SCO: भारत अपने वायु सेना के सुखोई लड़ाकू विमानों के व्यापक उन्नयन की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इसी पृष्ठभूमि में, भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीनी शहर क्विंगदाओ में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के दौरान अपने रूसी समकक्ष आंद्रे बेलोसौव से मुलाकात की।7 इस बैठक में सुखोई-30 एमकेआई विमानों के आधुनिकीकरण के साथ-साथ एस-४०० मिसाइल प्रणाली की आपूर्ति और हवा-से-हवा में मार करने वाली मिसाइलों के उत्पादन पर विस्तृत चर्चा हुई। इस बैठक को दोनों देशों के रक्षा संबंधों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सुखोई 30 एमकेआई अपग्रेड: भारतीय वायु सेना की शक्ति बढ़ेगी
भारतीय वायु सेना के पास वर्तमान में लगभग २६० सुखोई ३० एमकेआई (Sukhoi 30 MKI) लड़ाकू विमान हैं, जिन्हें उन्नत करने की भारत की महत्वाकांक्षी योजना है।8 रूस के साथ इस चर्चा में सुखोई विमानों के लिए आधुनिक एएल-४१ (AL-41) इंजन प्राप्त करने पर भी विचार किया गया, जिसका उपयोग सुखोई 57 (Sukhoi 57) में होता है।9 नए इंजन से इन विमानों को नया जीवन मिलेगा। इसके अतिरिक्त, इन विमानों को स्वदेशी रडार और अन्य आधुनिक उपकरणों से लैस करने की योजना है। “ऑपरेशन सिंदूर” में सुखोई जेट्स की महत्वपूर्ण भूमिका के बाद यह आधुनिकीकरण और भी महत्वपूर्ण हो गया है।
एस-400 मिसाइल प्रणाली की त्वरित आपूर्ति (S-400 Missile System Supply)
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रूसी समकक्ष से एस-400 ट्रायम्फ (S-400 Triumph) सतह-से-हवाई (Surface-to-Air) मिसाइल प्रणाली की शेष दो इकाइयों की आपूर्ति में तेजी लाने का आग्रह किया।10 रूस ने भारत को पहले ही इस ५.५ बिलियन डॉलर के सौदे के तहत तीन इकाइयां प्रदान कर दी हैं। पिछले महीने पाकिस्तान के साथ सैन्य संघर्ष में भारतीय वायु सेना ने इन मिसाइल प्रणालियों का व्यापक रूप से उपयोग किया था, जिससे उनका सामरिक महत्व और बढ़ गया है।
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आतंकवाद और द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा (Terrorism & Bilateral Ties)
सिंह और बेलोसौव के बीच वर्तमान भू-राजनीतिक स्थितियों, सीमा पार आतंकवाद और भारत-रूसी रक्षा सहयोग सहित विभिन्न विषयों पर गहन चर्चा हुई। रूसी रक्षा मंत्री ने भारत-रूस के दीर्घकालिक और मजबूत संबंधों पर प्रकाश डाला।11 साथ ही, उन्होंने २२ अप्रैल को पहलगाम में हुए भयानक आतंकवादी हमले पर भारत के साथ एकजुटता व्यक्त की। इस बैठक में केवल हथियारों की खरीद पर ही नहीं, बल्कि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और संयुक्त उत्पादन पर भी जोर दिया गया।

