पाकिस्तान (Pakistan) में 14 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) का जश्न उस समय मातम में बदल गया, जब देश के विभिन्न हिस्सों में जश्न के नाम पर की गई अंधाधुंध हवाई फायरिंग (Aerial Firing) की घटनाओं ने तीन लोगों की जान ले ली। इस जानलेवा जश्न में 60 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल (Injured) हो गए, जिनमें महिलाएँ और बच्चे भी शामिल हैं। यह घटनाएँ मुख्य रूप से कराची, पेशावर और पंजाब प्रांत के कुछ शहरों में हुईं, जहाँ लोगों ने आधी रात को आजादी का स्वागत गोलियों की तड़तड़ाहट से किया।
पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में स्थिति सबसे भयावह रही। यहाँ हवाई फायरिंग की अलग-अलग घटनाओं में दो लोगों की मौत हो गई और 40 से अधिक लोग घायल हुए। शहर का कोई भी कोना ऐसा नहीं था जहाँ गोलियों की आवाजें न गूँज रही हों। घायलों को जिन्ना पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सेंटर और अब्बासी शहीद अस्पताल सहित अन्य चिकित्सालयों में भर्ती कराया गया है। पीड़ितों में कई ऐसे लोग भी शामिल हैं जो अपने घरों में सुरक्षित बैठे थे, लेकिन आसमान से बरसती गोलियों ने उन्हें अपना निशाना बना लिया। सड़कों पर गोलियों के खाली खोल बिखरे पड़े थे, जो जश्न के खौफनाक मंजर की गवाही दे रहे थे।
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पेशावर और अन्य शहरों में भी वही मंजर
खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की राजधानी पेशावर में भी जश्न के दौरान हुई गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हो गई और लगभग 15 लोग घायल हुए। इसके अतिरिक्त, रावलपिंडी और फैसलाबाद जैसे शहरों से भी लोगों के घायल होने की सूचना है। प्रशासन ने स्वतंत्रता दिवस से पहले ही हवाई फायरिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और ऐसा करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की चेतावनी जारी की थी। लेकिन, हर साल की तरह इस बार भी लोगों ने इन चेतावनियों को हवा में उड़ा दिया और कानून का घोर उल्लंघन किया। पुलिस की अपील का कोई असर नहीं हुआ और जश्न मनाने का यह खतरनाक तरीका निर्दोष लोगों के लिए जानलेवा साबित हुआ।
हर साल का दर्दनाक रिवाज
पाकिस्तान में स्वतंत्रता दिवस, नव वर्ष या किसी क्रिकेट मैच में जीत के अवसर पर हवाई फायरिंग करना एक खतरनाक रिवाज बन चुका है। हर साल प्रशासन की चेतावनियों के बावजूद, नागरिक इस जानलेवा परंपरा को दोहराते हैं, जिसके परिणामस्वरूप कई निर्दोष जानें चली जाती हैं। नागरिक समाज और बुद्धिजीवी वर्ग लगातार इस प्रथा के विरुद्ध आवाज उठाते रहे हैं, लेकिन इसका कोई ठोस परिणाम धरातल पर दिखाई नहीं देता। एक राष्ट्रीय पर्व का उत्सव मनाने का यह तरीका कई परिवारों के लिए जीवन भर का दुख और एक अभिशाप बन गया है।
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