क्या होता है ‘नो हॉन्किंग डे’? जानिये बुधवार को क्यों गाड़ी चालकों पर रहेगी तिरछी नजर?

नो हॉन्किंग डे से ध्वनि प्रदूषण को कम किये जाने का प्रयत्न है। मुंबई पुलिस इसके लिए पिछले लंबे काल से प्रयत्न करती रही है।

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नो हॉन्किंग डे

मुंबई पुलिस के यातायात विभाग ने शहर में ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए ‘नो हॉन्किंग डे’ मनाने का निश्चय किया है। इसके अंतर्गत बुधवार को शहर में गाड़ी चालकों पर यातायात पुलिस की नजर रहेगी। अनायास हॉर्न बजानेवालों के कारण लोगों को मानसिक स्वास्थ्य पर विपरीत परिणाम पड़ता है।

शहर में बुधवार को ‘नो हॉन्किंग डे’ मनाया जाना है। इसके अंतर्गत अनायास हॉर्न बजाने पर रोक होगी। यातायात पुलिस ऐसे लोगों पर कार्रवाई करेगी जिन्हें उल्लंघन करते हुए पकड़ा जाएगा। इसके लिए यातायात पुलिस विभाग ने सभी वाहन चालकों से वाहनों के हॉर्न को केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम 1989 के नियम 119 की पूर्ति करने अंतर्गत करने को कहा है। इसका उल्लंघन करनेवालों पर यातायत पुलिस द्वारा दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई मोटर वाहन अधिनियम और पर्यावरण सुरक्षा कानून के अंतर्गत की जाएगी।

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नो हॉन्किंग का अर्थ
मुंबई में ‘नो हॉन्किंग डे’ का लंबा इतिहास रहा है। वर्ष 2008 में सोमवार के दिन अनायास हॉर्न बजाने पर रोक लगाई गई थी। इसके बाद के वर्षों में भी यह मनाया जाता रहा है। नो हॉन्किंग का अर्थ है कि, हॉर्न न बजाया जाना। ‘नो हॉन्किंग डे’ के दिन हॉर्न बजाने पर कड़ाई बरती जाती है। जिससे ध्वनि प्रदूषण पर रोक लगे।

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