युवाओं ने सावरकर को नहीं समझा, ये सरकार की शिक्षा प्रणाली की हार है- रणजीत सावरकर

सावरकर ने परिभाषित किया कि एक "हिंदू" वह है जो सिंधु (नदी) से सिंधु (समुद्र) तक फैली भारतभूमि को अपनी पितृभूमि और पुण्य भूमि मानता है। -

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युवाओं ने सावरकर को नहीं समझा, ये सरकारी शिक्षा व्यवस्था की हार है- रणजीत सावरकर
युवाओं ने सावरकर को नहीं समझा, ये सरकारी शिक्षा व्यवस्था की हार है- रणजीत सावरकर

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में क्रांतिकारियों के मुकुटमणि, दूरदर्शी समाज सुधारक, प्रखर देशभक्त स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर के कार्य और इतिहास को आज की युवा पीढ़ी नहीं जानती। स्वातंत्र्यवीर सावरकर के पोते रणजीत सावरकर ने अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा कि यह सरकारी शिक्षा प्रणाली की हार है।

वे चिकित्सा क्षेत्र में कार्यरत सेवांकुर भारत, कोंकण प्रांत की ओर से आयोजित ‘बौद्धिक सत्र’ में बोल रहे थे। हिंदुजा अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरती रोजेकर, स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक की कोषाध्यक्ष मंजिरी मराठे, डाॅ. ज्ञानेश गवनकर सहित मुंबई के मेडिकल छात्र और सेवांकुर भारत संस्था के पदाधिकारी उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, असम जैसे विभिन्न राज्यों के छात्रों ने ऑनलाइन भाग लिया।

स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक के कार्याध्यक्ष और वीर सावकरक के पोते रणजीत सावरकर ने कहा, “स्वतंत्रता सेनानी सावरकर की देशभक्ति पर हमला करने का कोई मौका नहीं छोड़ा गया। सावरकर और उनके जैसे अनेक स्वतंत्रता सेनानियों का इतिहास दबा दिया गया। स्कूली किताबों में प्रथम विश्व युद्ध, द्वितीय विश्व युद्ध, उपनिवेशवाद, पश्चिमी राष्ट्र, चीन का इतिहास, हिटलर, मुसोलिनी पढ़ाया जाता है। लेकिन, जिन्होंने अपने देश के लिए सब कुछ बलिदान कर दिया, उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जाता है। यह सरकारी शिक्षा प्रणाली की विफलता है। इसलिए युवाओं से मेरी अपील है कि वे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग करके क्रांतिकारियों का सच्चा इतिहास पढ़ें।”

अनुकरण करें, लेकिन अंधानुकरण न करें
अभिनेता रणदीप हुड्डा ने गर्व से कहा कि “सावरकर एकमात्र नेता हैं, जिन्हें आज की पीढ़ी पसंद करेगी यह सच है। क्योंकि सावरकर आधुनिकीकरण के समर्थक थे। वे नास्तिक थे। उनका ये हिस्सा कोई नहीं बताता। परम्पराएं मेरे जीवन के लिए उपयोगी हैं, इसलिए मैं उन्हें स्वीकार करता हूं, ऐसा वे सदैव कहते थे। क्योंकि वे उपयोगितावादी, व्यावहारिकवादी थे। पूजा मत करो, अनुकरण करो, लेकिन अंधानुकरण मत करो, सावरकर हमेशा कहा करते थे। इसलिए रणजीत सावरकर ने अपील की कि युवाओं को सावरकर को पढ़ना चाहिए।

हमारा इतिहास हार का नहीं है!
– सावरकर ने परिभाषित किया कि एक “हिंदू” वह है जो सिंधु (नदी) से सिंधु (समुद्र) तक फैली भारतभूमि को अपनी पितृभूमि और पुण्य भूमि मानता है।
– हमारा इतिहास हार का नहीं है। एकता की कमी के कारण हम हारे, इसलिए सावरकर हमेशा कहते थे कि एकता में शक्ति है। उनके विचार चिरकाल तक उपयोगी रहेंगे।
– सावरकर ने अस्पृश्यता निवारण के लिए महान कार्य किया। आरक्षण के सवाल पर डाॅ. अम्बेडकर और बैरिस्टर सावरकर में समानता थी। आरक्षण 10 साल के लिए लागू किया गया था। यह बात भी रणजीत सावरकर ने कही।

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