Nepal Parliament Black Glasses: संसद में काला चश्मा क्यों बना विवाद? नेपाल के स्पीकर ने सांसदों के लिए जारी किया सख्त निर्देश

राष्ट्रपति की उपस्थिति वाले दिन या अन्य विशेष समारोहों में ड्रेस कोड पहले से लागू होने का उदाहरण भी दिया गया।

62
Nepal Parliament members wearing black glasses during a session.
Members of the Nepal Parliament wearing black glasses.

Nepal Parliament Black Glasses: नेपाल की संसद में कुछ समय से सदस्यों के पहनावे और खासतौर पर काले चश्मे को लेकर चल रही बहस अब औपचारिक निर्देश तक पहुंच गई है। प्रतिनिधिसभा के स्पीकर डोल प्रसाद अर्याल ने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह, गृहमंत्री सुधन गुरूंग, भौतिक पूर्वाधार मंत्री सुनिल लम्साल और अन्य सांसदों सहित सभी सदस्यों से संसद की बैठकों में काला चश्मा न पहनने और निर्धारित ड्रेस कोड का पालन करने को कहा है।

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के निर्वाचित कई सांसद और मंत्री संसद की बैठकों में काला चश्मा पहनकर पहुंचते रहे हैं। विपक्षी सांसदों ने कई बार इसे संसदीय गरिमा और मर्यादा के प्रतिकूल बताया है। स्पीकर के निजी सचिव नवराज पाण्डे के अनुसार, निर्देश में कहा गया है कि सांसद निर्धारित पोशाक पहनें, सांसद का आधिकारिक लोगो लगाएं, लेकिन काला चश्मा लगाकर सदन में उपस्थित न हों। यह कदम संसद की गरिमा बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।

इसे भी पढ़ें: Amarnath Yatra 2026: बाबा बर्फानी के दरबार में पहुंचने के लिए निकला 926 यात्रियों का जत्था, कड़ी सुरक्षा के बीच बालटाल रवाना

बुधवार को कार्यव्यवस्था परामर्श समिति की बैठक में सांसदों के अनुशासन, उपस्थिति, पोशाक और संसदीय आचरण पर विस्तृत चर्चा हुई। स्पीकर ने विभिन्न दलों के मुख्य सचेतकों और सचेतकों से ड्रेस कोड लागू कराने में सक्रिय भूमिका निभाने को कहा।

इसी दौरान नेपाली कांग्रेस की सांसद वासना थापा ने सवाल उठाया कि जब प्रधानमंत्री स्वयं काला चश्मा पहनकर सदन में आते हैं, तब नियमों का पालन कैसे सुनिश्चित होगा। इस पर सभापति ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री भी किसी राजनीतिक दल से जुड़े हैं और संबंधित दल के मुख्य सचेतक तथा सचेतक उन्हें आवश्यक निर्देश दे सकते हैं।

बैठक में आरएसपी की सचेतक क्रान्तिशिखा धिताल ने कोट और आधिकारिक लोगो को अनिवार्य बनाने की बात रखी। राष्ट्रपति की उपस्थिति वाले दिन या अन्य विशेष समारोहों में ड्रेस कोड पहले से लागू होने का उदाहरण भी दिया गया।

इसे भी पढ़ें: Uttarakhand Weather: बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें! गंगोत्री-यमुनोत्री हाईवे बंद, बद्रीनाथ मार्ग भी बाधित

नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के मुख्य सचेतक युवराज दुलाल के अनुसार, स्पीकर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब ड्रेस कोड, लोगो और संसदीय मर्यादा के मामलों में कोई “एक्सक्यूज” स्वीकार नहीं किया जाएगा और नियम सभी के लिए समान होंगे।

चर्चा के दौरान कई सदस्यों ने यह जिज्ञासा भी जताई कि यदि प्रधानमंत्री स्वयं काला चश्मा पहनकर आते हैं तो उनके मामले में क्या होगा। स्पीकर ने जवाब दिया कि प्रधानमंत्री और मंत्रियों को नियमों के अनुरूप सदन में उपस्थित कराना सत्तारूढ़ दल की जिम्मेदारी है।

नेपाल की संसद में हाल के दिनों में विधायी कार्यों से अधिक सांसदों के व्यवहार और पहनावे की चर्चा होने लगी थी। ऐसे समय में स्पीकर का यह निर्देश संसद की संस्थागत अनुशासन व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

Join Our WhatsApp Community
Get The Latest News!
Don’t miss our top stories and need-to-know news everyday in your inbox.