एक पत्र से मनपा प्रशासन को चिंता क्यों?

मुंबई मनपा के कार्यों में बहुत सारे कार्य ठेकेदारी पर करवाए जाते हैं। इसको लेकर आरोप-प्रत्यारोप भी लगते रहे हैं। कई बार पसंदीदा ठेकेदारों के चयन पर भी बवाल हुआ है।

मुंबई महानगर पालिका में निविदा प्रक्रिया को लेकर निरंतर आरोप लगते रहे हैं। अब एक बेनामी पत्र ने आरोपों को पुख्ता कर दिया है। मनपा में ठेका पद्धति के अंतर्गत करोड़ों के ठेके आबंटित होते हैं। जिसमें सैप प्रणाली से कार्य संचालन होता है। लेकिन अब बेनामी पत्र ने इसकी ऐसी पोलखोल की है कि अच्छे अच्छों की नींद उड़ गई है।

मानव संचालित ठेका आबंटन पद्धति में गड़बड़ी के आरोपों पर लगाम लगाने के लिए कंप्यूटर में सैप प्रणाली से निविदा आमंत्रण और ठेका आबंटन का कार्य किया जाने लगा था। इसके अंतर्गत उम्मीद थी कि निविदाओं के आबंटन में अब कोई कोताही नहीं होगी। लेकिन अचानक 28 जनवरी को एक पत्र मुंबई मनपा में आया और उसने कंप्यूटर में घूसखोरी का राज खोल दिया। इस पत्र में सैप संचालन करनेवाली कंपनी, आईटी विभाग और ठेकेदारों की मिलीभगत का खुलासा किया गया है। इसके अंतर्गत ऑनलाइन भेजी गई निविदाओं को देखकर कुछ ठेकेदार निविदाएं भर रहे हैं। पत्र में उस कंपनी का नाम भी दिया गया है जिसने सबसे अधिक निविदाएं भरी और उसे प्राप्त किया।

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डबल लायबिलिटी का शिकायत
सैप प्रणाली में डबल लायबिलिटी बुक होने की शिकायतें पहले से ही मिलती रही हैं। इन शिकायतों को जर्मनी की कंपनी ने ऐसी किसी खामी से इन्कार किया है। अब इस प्रणाली की खामियों को दूर करने के लिए मनपा प्रशासन फंड मैनेजर की नियुक्ति पर विचार कर रहा है। वैसे सैप प्रणाली की देखरेख की जिम्मेदारी आईटी विभाग की होती है लेकिन बेनामी पत्र में इस विभाग पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जिससे अब इसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

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प्रशासन करेगी कार्रवाई?
गुमनाम पत्र में किये गए खुलासे दबी आवाज में सभी स्वीकार कर रहे हैं। लेकिन अब प्रशासन आधिकारिक रूप से इस पत्र को कितना महत्व देता है ये देखना होगा। अनौपचारिक रूप से अधिकारियों ने बताया कि सैप प्रणाली होने के बावजूद किसने किसे सहायता की निविदा प्राप्ति में ये उतना महत्व नहीं रखता जितना की इस प्रणाली में दखलंदाजी करके अपराध किया गया है। ये मनपा के लिए बड़ा खतरा है।

 

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