नेपालः प्रधानमंत्री ओली को जोर का झटका! देउबा को पीएम बनाने का सर्वोच्च आदेश

चीफ जस्टिस चोलेंद्र शमशेर राणा की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सिफारिश पर राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी का सदन को भंग करने का फैसला असंवैधानिक था। पीठ ने 13 जुलाई तक देउबा को प्रधानमंत्री नियुक्त करने का आदेश दिया।

नेपाल में अपनी अल्पमत सरकार को बचाने में जुटे प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को बड़ा झटका लगा है। न्यायालय ने भंग संसद को बहाल कर दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में राष्ट्रपति विद्या भंडारी को नेपाली कांग्रेस प्रमुख शेर बहादुर देउबा को प्रधानमंत्री नियुक्त करने का निर्देश दिया है। पांच महीनों में दूसरी बार भंग संसद को बहाल किया गया है। इससे पहले न्यायालय ने 23 फरवरी को भी प्रधानमंत्री ओली को झटका देते हुए संसद को बहाल करने का निर्देश दिया था।

देउबा को पीएम बनाने का आदेश
12 जुलाई को चीफ जस्टिस चोलेंद्र शमशेर राणा की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सिफारिश पर राष्ट्रपति भंडारी का निचले सदन को भंग करने का फैसला असंवैधानिक था। पीठ ने 13 जुलाई तक देउबा को प्रधानमंत्री नियुक्त करने का आदेश दिया। 74 वर्षीय देउबा इससे पहले चार बार नेपाल के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। न्यायालय ने संसद का नया सत्र 18 जुलाई की शाम पांच बजे बुलाने का भी आदेश दिया। न्यायालय के इस फैसले से ओली को बड़ा झटका लगा है।

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राजनैतिक घटनाक्रम
बता दें कि राष्ट्रपति विद्या भंडारी ने प्रधानमंत्री ओली की सिफारिश पर 275 सदस्यीय सदन को 22 मई को पांच महीने में दूसरी बार भंग कर दिया था और 12 तथा 19 नवंबर 2021 को मध्यावधि चुनाव कराने की घोषणा की थी। निर्वाचन आयोग ने पिछले हफ्ते मध्यावधि चुनाव की घोषणा भी कर दी थी। राष्ट्रपति द्वारा संसद भंग किए जाने के खिलाफ नेपाली कांग्रेस नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन द्वारा दायर याचिका समेत 30 याचिकाएं न्यायालय में दायर की गई थीं। विपक्षी दलों की ओर से दायर याचिका में 146 सांसदों के हस्ताक्षर थे। इसमें संसद को फिर से बहाल कर देउबा को प्रधानमंत्री नियुक्त करने की अपील की गई थी।

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