Pakistan में तख्तापलट की तैयारी, मुनीर के काम आएगी ट्रंप की यारी?

मुनीर के बढ़ते प्रभाव का एक बड़ा संकेत हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  के साथ उनकी व्हाइट हाउस में हुई एक निजी बैठक मानी जा रही है, जिसमें पाकिस्तानी सरकार का कोई भी प्रतिनिधि मौजूद नहीं था।

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Pakistan: पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर सैन्य तख्तापलट की खबरें जोर पकड़ रही हैं। ऐसी अटकलें हैं कि देश के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर (Asim Munir) राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी (Asif Ali Zardari) का स्थान ले सकते हैं, जबकि पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी (Bilawal Bhutto Zardari) को प्रधानमंत्री पद की बागडोर सौंपी जा सकती है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब पाकिस्तान गंभीर राजनीतिक और आर्थिक संकटों से जूझ रहा है।

आसिम मुनीर की बढ़ती ताकत और अमेरिकी समर्थन
पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की शक्ति लगातार बढ़ती जा रही है। हाल ही में उन्हें फील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत किया गया, जिससे उन्हें आजीवन सैन्य विशेषाधिकार और कानूनी सुरक्षा मिल गई है। मुनीर के बढ़ते प्रभाव का एक बड़ा संकेत हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  के साथ उनकी व्हाइट हाउस में हुई एक निजी बैठक मानी जा रही है, जिसमें पाकिस्तानी सरकार का कोई भी प्रतिनिधि मौजूद नहीं था। विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक पाकिस्तान में संभावित सत्ता परिवर्तन की पृष्ठभूमि तैयार कर रही है, जिसमें अमेरिका भी अहम भूमिका निभा रहा है। बलूचिस्तान (Balochistan) में दुर्लभ खनिजों की संभावना को भी अमेरिका के इस हस्तक्षेप का एक कारण माना जा रहा है, क्योंकि चीन (China) भी इस क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है।

  नए प्रधानमंत्री की दौड़ में बिलावल भुट्टो
 पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के भीतर बिलावल भुट्टो जरदारी को प्रधानमंत्री बनाने की मांग जोर पकड़ रही है। रिपोर्टों के अनुसार, आसिफ अली जरदारी  अपनी गिरती सेहत का हवाला देते हुए राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने को तैयार हैं, बशर्ते बिलावल को कोई महत्वपूर्ण पद मिले। पाकिस्तान की राजनीति के जानकारों का कहना है कि सेना और पीपीपी के बीच एक गठबंधन की स्क्रिप्ट लिखी जा चुकी है, जिसके तहत बिलावल को आगे लाया जा सकता है। यह भी दिलचस्प है कि बिलावल ने हाल ही में हाफिज सईद और मसूद अजहर जैसे आतंकवादियों को भारत को सौंपने की बात कहकर विवाद खड़ा कर दिया था, जिससे कुछ आतंकी संगठनों में नाराजगी भी देखी गई।

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 पाकिस्तान का तख्तापलट का इतिहास
 पाकिस्तान का इतिहास सैन्य तख्तापलटों से भरा रहा है। 1958 में अयूब खान, 1977 में जिया-उल-हक और 1999 में परवेज मुशर्रफ जैसे सेना प्रमुखों ने चुनी हुई सरकारों को हटाकर सत्ता संभाली थी। यह संयोग है कि वर्तमान घटनाक्रम भी जनरल जिया-उल-हक के 1977 के तख्तापलट की बरसी के आसपास हो रहा है। इन ऐतिहासिक संदर्भों को देखते हुए, वर्तमान राजनीतिक उथल-पुथल को एक “सॉफ्ट तख्तापलट” के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ संवैधानिक बदलावों के माध्यम से राष्ट्रपति प्रणाली लागू करने की तैयारी की जा रही है, जिसमें सेना का पूरा नियंत्रण होगा।

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