Terrorism: आतंकियों के निशाने पर महाराष्ट्र?- प्रवीण दीक्षित, सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक

हाल ही में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और एटीएस द्वारा पुणे में गिरफ्तार किए गए कुछ संदिग्ध आरोपियों से पूछताछ में यह बात सामने आई है कि किस तरह पर्दे के पीछे देश विरोधी ताकतों की साजिशें चल रही हैं।

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एनआईए

Terrorism: पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा एजेंसियों (security agencies) द्वारा उठाए गए कड़े कदमों के कारण देश में आतंकवाद की चुनौती काफी हद तक नियंत्रण में (The challenge of terrorism is under control to a great extent) है, लेकिन खतरा अभी भी टला नहीं है; यह खुलासा राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा 9 दिसंबर 23 को महाराष्ट्र के पुणे, मुंबई ठाणे जिले में 44 स्थानों पर की गई छापेमारी (Raids conducted at 44 places in Pune, Mumbai Thane district of Maharashtra) में हुआ है। इस बार 15 लोगों को गिरफ्तार किया गया। पडघा जिले के ठाणे गांव का नाम बदलकर “अल शाम” कर दिया गया और उसे सीरिया का हिस्सा घोषित कर दिया गया। अगस्त माह में पुणे में पकड़े गए संदिग्ध आरोपियों से सामने आई जानकारी से भी यह स्पष्ट है। इससे एक बार फिर पता चला कि कैसे पढ़े-लिखे मुस्लिम युवा(Educated muslim youth) सोशल मीडिया के जरिए फैल रहे कट्टरवाद का शिकार हो रहे हैं। भविष्य के खतरों को देखते हुए भारत को इस संबंध में एक विशेष कानून बनाने की तत्काल आवश्यकता है।

पडघा को घोषित कर दिया सीरिया का हिस्सा
9 दिसंबर 2023 को पडघा, ठाणे और पुणे, मुंबई आदि में 44 जगहों पर छापेमारी कर 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पडघा गांव को अल शाम नाम देकर सीरिया का हिस्सा घोषित कर दिया गया। इसमें आतंकी साकिब नाचन, बेटा शमिल नाचन, भाई अकिब नाचन शामिल हैं। इन आरोपियों ने मुंबई समेत कई जगहों पर जाकर रेकी की। उन्हें विदेश से पैसा मिल रहा था। वे भीड़-भाड़ वाली जगहों पर ड्रोन से हमला करने के लिए तैयार थे। उन्हें ड्रोन से हमला करने की ट्रेनिंग दी जा रही थी। साकिब नाचन संगठन में शामिल होने वालों को ”बेथ” यानी आईएसआईएस के प्रति निष्ठा की शपथ दिला रहा था। पुणे में प्रमुख उदाहरण के रूप में डॉ. अदनान अली सरकार का उल्लेख किया जा सकता है।

देश विरोधी ताकतों की साजिश
हाल ही में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और एटीएस द्वारा पुणे में गिरफ्तार किए गए कुछ संदिग्ध आरोपियों से पूछताछ में यह बात सामने आई है कि किस तरह पर्दे के पीछे देश विरोधी ताकतों की साजिशें चल रही हैं। हालांकि माना जाता है कि अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठन आईएसआईएस खत्म हो चुका है, लेकिन हकीकत में यह अभी भी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। इस संगठन के कुछ लोग मारे गए होंगे; लेकिन संगठन के कुछ स्वयंभू नेता आज भी काम कर रहे हैं और अपना दुष्प्रचार फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। भारत हमेशा से ऐसे आतंकी संगठनों के निशाने पर रहा है। क्योंकि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और ये संगठन लोकतंत्र को स्वीकार नहीं करते। ये आतंकी संगठन कश्मीर के बहाने लगातार भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। खास तौर पर भारत के पढ़े-लिखे मुसलमानों के बीच सोशल मीडिया के जरिए धार्मिक कट्टरवाद भड़काने का काम इन संगठनों के जरिए किया जा रहा है। इस प्रकार की कट्टरवादिता, कट्टरता से प्रभावित लोग हमें देश भर में अनेक स्थानों पर मिलते हैं। बिहार, कर्नाटक, राजस्थान, दिल्ली, भोपाल समेत कई जगहों से गिरफ्तार किए गए आरोपियों से जो जानकारी से यह बात सामने आई है। यह बात साफ हो गई है कि यह तमिलनाडु के कोयंबटूर में एक मंदिर के पास हुआ विस्फोट था, जिसमें कारें जल गईं। हमेशा की तरह ये संगठन ‘इस्लाम ख़तरे में है’ कहकर लोगों को भड़का रहे हैं। दुर्भाग्य से, पढ़े-लिखे या खुले विचारों वाले लोग भी इस धार्मिक उन्माद का शिकार होते दिख रहे हैं।

