Vote Bank: राजस्थान के मुस्लिम संगठनों द्वारा जेल में बंद उमर खालिद को राज्यसभा भेजने की मांग ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। (Vote Bank)
राजस्थान के कई मुस्लिम संगठनों ने कांग्रेस आलाकमान मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात कर एक विवादित ज्ञापन सौंपा है। इन संगठनों का तर्क है कि राजस्थान में 9-10% मुस्लिम आबादी होने के बावजूद कांग्रेस ने उन्हें पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने जेल में बंद उमर खालिद का नाम आगे बढ़ाया है। संगठनों का मानना है कि उमर को उम्मीदवार बनाने से कांग्रेस की ‘नागरिक अधिकारों’ के प्रति निष्ठा साबित होगी।(Vote Bank)
कांग्रेस की चुप्पी पर सवाल
उमर खालिद को राज्यसभा भेजने की मांग पर कांग्रेस की चुप्पी उसकी ‘तुष्टीकरण’ की राजनीति और देशविरोधी तत्वों के प्रति नरम रुख को पूरी तरह बेनकाब करती है। एक ओर कांग्रेस संविधान बचाने का ढोंग करती है, वहीं दूसरी ओर वह उन कट्टरपंथी संगठनों के साथ खड़ी नजर आ रही है जो दिल्ली दंगों के आरोपी और ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ जैसे नारों से जुड़े चेहरे को संसद भेजने का दबाव बना रहे हैं। यह सीधे तौर पर देश की सुरक्षा और अखंडता से समझौता है, जहां वोट बैंक की खातिर राष्ट्रद्रोह के आरोपियों को राजनीतिक संरक्षण देने की तैयारी की जा रही है।(Vote Bank)
‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ के साथ कांग्रेस
कांग्रेस का यह असली चेहरा उजागर करता है कि उसके लिए सत्ता पाने के लिए ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ का साथ लेना भी परहेज नहीं है। राजस्थान के इन संगठनों द्वारा खुलेआम “वोट के बदले प्रतिनिधित्व” की शर्त रखना और उस पर कांग्रेस आलाकमान का ज्ञापन स्वीकार करना यह दर्शाता है कि पार्टी अब कट्टरपंथियों के हाथों की कठपुतली बन चुकी है। देश की जनता देख रही है कि कैसे एक पुरानी पार्टी वोटों के लालच में उन ताकतों के आगे नतमस्तक है, जो भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं को अस्थिर करने का षड्यंत्र रचती रही हैं।(Vote Bank)
उमर खालिद: कौन है और क्यों है जेल में?
जेएनयू विवाद (2016): उमर खालिद पहली बार चर्चा में तब आया जब जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में कथित तौर पर “भारत तेरे टुकड़े होंगे” के नारे लगे थे। उस वक्त उस पर देशद्रोह का मामला दर्ज हुआ था।(Vote Bank)
दिल्ली दंगे (2020): उमर खालिद को सितंबर 2020 में दिल्ली दंगों की साजिश रचने के आरोप में यूएपीए (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया गया था। दिल्ली पुलिस का आरोप है कि उसने सीएए (CAA) के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़काऊ भाषण दिए और दंगों की ‘मास्टरमाइंडिंग’ की।(Vote Bank)
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अदालती स्थिति
वह पिछले कई वर्षों से जेल में है और कई बार उसकी जमानत याचिकाएं निचली अदालतों से लेकर हाई कोर्ट तक खारिज हो चुकी हैं।(Vote Bank)

