Punjab Drug Crisis: आप नशामुक्त पंजाब के नारे से सत्ता तक, अब भगवंत मान सरकार से हिसाब क्यों नहीं?

पंजाब में 18 सितंबर की रात अमृतसर के भक्तांवाला अनाज मंडी के पास ड्यूटी से लौट रहे एएसआई हरजीत सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई।

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Punjab Drug Crisis: पंजाब में नशा केवल सामाजिक संकट नहीं, अब सरकार की जवाबदेही और कानून-व्यवस्था की परीक्षा बन चुका है। ड्यूटी पर पुलिस अधिकारियों की लगातार हत्याएं और भाजपा की ‘नशामुक्त पंजाब यात्रा’ ने भगवंत मान सरकार को एक बार फिर उसी सवाल के सामने खड़ा कर दिया है, जिसके जवाब के वादे के साथ आम आदमी पार्टी सत्ता में आई थी ।पंजाब से नशा कब खत्म होगा?

पंजाब में 18 सितंबर की रात अमृतसर के भक्तांवाला अनाज मंडी के पास ड्यूटी से लौट रहे एएसआई हरजीत सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। दोपहिया वाहन पर आए हमलावरों ने उन्हें नजदीक से निशाना बनाया। यह घटना अकेली नहीं है। इस साल फरवरी में गुरदासपुर में एएसआई गुरनाम सिंह और होमगार्ड जवान अशोक कुमार की हत्या हुई थी, जबकि मई में एएसआई जोगा सिंह की हत्या हुई। सितंबर की अमृतसर घटना ने पुलिसकर्मियों को निशाना बनाए जाने की चिंता को और गंभीर कर दिया है।

सवाल यह है कि क्या पंजाब में ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी सुरक्षित हैं? क्या अपराधियों के भीतर पुलिस और कानून का डर बचा है? और क्या सरकार अपराध के उन नेटवर्क तक पहुंच पा रही है जो हथियार, नशे और संगठित अपराध से जुड़े हो सकते हैं?

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भगवंत मान सरकार की सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा

आम आदमी पार्टी पंजाब में नशे के खिलाफ कार्रवाई को अपने बड़े राजनीतिक वादों के सहारे सत्ता में आई थी। नशामुक्त पंजाब का सपना दिखाया गया था। युवाओं को नशे से बचाने और नशे के कारोबार पर निर्णायक प्रहार करने की बात कही गई थी। अब सरकार के सामने स्वाभाविक सवाल है । इतने वर्षों की सत्ता के बाद पंजाब में नशे की समस्या को लेकर जनता को क्या ठोस परिणाम मिले?

सरकार को केवल यह बताना पर्याप्त नहीं होगा कि कितने तस्कर गिरफ्तार हुए। जनता यह जानना चाहती है कि नशे की सप्लाई चेन कितनी टूटी, बड़े नेटवर्क के कितने सरगना पकड़े गए, उनकी संपत्तियां कितनी जब्त हुईं, कितने युवाओं को इलाज और पुनर्वास मिला और नशे की उपलब्धता में वास्तविक कमी कितनी आई।

आप का ‘नशामुक्त पंजाब’ से नशा मुक्त पंजाब

नशा खत्म करने का मतलब केवल पुलिस कार्रवाई नहीं है। नशे के कारोबार पर चोट करने के लिए तीन स्तरों पर पंजाब सरकार को काम करना होगा । पहला, नशे की सप्लाई और तस्करी पर प्रहार; दूसरा, नशे के आदी लोगों का उपचार और पुनर्वास; और तीसरा, युवाओं के लिए रोजगार और जीवन के वैकल्पिक अवसर। इनमें से किसी एक मोर्चे पर कमजोरी पूरे अभियान को कमजोर कर सकती है।

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भाजपा की ‘नशामुक्त पंजाब यात्रा’

इसी बीच भाजपा ने नशे के मुद्दे को सीधे राजनीतिक मैदान में उतार दिया है। भाजपा की ‘नशामुक्त पंजाब यात्रा’ 18 सितंबर से शुरू हुई है। पार्टी ने चार चरणों में करीब 4,000 किलोमीटर की यात्रा के जरिए पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों तक पहुंचने का कार्यक्रम बनाया है। पहला चरण भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने शुरू किया और तीसरे चरण की शुरुआत 20 सितंबर को केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने फाजिल्का के सादिकी सीमा क्षेत्र से की। भाजपा इस अभियान को नशे के साथ कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार के मुद्दों से भी जोड़ रही है।

भाजपा इसे सामाजिक आंदोलन बता रही है, लेकिन पंजाब की राजनीति में इसका राजनीतिक महत्व नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 2027 का विधानसभा चुनाव दूर नहीं है और नशा पंजाब की राजनीति का ऐसा मुद्दा है, जिसका सीधा असर युवाओं और परिवारों पर पड़ता है। भाजपा के लिए यह अभियान आम आदमी पार्टी सरकार को उसके पुराने वादों की याद दिलाने और जनता के बीच अपना राजनीतिक आधार बढ़ाने का माध्यम भी बन सकता है।

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