UNGA: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के उच्चस्तरीय चरण को संबोधित करते हुए भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वैश्विक मंच पर भारत का रुख मजबूती से रखा। वर्तमान में जारी विभिन्न वैश्विक युद्धों, तनावों और अस्थिरता के बीच उन्होंने दुनिया के सामने खड़े गंभीर संकटों को स्पष्टता से रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत न केवल अपने हितों की रक्षा कर रहा है, बल्कि विकासशील और पिछड़ रहे देशों की समस्याओं को भी मुखरता से उठा रहा है।(UNGA)
‘4F’ संकट पर वैश्विक समुदाय का ध्यान आकृष्ट
विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में दुनिया के समक्ष मंडरा रहे ‘4F’ संकट यानी इंधन (Fuel), भोजन (Food), उर्वरक (Fertilizer) और वित्त (Finance) की गंभीर समस्या पर विशेष जोर दिया। वैश्विक तनावों और आपूर्ति श्रृंखला में आई रुकावटों के कारण दुनिया भर के गरीब और विकासशील देश इन चार बुनियादी आवश्यकताओं के भारी अभाव से जूझ रहे हैं। जयशंकर ने कहा कि जब तक इन चार मोर्चों पर राहत नहीं दी जाती, तब तक वैश्विक शांति और स्थिरता की बात अधूरी रहेगी।(UNGA)
बहुपक्षीय सुधारों और सुरक्षा परिषद में बदलाव की वकालत
डॉ. एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक संस्थाओं की वर्तमान कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इनमें बहुपक्षीय सुधारों (Multilateral Reforms) की पुरजोर वकालत की। उन्होंने कहा कि 20वीं सदी के मध्य में बने नियम और ढांचे 21वीं सदी की जटिल चुनौतियों का समाधान करने में पूरी तरह असमर्थ साबित हो रहे हैं। वैश्विक संस्थाओं में समकालीन वास्तविकताओं को झलकाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में त्वरित सुधार आवश्यक हैं।(UNGA)
ग्लोबल साउथ की आवाज बना भारत
अपने वक्तव्य के दौरान विदेश मंत्री ने ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) की प्राथमिकताओं और चिंताओं को प्रमुखता से सामने रखा। उन्होंने कहा कि दुनिया के बड़े और विकसित देश जब केवल अपनी राजनीतिक खींचतान में उलझे रहते हैं, तब वैश्विक दक्षिण के देशों को सबसे ज्यादा खामियाजा भुगतना पड़ता है। भारत ने एक बार फिर खुद को विकासशील देशों की एक विश्वसनीय और जिम्मेदार आवाज के रूप में स्थापित किया।(UNGA)
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भारत की कूटनीतिक नीतियां और भावी दिशा
संबोधन के अंत में जयशंकर ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि भारत वैश्विक कल्याण, शांति और संवाद के मार्ग पर चलने के लिए हमेशा तत्पर है। उन्होंने विश्व समुदाय से अपील की कि वह केवल विवादों के प्रबंधन में ऊर्जा नष्ट करने के बजाय दुनिया की वास्तविक और बुनियादी समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करे। भारत का यह भाषण न केवल उसकी बढ़ती कूटनीतिक ताकत को दर्शाता है, बल्कि एक निष्पक्ष और समावेशी वैश्विक व्यवस्था के निर्माण का आह्वान भी करता है।(UNGA)

