Bhopal gas tragedy: डाउ केमिकल ने डिटेल ऑब्जेक्शन के लिए मांगा समय

भोपाल में 2-3 दिसंबर 1984 की दरमियानी रात यूनियन कार्बाइड कंपनी से मिथाइल आइसोसाइनेट (मिक) नामक जहरीली गैस का रिसाव हुआ था, जिसमें 15 हजार से अधिक लोग मौत की नींद सो गए थे और लाखों लोग शारीरिक अपंगता से लेकर अंधेपन के भी शिकार हुए।

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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में साल 1984 में हुई दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी भोपाल गैस त्रासदी (Bhopal gas tragedy) के मामले में 03 अक्टूबर को जिला अदालत में सुनवाई हुई। पहली बार डाउ केमिकल (Dow Chemical) के वकील जिला अदालत में पेश हुए। उन्होंने कोर्ट में कंपनी का पक्ष रखते हुए कहा कि भारतीय अदालत (Indian court) के पास अमेरिकी कंपनी के खिलाफ केस की सुनवाई का न्याय अधिकार (right to justice) नहीं है। वकीलों ने कोर्ट से डिटेल ऑब्जेक्शन (detailed objection) फाइल करने के लिए और समय मांगा। जिला कोर्ट ने अगली तारीख 25 नवंबर तय की है।

सातवीं नोटिस पर हाजिर हुए डाउ केमिकल के वकील
मजिस्ट्रेट विधान माहेश्वरी की कोर्ट में गैस त्रासदी मामले में सुनवाई हुई। इसमें डाउ केमिकल की तरफ से अधिवक्ता संदीप गुप्ता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्तता रवींद्र श्रीवास्तव पेश हुए, जबकि याचिकाकर्ता भोपाल ग्रुप फॉर इन्फॉर्मेशन एंड एक्शन के वकील अवि सिंह ऑनलाइन जुड़े। इससे पहले अदालत डाउ केमिकल को छह समन जारी कर चुकी थी। सातवें समन पर कंपनी के वकील कोर्ट में हाजिर हुए। अधिवक्ता संदीप गुप्ता ने बताया कि यह कंपनी अमेरिका में है। इसलिए भोपाल के न्यायालय के क्षेत्राधिकार में नहीं आती है। कंपनी के खिलाफ केस चलाने का कोई अधिकार नहीं है। हमने कहा है कि अगली तारीख को विस्तृत आब्जेक्शन फाइल करेंगे। इस पर सीबीआई के वकील ने कोई आपत्ति नहीं की। सिर्फ याचिकाकर्ता के वकील अवि सिंह ने आपत्ति ली थी। उनका कहना था कि 2004 में हाईकोर्ट से न्यायशास्त्र के बिन्दू पर इनकी याचिका खारिज की गई थी। ऐसे में अब न्यायशास्त्र को चैलेंज नहीं कर सकते। हमने जवाब में कहा कि याचिका खारिज हुई तब वह डाउ इंडिया लिमिटेड सिंगापुर की कंपनी थी। अब यह डाउ केमिकल प्राइवेट लिमिटेड यूएस की कंपनी है। इसलिए हमें न्यायशास्त्र को चैलेंज करने का पूरा अधिकार है। कोर्ट ने हमारी बात सुनी है और सुनवाई के लिए 25 नवंबर की तारीख दी है।

पहली बार पेश हुए डाउ केमिकल कंपनी के वकील
भोपाल ग्रुप फॉर इन्फॉर्मेशन एंड एक्शन की टीम में शामिल वकील सार्थक तोमर ने कहा कि पहली बार इस केस में डाउ केमिकल कंपनी के वकील पेश हुए। उन्होंने कहा कि वे पूरी तरह से उपस्थित नहीं हुए हैं। उन्होंने समय मांगा था। जिस पर वरिष्ठ वकील अवि सिंह ने कहा कि भारत के क्रिमिनल कानून में ऐसी कोई जगह नहीं है जहां आप इस तरह से उपस्थित हो सकते हैं। गैस पीड़ित महिला कर्मचारी संघ की अध्यक्ष रशीदा बी का कहना है कि भारत में पहली बार विदेशी कंपनी अदालत में हाजिर हुई है। हमारी जीत यह है कि इस मामले को लेकर अमेरिका के सांसदों को पत्र लिखना पड़ा। जिसके चलते कंपनी भोपाल की अदालत में पेश हुई। उम्मीद है कि वे आगे भी पेश होंगे और भोपाल के गैस पीड़ितों को इंसाफ मिलेगा।

15 हजार से अधिक लोगों की गई थी जान
गौरतलब है कि भोपाल में 2-3 दिसंबर 1984 की दरमियानी रात यूनियन कार्बाइड कंपनी से मिथाइल आइसोसाइनेट (मिक) नामक जहरीली गैस का रिसाव हुआ था, जिसमें 15 हजार से अधिक लोग मौत की नींद सो गए थे और लाखों लोग शारीरिक अपंगता से लेकर अंधेपन के भी शिकार हुए। इस गैस त्रासदी का दंश आज भी भोपाल के लोग झेल रहे हैं, लेकिन पीड़ितों को अब तक न्याय नहीं मिल पाया है।

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