, लेकिन एक डॉक्टर के तौर पर आप ओपीडी (OPD) या किसी भी अन्य सेवा में मरीजों का इलाज करने से मना नहीं कर सकते। डॉक्टरों के वकील ने दलील दी कि होम्योपैथ चिकित्सकों के लिए लाए गए ब्रिज कोर्स और उनके रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाई जाए, तो हड़ताल तत्काल समाप्त कर दी जाएगी। वकील का कहना है कि 6 महीन का कोर्स करने वाले प्रैक्टिशनर वर्षों की कठिन मेहनत से MBBS की डिग्री हासिल करने वाले डॉक्टरों के समकक्ष नहीं हो सकते। (Bombay HC)
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हड़ताल की असली वजह
महाराष्ट्र राज्य सरकार के उस हालिया आदेश के विरोध में डॉक्टर हड़ताल पर हैं, जिसके तहत होम्योपैथी डिग्री धारकों को एक साल का सर्टिफिकेट कोर्स पूरा करने के बाद एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति दी गई है। सरकार के इस निर्णय का MBBS डॉक्टर और IMA ने भी कड़ा विरोध किया है। (Bombay HC)
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