Swatantryaveer Savarkar Jayanti Special:  भारत माता के सच्चे सपूत

जो अगले सैकड़ों वर्षों तक देश वासियों के पथप्रदर्शक बने रहेंगे। वे ऐसे क्रांतिवीर थे, जिनको स्मरण भर से तन मन में जोश और उत्साह का ओजस्र धारा बहने लगती है।

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महेश सिंह

Swatantryaveer Savarkar Jayanti Special: विनायक दामोदर सावरकर को यों ही नहीं वीर सावरकर कहा जाता है। वे वास्ताव में वीर थे, निडर थे और अंग्रेजों के कट्टर शत्रु थे। वे महान देशभक्त थे। ऐसे युगपुरुष थे, जिनसे देशवासी युग-युग तक प्रेरणा लेते रहेंगे। वे ऐसे युगद्रष्टा थे, जो अगले सैकड़ों वर्षों तक देश वासियों के पथप्रदर्शक बने रहेंगे। वे ऐसे क्रांतिवीर थे, जिनको स्मरण भर से तन मन में जोश और उत्साह का ओजस्र धारा बहने लगती है।

अद्भुत व्यक्तित्व
वीर सावरकर महान योद्धा और महान विचारक थे। वे पत्रकार, साहित्यकार, लेखक और इतिहासकर भी थे। किसी एक व्यक्ति में इतने सारे गुणों का होना दुर्लभ ही होता है,लेकिन वीर सावकर के जीवन का जिसने थोड़ा भी अध्ययन किया है, उसे मालूम है कि भारत के इस महान सपूत का व्यक्तित्व इन सभी गुणों से परिपूर्ण था।

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महान देशभक्त
वीर सावरकर अन्य महान स्वतंत्रता सेनानियों से हटकर थे। इसलिए अंग्रेज उनसे घबराते थे। वे नहीं चाहते थे कि सावरकर लोगों के बीच जाएं और उन्हें स्वतंत्रता के लिए लड़ने के लिए प्रेरित करें। ऐसे महान देशभक्त को उनकी जयंती 28 मई पर स्मरण करना अद्भुत अनुभव है।

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मोदी, शाह के प्रेरणास्रोत
जबतक देश में कांग्रेस सरकार रही,तब तक वीर सावरकर के त्याग, समर्पण तथा देश की स्वतंत्रता के लिए उनकी तड़प को दबाकर रखा गया। लेकिन जबसे देश में मोदी राज आया है, तब से उन्हे पूरा सम्मान दिया जा रहा है। इसके साथ ही उनकी  विचारधाराओं पर अमल कर देश को महाशक्ति बनाने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ ही पार्टी के अन्य नेता भी वीर सावरकर के व्यक्तित्व और विचार के कट्टर समर्थक हैं और जब भी अवसर मिलता है, वे वीर सावरकर की वीरता, देशभक्ति, त्याग और समर्पण को याद करना नहीं भूलते हैं।

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जयंती पर नये संसद भवन का उद्घाटन
इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि पिछले साल यानी 2023 में नई संसद का उद्घाटन वीर सावरकर की जयंती( 28 मई) पर किया गया था। एक महान राष्ट्रभक्त के लिए इससे बड़ी आदरांजलि नहीं हो सकती। वीर सावरकर जीवन भर अखंड भारत के पक्षधर रहे और इस संसद में भी अखंड भारत का भव्य चित्र स्थापित किया गया है। वीर सावरकर का सनातन प्रेम किसी से छिपा नहीं है। अपने धर्म और संस्कृति के प्रति उनका लगाव अप्रतिम था। इसलिए प्रधानमंत्री की पहल पर उनकी जयंती पर नए संसद भवन का केवल लोकार्पण ही नहीं किया गया, बल्कि उसका लोकार्पण भी पूरी तरह सनातन पद्धति से मंत्रोच्चार के साथ किया गया था। निश्चित रूप से यह सावरकर प्रेमियों के लिए गौरव की बात है।
विरोधियों को मिल रहा है करारा जवाब