प्रमुख उदाहरण
इसका प्रमुख उदाहरण एनआईए की छापेमारी में पकड़े गये डॉ. अदनान अली सरकार है। ऐसे लोगों पर नजर रखनी होगी। उसने ससून जैसे मेडिकल कॉलेज से डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की है। उसका व्यवसाय अच्छी तरह चल रहा था। वह बड़े अस्पतालों में काम कर रहा था। लेकिन धार्मिक तौर पर वह पूरी तरह कट्टर था। उसने अपने आस-पास के नागरिकों को कोई सुराग दिए बिना, कुछ इंजीनियरों, बम बनाने के विशेषज्ञों को साथ लेकर और उन्हें धार्मिक कट्टरपंथियों में बदल कर ‘अल सुफ़ा’ नामक एक संगठन शुरू किया। अल सुफ़ा का अर्थ है पैगंबर मोहम्मद का रक्षक। एनेस्थीसिया में एमडी अदनान सरकार के टार्गेट युवा थे। वह आर्थिक रूप से कमजोर, मानसिक रूप से कमजोर युवाओं की तलाश कर उन्हें आतंकवादी बना रहा था। इसके लिए वह युवकों को पैसे का लालच देता था।

बम विस्फोट कराने का षड्यंत्र
इससे पहले राजस्थान में अप्रैल 2021 में इमरान भाई नाम के शख्स ने कुछ लोगों के साथ मिलकर मध्य प्रदेश में बम धमाका करने की कोशिश की थी, लेकिन 2022 में उनमें से कुछ को रतलाम से बम ले जाते हुए पकड़ लिया गया। उस वक्त दो लोग वहां से भागने में कामयाब रहे। वे बम बनाने वाले थे। दोनों को एक अन्य व्यक्ति के साथ पुणे के कोथरुड में पुलिस ने पकड़ लिया। इन सभी की साजिश का पर्दाफाश हो गया।

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 सेंट्रल सीरिया में मास्टरमाइंड
दरअसल, देखा गया है कि इस संगठन का मास्टरमाइंड या सेंट्रल कमांड सीरिया में है और वहीं से इस संगठन के कार्यकर्ताओं को गाइड किया जा रहा है। इस संगठन के कुछ मॉड्यूल दिल्ली, रतलाम और पुणे में देखे गए हैं। दिल्ली और रतलाम में इन संगठनों के मॉड्यूल को अतिथि मॉड्यूल कहा जाता है; जबकि पुणे में मॉड्यूल को होस्ट मॉड्यूल माना गया। इसका मतलब है कि लोगों को उनके नियोजित कार्य के लिए आश्रय प्रदान करना, उन्हें आवश्यक सहायता देना, यह सुनिश्चित करना कि वे पकड़े न जाएं, यह काम पुणे मॉड्यूल द्वारा किया जा रहा था। गिरफ्तार संदिग्धों का कोई पिछला रिकॉर्ड या आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं है, क्योंकि उन्होंने सोशल मीडिया पर कोड शब्दों का उपयोग करके संदेशों के आदान-प्रदान कर यह षड्यंत्र रचा। यह कार्यप्रणाली पूरी दुनिया में देखी जाती है।

 पीड़ित देशों में भारत भी शामिल
जिन पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनके पास से ड्रोन कैमरे, बम बनाने का पाउडर, बम बनाने की तकनीक बरामद की गई है। इन सभी ने कुछ आसान लक्ष्यों या संवेदनशील स्थानों की टोह ली थी। आतंकी संगठनों के पास ऐसे ठिकाने चुनने का एक फॉर्मूला भी होता है। तदनुसार, ये संगठन उन स्थानों को लक्षित करने का प्रयास करते हैं. जिन पर आमतौर पर किसी का ध्यान नहीं जाता और कम सुरक्षा होती है। मुंबई में छाबड़ा हाउस, ताज होटल पर 26/11 का हमला इसका प्रमुख उदाहरण था। वे ऐसी जगहों पर हमला करने और जितना संभव हो उतने लोगों को मारने की कोशिश करते हैं। उन्हें निर्देशों और प्रक्रियाओं के संबंध में टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया के माध्यम से निर्देशित किया जाता है। मुख्य रूप से इन लोगों को भड़काते समय ‘चाहे इसमें मारे भी जाओगे, जन्नत में जाओगे’ जैसे भ्रमों से प्रभावित किया जाता है। ये इन्हीं गलतियों का शिकार होते हैं। हाल के दिनों में गिरफ्तार आरोपी भी इसी का हिस्सा हैं। बेशक, हाल के दिनों में कुछ ऐसे क्षेत्र रहे हैं, जहां बड़ी संख्या में ऐसी विचारधारा से प्रभावित लोग हैं। देश में ऐसे कई ‘मिनी पाकिस्तान’ हैं जैसे भिवंडी के पास आईएसआई घोषित पडघा जिला। कोई बाहरी व्यक्ति आसानी से वहां नहीं जा सकता। पुलिस के पहुंचने पर भी वहां उन्हें काम नहीं करने दिया जाता। इस कारण आने वाले समय में देश को ऐसे धार्मिक कट्टरवाद से प्रेरित लोगों का खतरा बना रहेगा।

