Central Government: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक के ड्राफ्ट पर मिले 108 सुझाव, आम जनता और विशेषज्ञों की राय से बदलेगा राशन वितरण का नया फॉर्मूला?

केंद्र सरकार ने मंगलवार को राज्य सभा में बताया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा (संशोधन) विधेयक, 2026 के मसौदे पर विभिन्न हितधारकों और आम जनता से करीब 108 टिप्पणियां और सुझाव प्राप्त हुए हैं।

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People receiving food grains at a ration distribution center.
A scene from a ration distribution center.

Central Government: केंद्र सरकार ने मंगलवार को राज्य सभा में बताया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा (संशोधन) विधेयक, 2026 के मसौदे पर विभिन्न हितधारकों और आम जनता से करीब 108 टिप्पणियां और सुझाव प्राप्त हुए हैं। सरकार ने कहा कि वह प्राप्त सुझावों और उठाई गई चिंताओं से अवगत है तथा व्यापक परामर्श, संवाद और सहमति के आधार पर आगे की प्रक्रिया अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है।(Central Government)

उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बंभाणिया ने कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्य सभा सदस्य मल्लिकार्जुन खरगे के एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि प्रस्तावित संशोधन के तहत अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) के लाभार्थी परिवारों को मौजूदा व्यवस्था के अनुसार प्रति परिवार 35 किलोग्राम खाद्यान्न देने के बजाय प्रति व्यक्ति सात किलोग्राम खाद्यान्न, अधिकतम 35 किलोग्राम प्रति परिवार की सीमा के साथ उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है।

राज्य मंत्री ने कहा कि वर्तमान में देश में 26,81,565 अंत्योदय अन्न योजना परिवार ऐसे हैं, जिनमें पांच से अधिक सदस्य हैं। प्रस्तावित संशोधन लागू होने पर इन परिवारों को प्रति व्यक्ति सात किलोग्राम से कम खाद्यान्न मिलेगा, क्योंकि प्रति परिवार 35 किलोग्राम की अधिकतम सीमा लागू रहेगी।

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सरकार ने बताया कि संशोधन का मसौदा जारी करने से पहले विभाग ने एएवाई परिवारों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। इस विश्लेषण में पाया गया कि परिवार के आकार में अंतर के कारण प्रति व्यक्ति खाद्यान्न उपलब्धता में काफी असमानता है। सात से अधिक सदस्यों वाले बड़े परिवारों को प्रति व्यक्ति पांच किलोग्राम से भी कम खाद्यान्न मिलता है, जबकि एक या दो सदस्य वाले छोटे परिवारों को प्रति व्यक्ति अपेक्षाकृत कहीं अधिक खाद्यान्न प्राप्त होता है। इससे एएवाई श्रेणी के भीतर असमानता उत्पन्न होती है।

सरकार ने कहा कि इस असमानता को दूर कर खाद्यान्न वितरण व्यवस्था को अधिक न्यायसंगत और समान बनाने के उद्देश्य से संशोधन का प्रस्ताव लाया गया है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि प्राप्त सभी सुझावों और टिप्पणियों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।

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