Himachal Pradesh: हिमाचल प्रदेश के हजारों सेब बागवानों का लंबे समय से चला आ रहा इंतजार अब खत्म होने की ओर है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमआईएस) योजना के तहत खरीदे गए सेब का बकाया भुगतान अगले एक सप्ताह के भीतर शुरू होने की तैयारी पूरी कर ली गई है। राज्य सरकार ने इसके लिए जरूरी धनराशि उपलब्ध करा दी है और अब भुगतान सीधे बागवानों के बैंक खातों में भेजा जाएगा।
जानकारी के अनुसार वित्त विभाग ने एमआईएस भुगतान के लिए 19.5 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि जारी की है। इसके बाद बागवानी विभाग ने लाभार्थियों का आवश्यक डाटा तैयार कर लिया है। विभाग अब डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) प्रणाली के माध्यम से भुगतान की प्रक्रिया शुरू करेगा। विभागीय तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं और जैसे ही डीबीटी प्रक्रिया पूरी होगी, बकाया राशि किसानों के खातों में भेजनी शुरू कर दी जाएगी।
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प्रदेश के विभिन्न जिलों के करीब 45 हजार बागवानों को एमआईएस के तहत खरीदे गए सेब का भुगतान किया जाना है। इनमें से लगभग नौ हजार बागवानों को पहले ही उनकी लंबित राशि मिल चुकी है। अब शेष लाभार्थियों के खातों में भुगतान डीबीटी के माध्यम से किया जाएगा।
सरकार ने भुगतान की प्रक्रिया में छोटे और सीमांत बागवानों को प्राथमिकता देने का फैसला किया है। सबसे पहले उन किसानों का बकाया जारी किया जाएगा जिनकी आर्थिक स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर है। इसके बाद अन्य पात्र बागवानों के खातों में भी चरणबद्ध तरीके से राशि भेजी जाएगी।
यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने एमआईएस भुगतान के लिए धनराशि जारी की है। इससे पहले भी 33 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। अब 19.5 करोड़ रुपये की नई राशि मिलने के बाद लंबे समय से अटके भुगतान का रास्ता साफ हो गया है। इससे बड़ी संख्या में सेब उत्पादकों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
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पिछले सीजन में राज्य सरकार ने एमआईएस योजना के तहत बागवानों से 12 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से निम्न गुणवत्ता के सेब खरीदे थे। खरीद पूरी होने के बाद कई किसानों को समय पर भुगतान नहीं मिल पाया था। इसके चलते बागवान लगातार अपनी बकाया राशि जारी करने की मांग कर रहे थे। अब सरकार की ओर से अतिरिक्त धनराशि जारी होने के बाद भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
सरकार ने इस बार पूरी भुगतान व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और तेज बनाने के लिए डीबीटी प्रणाली अपनाई है।
इस व्यवस्था के तहत राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचेगी। इससे भुगतान में अनावश्यक देरी और अन्य तकनीकी दिक्कतों की संभावना भी कम रहने की उम्मीद है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार लाभार्थियों के बैंक खातों और अन्य जरूरी विवरण का सत्यापन पूरा होने के साथ ही भुगतान की गति और तेज होगी।
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