क्या है समाधान?
अब सवाल यह है कि समाधान क्या है? सबसे पहले देशभर के मुसलमानों को आगे आना चाहिए और अपने इलाके में किसी भी संदिग्ध हरकत के बारे में पुलिस को सूचित करना चाहिए। 2015-16 में जब आईएसआई पूरे जोरों पर थी तो कई माता-पिता आगे आकर अपने बच्चों के बारे में ऐसी जानकारी दे रहे थे। उस जानकारी के मुताबिक ऐसे बच्चों का ब्रेनवॉश करने की कोशिश की जा रही थी। पुणे में मामले के बाद इस तरह की जानकारी सामने लाने की जरूरत है।

दूसरा उपाय यह है कि भारत सरकार को इंग्लैंड जैसे देशों की तरह इसके लिए एक अलग कानून बनाना होगा। इसके मुताबिक ऐसे कट्टरपंथियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकेगी। इसके लिए पुलिस को सशक्त बनाना जरूरी है। आईपीसी, यूएपीए जैसे कानून इस समस्या के लिए पर्याप्त नहीं हैं। क्योंकि ये खतरा बहुत बड़ा है, इसलिए विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों ने सरकार से कहा है कि इसके लिए अलग कानून की जरूरत है, क्योंकि पुलिस द्वारा की गई ब्रेनवाशिंग का कानून में कोई आधार नहीं है। इसलिए ब्रिटेन के कानूनों का अध्ययन कर जल्द से जल्द ऐसा कानून बनाना जरूरी है। आज अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड जैसे कई देश इस कट्टरवाद का सामना कर रहे हैं। इन देशों ने इसे रोकने के लिए नए कानून बनाए हैं।

सेशल मीडिया के माध्य से
दूसरी बात यह है कि राष्ट्रों को सोशल मीडिया के माध्यम से आतंकवाद के प्रसार को रोकने के लिए जानकारी साझा करने की आवश्यकता है। नहीं तो हम अपने देश में चार-पांच लोगों को पकड़ लेंगे और कुछ नहीं होगा। उनका सरगना जहां भी होगा, नया मोहरा ढूंढ लेगा और अपना काम जारी रखेगा। इसलिए, मूल कारण पर हमला करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है। जिस तरह अमेरिका अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने वाले आतंकवादियों को खत्म करने के लिए ड्रोन जैसी परिष्कृत प्रणालियों का उपयोग करता है, उसी तरह हमें इसके पीछे के मास्टरमाइंड का पता लगाना चाहिए और उसके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। तभी ऐसी देशविरोधी ताकतों को परास्त किया जा सकेगा। यह कल्पना करना बेहतर है कि अगर हमारी जांच एजेंसियों ने कार्रवाई नहीं की होती और इन संदिग्धों को नहीं पकड़ा होता तो क्या होता!

पाकिस्तान और चीन का हो सकता है हाथ
हालांकि आज हम सीरिया का नाम आईएसआईएस के साथ जोड़ते हैं, लेकिन हम इस संभावना से इनकार नहीं कर सकते कि भारत में इस तरह के हमलों के पीछे पाकिस्तान और चीन का भी हाथ हो। क्योंकि ये लोकतंत्र विरोधी देश हैं। साथ ही इन देश विरोधी ताकतों को इस बात से कोई लेना-देना नहीं है कि भारत में किसकी सरकार है। वे भारत को अपना दुश्मन मानते हैं। अत: सभी राजनीतिक दलों को सहयोगात्मक भूमिका निभाते हुए इसके विरुद्ध उपायों एवं कानूनों का समर्थन करना चाहिए। क्योंकि आतंकवाद सभी लोकतांत्रिक देशों का दुश्मन है। इसलिए जरूरी है कि लोग एकमत होकर आगे आएं और कहें कि ‘ऐसी बुरी ताकतों के खिलाफ कार्रवाई करें’, हम सरकार के साथ हैं।’
सरकार, विपक्षी दलों, जागरूक नागरिकों, प्रचार माध्यमों के संयुक्त प्रयासों से ही इस आतंकवाद पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

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