US Supreme Court: फलस्तीनी संगठनों की स्टे याचिका खारिज, क्या अब तुरंत वसूला जाएगा 6,244.77 करोड़ रुपये का जुर्माना?

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फ़िलिस्तीनी अथॉरिटी (पीए) और फ़िलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइज़ेशन (पीएलओ) की उस अपील को खारिज कर दी है, जिसमें 2000 के दशक में इज़राइल में हुए आतंकवादी हमलों में मारे गए और घायल हुए अमेरिकी नागरिकों के परिवारों को 655.5 मिलियन डॉलर (लगभग 6,244.77 करोड़ रुपये) का मुआवज़ा देने के आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी।

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US Supreme Court building against a blue sky.
The US Supreme Court building stands majestically.

US Supreme Court: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फ़िलिस्तीनी अथॉरिटी (पीए) और फ़िलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइज़ेशन (पीएलओ) की उस अपील को खारिज कर दी है, जिसमें 2000 के दशक में इज़राइल में हुए आतंकवादी हमलों में मारे गए और घायल हुए अमेरिकी नागरिकों के परिवारों को 655.5 मिलियन डॉलर (लगभग 6,244.77 करोड़ रुपये) का मुआवज़ा देने के आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी।

रूस की अंतरराष्ट्रीय समाचार टेलीविजन नेटवर्क रशिया टुडे (आरटी) के अनुसार, जस्टिस सोनिया सोटोमायोर ने सोमवार को इस अपील को बिना किसी टिप्पणी के खारिज कर दिया। इससे निचली अदालत का मुआवज़ा संबंधी फैसला प्रभावी बना हुआ है।

पीए और पीएलओ ने अपनी अपील में दलील दी थी कि इतनी बड़ी राशि का भुगतान करने से फ़िलिस्तीनी अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में पड़ जाएगी। उनका कहना था कि इससे बेरोज़गारी बढ़ेगी, स्वास्थ्य, शिक्षा, न्याय व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा जैसी आवश्यक सेवाएं प्रभावित होंगी तथा वेस्ट बैंक में अस्थिरता और हिंसा का खतरा बढ़ सकता है।

यह मामला उन अमेरिकी परिवारों द्वारा दायर मुकदमों से जुड़ा है, जिनके परिजन 2002 से 2004 के बीच सेकंड इंतिफ़ादा के दौरान इज़राइल में हुए छह आतंकवादी हमलों में मारे गए या घायल हुए थे।

इस मामले में 2016 में एक संघीय अपील अदालत ने अधिकार क्षेत्र के आधार पर पहले का फैसला पलट दिया था। हालांकि, 2019 में अमेरिकी कांग्रेस द्वारा पारित कानून के बाद मामला दोबारा शुरू हुआ, जिसने विदेशों में हुए आतंकवादी हमलों के पीड़ित अमेरिकी नागरिकों को मुआवज़े के लिए मुकदमा दायर करने का अधिकार दिया। पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा था।

इस बीच, वेस्ट बैंक पहले से ही गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहा है। इज़राइल फ़िलिस्तीनी अथॉरिटी की ओर से एकत्र किए गए टैक्स राजस्व का बड़ा हिस्सा रोककर बैठा है। इज़राइल का आरोप है कि इस धन का उपयोग आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है, जबकि फ़िलिस्तीनी प्रशासन इसे “वित्तीय घेराबंदी” करार देता है।

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विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मुआवज़े की पूरी राशि वसूल की जाती है तो फ़िलिस्तीनी प्रशासन पर वित्तीय दबाव और बढ़ सकता है। वहीं, मामले को लेकर दोनों पक्षों के बीच कानूनी और राजनीतिक विवाद जारी रहने की संभावना है।

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