नरेश वत्स
Modi Government:प्रधानमंत्री के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार ने केंद्र की सत्ता में अपने 12 वर्ष पूरे कर लिए हैं। वर्ष 2014 में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई भाजपा ने इन 12 वर्षों में न केवल राष्ट्रीय राजनीति की दिशा बदली है, बल्कि भारतीय राजनीति के शक्ति-संतुलन को भी नए सिरे से परिभाषित किया है। आज स्थिति यह है कि भाजपा और उसके सहयोगी देश के 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सत्ता में हैं। राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो यह निस्संदेह भाजपा का राजनीतिक युग प्रतीत होता है।(Modi Government)
राज्यों में विस्तार और राजनीतिक प्रभुत्व
2014 से पहले भाजपा को मुख्य रूप से उत्तर और पश्चिम भारत की पार्टी माना जाता था। लेकिन पिछले एक दशक में पार्टी ने पूर्वोत्तर, पूर्वी और दक्षिणी भारत में भी अपनी उपस्थिति मजबूत करने की कोशिश की है। आज झारखंड को छोड़ दें तो पूरा मध्य भारत भाजपा या उसके सहयोगियों के नियंत्रण में है। पूर्वोत्तर भारत में भी मिजोरम को छोड़कर अधिकांश राज्यों में भाजपा की सरकार या गठबंधन सरकारों का हिस्सा है।(Modi Government)
राज्यसभा में भी बढ़ी ताकत
लोकसभा में एनडीए पहले ही बहुमत की स्थिति में है। वहीं विभिन्न राज्यों में चुनावी सफलताओं के कारण राज्यसभा में भी गठबंधन की ताकत बढ़ रही है। वर्तमान में राज्यसभा में एनडीए की संख्या लगातार मजबूत हो रही है, जिससे भविष्य में संवैधानिक और नीतिगत एजेंडा आगे बढ़ाने की क्षमता भी बढ़ेगी।
मोदी सरकार का अगला एजेंडा
अब यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि भाजपा के अगले राजनीतिक कदम क्या होंगे? भाजपा के एजेंडे में सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक महिला आरक्षण को प्रभावी रूप से लागू करना है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 को संसद से पारित कराया गया था, लेकिन इसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया जनगणना और परिसीमन से जुड़ी हुई है।
महिला आरक्षण लागू करना बड़ी चुनौती
हाल के संवैधानिक संशोधन प्रयासों के दौरान लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने, जनसंख्या आधारित परिसीमन को अनुमति देने और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने जैसे प्रस्तावों पर चर्चा हुई। हालांकि आवश्यक दो-तिहाई समर्थन नहीं मिलने के कारण संशोधन पारित नहीं हो सका। परिसीमन का मुद्दा केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि राजनीतिक भी है। वर्तमान में दक्षिण भारत के पांच राज्यों आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और तेलंगाना में कुल 139 लोकसभा सीटें हैं, जबकि उत्तर प्रदेश और बिहार में कुल 120 सीटें हैं। जनसंख्या आधारित परिसीमन के बाद उत्तर भारत में सीटों की संख्या बढ़ने की संभावना है।(Modi Government)
क्या कहते हैं विश्लेषक?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भविष्य में उत्तर भारत को अधिक प्रतिनिधित्व मिलता है तो भाजपा को इसका लाभ मिल सकता है, क्योंकि उत्तर भारत उसके सबसे मजबूत राजनीतिक क्षेत्रों में शामिल है। यही कारण है कि परिसीमन की बहस आने वाले वर्षों में भारतीय राजनीति का केंद्रीय विषय बनेगा।(Modi Government)
समान नागरिक संहिता अगला बड़ा लक्ष्य
समान नागरिक संहिता (यूसीसी) भाजपा के लंबे समय से घोषित एजेंडे का हिस्सा रही है। पार्टी का तर्क है कि विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और संपत्ति से जुड़े मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानून होना चाहिए। उत्तराखंड इस दिशा में कानून लागू करने वाला पहला राज्य बन चुका है। उत्तराखंड के बाद गुजरात और असम ने भी इस विषय पर महत्वपूर्ण पहल की है। भाजपा समर्थकों का मानना है कि इससे संवैधानिक समानता मजबूत होगी, जबकि विपक्ष और कुछ सामाजिक समूह इसे सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता के संदर्भ में देखते हैं। यदि भाजपा आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय स्तर पर पर्याप्त राजनीतिक समर्थन जुटाने में सफल होती है तो यूसीसी उसके प्रमुख विधायी एजेंडे में शामिल रह सकता है।
जनसंख्या नियंत्रण कानून पर बहस
भाजपा के कुछ नेता लंबे समय से जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि सीमित संसाधनों, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर बढ़ते दबाव को देखते हुए जनसंख्या संतुलन आवश्यक है। हालांकि केंद्र सरकार ने अभी तक इस विषय पर कोई स्पष्ट राष्ट्रीय कानून लाने की घोषणा नहीं की है, लेकिन यह बहस समय-समय पर राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनती रही है। आने वाले वर्षों में भाजपा इस मुद्दे को नीतिगत बहस के रूप में आगे बढ़ा सकती है।
एक राष्ट्र, एक चुनाव
भाजपा के संभावित भविष्य के एजेंडे में सबसे प्रमुख विषयों में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ शामिल है। भाजपा लंबे समय से लोकसभा, विधानसभा और स्थानीय निकायों के चुनाव एक साथ कराने की वकालत करती रही है। भाजपा का कहना है कि इससे चुनावी खर्च कम होगा, प्रशासनिक संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और बार-बार लागू होने वाली आचार संहिता से विकास कार्य प्रभावित नहीं होंगे। विपक्षी दलों का मानना है कि इससे संघीय ढांचे और क्षेत्रीय मुद्दों पर असर पड़ सकता है। फिर भी, भाजपा की राजनीतिक प्राथमिकताओं में यह विषय लगातार शीर्ष पर बना हुआ है और इसे भविष्य के बड़े सुधारों में गिना जा रहा है।
सबसे बड़ी चुनौती
भाजपा का विस्तार जितना व्यापक हुआ है, चुनौतियां भी उतनी ही बड़ी हुई हैं। दक्षिण भारत में अभी भी पार्टी को सीमित सफलता मिली है। तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में भाजपा को अभी लंबा राजनीतिक सफर तय करना है।12 वर्षों में भाजपा ने भारतीय राजनीति को अभूतपूर्व रूप से प्रभावित किया है। अनुच्छेद 370 से लेकर राम मंदिर तक और डिजिटल इंडिया से लेकर बुनियादी ढांचे के विस्तार तक, पार्टी ने अपने कई ऐतिहासिक वादों को पूरा किया है।(Modi Government)
जनता की अपेक्षाएं
अब उसका ध्यान महिला आरक्षण के क्रियान्वयन, परिसीमन, समान नागरिक संहिता, जनसंख्या नीति और एक राष्ट्र-एक चुनाव जैसे मुद्दों पर केंद्रित दिखाई देता है। राजनीतिक दृष्टि से भाजपा आज अपने सबसे मजबूत दौर में है। लेकिन किसी भी राजनीतिक दल की वास्तविक परीक्षा केवल चुनावी जीत से नहीं बल्कि बदलती सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों के समाधान से होती है। आने वाले वर्षों में यह तय होगा कि भाजपा का यह राजनीतिक प्रभुत्व एक लंबे वैचारिक परिवर्तन में बदलता है या भारतीय लोकतंत्र में नई राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का मार्ग प्रशस्त करता है।(Modi Government)

