महाराष्ट्र (Maharashtra) राज्य चुनाव आयोग (Election Commission) ने अभी तक निकाय चुनावों (Municipal Elections) का कोई आधिकारिक कार्यक्रम घोषित नहीं किया है, लेकिन राजनीतिक दलों (Political Parties) ने यह मानकर तैयारियां शुरू कर दी हैं कि नगरपालिका चुनाव ही पहले होंगे। भारतीय जनता पार्टी समेत विभिन्न दलों की बैठकें इसी तैयारी को लेकर हो रही हैं और वरिष्ठ नेता अपने कार्यकर्ताओं को नगरपालिका चुनावों के लिए ‘काम पर लगने’ का निर्देश दे रहे हैं।
पार्टियों की तैयारी बनाम आयोग का मंथन भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें वरिष्ठों द्वारा सूचित किया गया है कि जिला परिषद चुनाव पहले नहीं होंगे। हालांकि, आयोग ने अभी तक आधिकारिक तौर पर यह तय नहीं किया है कि नगरपालिका पहले या जिला परिषद पहले। लेकिन, इसके लिए आंतरिक स्तर पर विकल्पों की तलाश शुरू हो गई है।
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सूत्रों ने बताया कि आयोग ने इस संबंध में विभिन्न जिलाधिकारियों से उनकी राय मांगनी शुरू कर दी है। इसका मुख्य कारण राज्य के ग्रामीण इलाकों में हाल ही में हुई भारी बारिश और बाढ़ (अतिवृष्टी और महापूर) से हुआ भारी नुकसान है। इन क्षेत्रों में जिला परिषद और पंचायत समितियों के चुनाव तुरंत कराने जैसी स्थिति नहीं है। इसीलिए, आयोग ने पहले नगरपालिका चुनाव कराने का विकल्प खुला रखा है।
आयोग इस बात पर जोर दे रहा है कि चुनाव कार्यक्रम घोषित करने से पहले की जाने वाली पूर्व-तैयारी, जैसे मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) और आरक्षण (रिजर्वेशन) का निर्धारण, नगरपालिका और जिला परिषदों, दोनों के लिए एक साथ ही पूरी कर ली जाए।
महायुति के लिए ‘सुविधाजनक’ क्यों?
नगरपालिका चुनावों को पहले कराने के पीछे एक बड़ा राजनीतिक कारण भी है। राज्य सरकार द्वारा बाढ़ पीड़ितों के लिए घोषित पैकेज की मदद किसानों तक पहुंचने में अभी और 20 दिन लगने की संभावना है। यदि इस मदद को आचार संहिता (Code of Conduct) की मार से बचाना है, तो पहले नगरपालिका चुनाव कराना सत्तारूढ़ ‘महायुति’ (महागठबंधन) के लिए सुविधाजनक होगा।
अगर आपदाग्रस्त लोगों तक मदद पूरी तरह पहुंचने से पहले ग्रामीण इलाकों से संबंधित जिला परिषद और पंचायत समितियों के चुनाव करा दिए जाते हैं, तो इससे उपजी नाराजगी का सीधा फटका महायुति के घटक दलों को चुनाव में लग सकता है।
नतीजों पर पेंच: एक साथ या अलग-अलग?
अगर नगरपालिका चुनाव पहले होते हैं, तो एक बड़ा सवाल यह खड़ा होगा कि क्या उनके नतीजे मतदान के दो दिन बाद मतगणना करके घोषित कर दिए जाएं, या फिर जिला परिषद और महानगरपालिका चुनावों के बाद सभी के परिणाम एक साथ घोषित किए जाएं।
ऐसी आशंका है कि यदि पहले हुए चुनाव के नतीजे तुरंत घोषित कर दिए गए, तो इसका असर बाद में होने वाले चुनावों पर पड़ सकता है और इसे लेकर राजनीतिक दल आपत्ति (आक्षेप) भी जता सकते हैं। इसलिए, राज्य चुनाव आयोग इस दिशा में क्या निर्णय लेता है, इस पर सबकी उत्सुकता बनी रहेगी।
संभावित समय-सीमा अनुमान है कि नवंबर के पहले सप्ताह में नगरपालिका चुनावों की घोषणा हो सकती है। इन चुनावों के तुरंत बाद जिला परिषद, पंचायत समितियों के चुनाव होंगे और अंत में जनवरी के आखिर तक महानगरपालिका के चुनाव संपन्न कराए जाएंगे।
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