
अमेरिका के एडवर्ड्स एयरफोर्स बेस से उड़ान भरते ही अमेरिकी वायुसेना का एक B-52 बॉम्बर प्लेन रनवे पर ही हादसे का शिकार हो गया। जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह करीब 11:20 बजे (स्थानीय समयानुसार) हुए इस भीषण हादसे में प्लेन में सवार सभी 8 लोगों की जान चली गई। यह प्लेन एक रूटीन टेस्ट मिशन पर था। दुर्घटना इतनी भयानक थी कि इससे उठने वाले काले धुएं के गुबार को कई मील दूर से देखा जा सकता था। (B-52 Bomber Crash)
जांच में लग सकता है लंबा समय
एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस के कर्नल जेम्स हेस ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए इसे एक बेहद दर्दनाक त्रासदी बताया। उन्होंने जानकारी दी कि मृतकों में सैन्य कर्मियों के साथ-साथ सरकारी कर्मचारी और निजी कॉन्ट्रैक्टर्स भी शामिल थे। हादसे के तुरंत बाद एयरफोर्स बेस पर सभी तरह के ऑपरेशन्स को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। कर्नल हेस के मुताबिक, प्लेन बेस के रडार आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा था। क्रैश की असली वजहों का पता लगाने के लिए एक विस्तृत जांच शुरू की गई है, जिसमें 6 महीने से अधिक का समय लग सकता है। (B-52 Bomber Crash)
ईरान पर हमले में हुआ इस्तेमाल
तकरीबन 50,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ने वाला यह प्लेन हवा में ही ईंधन भरने की खूबी के कारण असीमित दूरी तय कर सकता है। शीत युद्ध से लेकर हाल ही में ईरान के खिलाफ हुए अभियानों तक इस प्लेन ने अमेरिकी सैन्य रणनीतियों में हमेशा एक मुख्य भूमिका निभाई है। (B-52 Bomber Crash)
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परमाणु हमलों में सक्षम है यह प्लेन
B-52 बॉम्बर प्लेन अमेरिकी वायु सेना के इतिहास के सबसे भरोसेमंद और पुराने लड़ाकू विमानों में से एक है, जिसे पहली बार 1955 में सेना में भर्ती किया गया था। यह भारी-भरकम बॉम्बर करीब 70,000 पाउंड तक के आधुनिक हथियार और मिसाइलें ले जाने की क्षमता रखता है। वर्तमान में इस्तेमाल होने वाला इसका B-52H मॉडल परमाणु हथियारों और क्रूज मिसाइलों से हमला करने में पूरी तरह सक्षम है। (B-52 Bomber Crash)
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