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भाजपा नेता वीर सावरकर का जिक्र
वर्षों तक कांग्रेस ने वीर सावरकर की देशभक्ति, त्याग और समर्पण को दबाकर रखने का जो काम किया, उसे मोदी राज में जवाब मिलना शुरू हो गया है। जब भी देशभक्ति और स्वतंत्रता के नायकों की बात का अवसर होता है, प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और  महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सहित अन्य भाजपा नेता वीर सावरकर का जिक्र करना नहीं भूलते। यहां तक कि केंद्रीय गृह मंत्री ने अपने कार्यालय में विनायक दामोदर सावरकर की तस्वीर लगा रखी है। यह उन लोगों को करारा जवाब है, जो देश के इस महान सपूत के जीवन को जाने और अध्ययन देने किए विवादास्पद बातें करते हैं।

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इंदिरा गांधी भी थीं प्रशंसक
बेहतर होता कि कांग्रेस वीर सावरकर के बलिदान को लांछित करने के बजाए उनका इतिहासपरक मूल्यांकन करती। कांग्रेस का ऐसा अपमानजनक आचरण तब है, जब पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा वीर सावरकर के सम्मान में डाक टिकट जारी किया गया था। यही नहीं, उन्होंने खुलकर वीर सावकर की सराहना की थी। लेकिन बाद के पार्टी नेताओं ने अपने राजनीतिक स्वार्थ साधने के लिए वीर सावरकर को बदनाम करने का प्रयास किया।

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सूरज के प्रकाश को रोकना असंभव
सूरज की के प्रकाश को ज्यादा देर तक लोगों तक पहुंचने से रोका नहीं जा सकता। उसी तरह वीर सावरकर के सच्चे संघर्ष और इतिहास को दबाकर रखा नहीं जा सका। हालांकि मोदी सरकार के पहले भी भाजपा नेता वीर सावकर की वीरता और देशभक्ति को जन-जन तक पहुंचाने का अपना कर्तव्य निभाते रहे हैं।

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पूर्व पीएम वाजपेयी खुलकर करते थे सराहना
वाजपेयी ने वीर सावरकर के अभूतपूर्व गुणों की भी सराहना की। सावरकर निडर, दृढ़ इच्छाशक्ति वाले और समझौता न करने वाले राष्ट्रवादी मूल्यों के प्रतीक थे। यह उनका सीधा-सादा और बेबाक रवैया था, साथ ही समकालीन आदर्शों पर राष्ट्र निर्माण की उनकी दूरदृष्टि थी, जिसने उन्हें एक समाज सुधारक बनाया। उन्होंने समाज की बुराइयों पर बिना किसी शर्म के सवाल उठाए, जो उनके अनुसार भारत को उसकी सच्ची स्वतंत्रता और शक्ति प्राप्त करने में बाधा बन रही थीं। वे केवल एक समाज सुधारक ही नहीं थे, बल्कि एक समाज निर्माता भी थे, जिन्होंने खामियों को दूर किया और भारत के लिए एक आदर्श दृष्टि तैयार की। सावरकर एक ऐसे व्यक्ति थे जो सभी के लिए खड़े थे, सही मायने में, वे सभी समुदायों में व्याप्त बुराइयों के खिलाफ खड़े हुए। उनके आदर्श सभी को शामिल करते थे और वे एक दयालु भारत के विचार में विश्वास करते थे। सावरकर ने बाल विवाह और बाल विधवाओं जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ लड़ाई लड़ी, जो समाज में व्याप्त थीं।

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सावरकर के सपने का भारत मात्र दिवास्वप्न नहीं
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी वीर सावकर को महान देशभक्त मानते थे। जब सावरकर को अंडमान द्वीप समूह के पास गलत तरीके से कैद किया गया था, तब उन्होंने अपनी कविता और विचारों का निर्माण करते समय अत्यधिक दर्द, पीड़ा और मानसिक आघात का अनुभव किया था। हालांकि, देश के लिए उनकी उपलब्धियों और महान बलिदान को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया और छुपाया गया। फिर भी, राजनीतिक लहरें लगातार बदल रही हैं और अभी विकसित हो रही हैं। वाजपेयी के अनुसार, पहले ही शुरू हो चुकी सामाजिक जागृति के कारण, सावरकर ने जिस भारत की कल्पना की थी, वह अब दिवास्वप्न नहीं है।

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