British Museum से स्वदेश लौटेगी 11वीं सदी की मां सरस्वती की प्रतिमा, भारत लाने की तैयारी तेज

हरियाणा सरस्वती हेरिटेज विकास बोर्ड ने लंदन स्थित ब्रिटिश म्यूजियम में संरक्षित 11वीं सदी की मां सरस्वती की प्राचीन प्रतिमा को भारत वापस लाने के प्रयास तेज कर दिए हैं।

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British Museum से स्वदेश लौटेगी 11वीं सदी की मां सरस्वती की प्रतिमा, भारत लाने की तैयारी तेज
British Museum से स्वदेश लौटेगी 11वीं सदी की मां सरस्वती की प्रतिमा, भारत लाने की तैयारी तेज

हरियाणा सरस्वती हेरिटेज विकास बोर्ड ने लंदन स्थित ब्रिटिश म्यूजियम में संरक्षित 11वीं सदी की मां सरस्वती की प्राचीन प्रतिमा को भारत वापस लाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। सरस्वती बोर्ड ने केंद्र सरकार से सहयोग मांगा है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश और हरियाणा सरकार के बीच समन्वय बढ़ाया गया है, ताकि यह विरासत जल्द देश लौट सके। (British Museum)

ब्रिटिश म्यूजियम में है सुरक्षित भोजशाला की धरोहर
बोर्ड के डिप्टी चेयरमैन धुम्मन सिंह किरमिच (Dhumman Singh Kirmich) ने इसे भारतीय संस्कृति, आस्था और सरस्वती सभ्यता की अमूल्य धरोहर करार दिया है। यह प्रतिमा मूल रूप से मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला मंदिर की है, जिसे औपनिवेशिक काल (लगभग 1886–1891) के दौरान अंग्रेजों द्वारा इंग्लैंड ले जाया गया था। उन्होंने बताया कि यह प्रतिमा अत्यंत प्राचीन, धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व की धरोहर है, जो मां सरस्वती के ज्ञान, विद्या और संस्कृति के प्रतीक स्वरूप को दर्शाती हैं। वर्तमान में यह प्रतिमा लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में सुरक्षित रखी गई हैं। (British Museum)

इंग्लैंड से भारत वापस लाने की मांग
किरमिच ने कहा कि हाल ही में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ द्वारा भोजशाला परिसर को प्राचीन सरस्वती वाग्देवी मंदिर मानते हुए हिन्दू समाज को पूजा का अधिकार दिए जाने संबंधी महत्वपूर्ण आदेश पारित किया गया है। इसी क्रम में इस ऐतिहासिक प्रतिमा को भारत वापस लाने की मांग और अधिक प्रासंगिक हो गई है। (British Museum)

CM सैनी को कराया गया अवगत
धुम्मन सिंह किरमिच ने बताया कि इस विषय को लेकर हरियाणा सरस्वती बोर्ड द्वारा मध्य प्रदेश सरकार से औपचारिक संपर्क स्थापित किया गया है तथा हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी (Nayab Singh Saini) को भी पत्राचार के माध्यम से अवगत कराया गया हैं। बोर्ड का उद्देश्य इस प्रतिमा को भारत लाकर सरस्वती सभ्यता से जुड़े क्षेत्रों में प्रदर्शित करना तथा अंततः हरियाणा में स्थापित सरस्वती संग्रहालय में प्रतिष्ठित करना हैं। किरमच ने कहा कि सरस्वती नदी के तट पर विकसित सभ्यता को भारतीय इतिहास की आधारशिला माना जाता है, और इस प्रकार की धरोहरों को पुनः देश में लाना हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी हैं। (British Museum)

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शिलालेखों से मिलेगी प्राचीन सभ्यता की जानकारी
डिप्टी चेयरमैन धुम्मन सिंह किरमिच ने कहा कि ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार यह प्रतिमा परमार राजवंश के काल (11वीं सदी) की मानी जाती है और इसे धार क्षेत्र में पुरातात्विक खुदाई के दौरान ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा प्राप्त किया गया था। उस समय दो प्रतिमाएं मिली थीं, जिनमें से एक वर्तमान में भोजशाला में स्थापित है, जबकि दूसरी ब्रिटिश म्यूजियम में रखी गई है। उन्होंने बताया कि यह प्रतिमा संगमरमर से निर्मित है और इसमें संस्कृत एवं देवनागरी में शिलालेख भी अंकित हैं। यदि यह प्रतिमा भारत वापस लाई जाती है, तो इन शिलालेखों पर गहन शोध किया जाएगा, जिससे हमारी प्राचीन सभ्यता, सरस्वती नदी और उससे जुड़ी सांस्कृतिक विरासत के बारे में नई जानकारी प्राप्त हो सकेगी। (British Museum)

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