
Kanwar Yatra 2026: विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले में कच्ची कांवरिया पथ पर शिवभक्तों का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा है। सुल्तानगंज की उत्तरवाहिनी गंगा से लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम तक पूरा क्षेत्र “बोल बम” और “हर-हर महादेव” के जयघोष से गुंजायमान है। इस भक्तिमय माहौल में श्रद्धालुओं द्वारा लाई जा रही आकर्षक और अनोखी कांवड़ें हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रही हैं। (Kanwar Yatra 2026)
इसी कड़ी में कोलकाता से आए शिव भक्तों का एक जत्था इस वर्ष आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है। कोलकाता के काशीपुर निवासी शिव भक्त रघुनाथ राय और उनके साथियों का यह जत्था अपने साथ उज्जैन के महाकालेश्वर की भव्य प्रतिमा से सजी एक विशाल कांवड़ लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ रहा है। (Kanwar Yatra 2026)
100 लीटर का विशाल कलश
इस कांवड़ की सबसे बड़ी विशेषता इसका 100 लीटर का विशाल कलश है, जिसमें गंगाजल भरा हुआ है। इस कलश को राष्ट्रध्वज तिरंगे की खूबसूरत थीम से सजाया गया है, जो कांवड़ पथ पर चलने वाले हर श्रद्धालु को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। (Kanwar Yatra 2026)
300 किलो की भव्य कांवड़
शिव भक्त रघुनाथ राय ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी वे बाबा के दरबार में हाजिरी लगाने निकले हैं। इस विशाल कांवड़ को बांस और मटकी की सहायता से पूरी तरह हाथ से तैयार किया गया है। इसे बनाने में लगभग तीन महीने का लंबा समय लगा है। पूरी तरह तैयार होने के बाद इस भव्य कांवड़ का कुल वजन करीब 300 किलोग्राम है। (Kanwar Yatra 2026)
15 साल से जारी है आस्था की यात्रा
रघुनाथ राय के साथ 25 से 30 शिव भक्तों का जत्था शामिल है। कांवड़ का वजन अधिक होने के कारण इसे उठाने में एक बार में चार लोगों की जरूरत पड़ती है। जत्थे के सभी सदस्य सुल्तानगंज से पवित्र गंगाजल उठाकर पैदल यात्रा कर रहे हैं। इस जत्थे का लक्ष्य 10 से 12 अगस्त के बीच बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करना है। जत्थे के वरिष्ठ शिवभक्त बबाई ने बताया, “हम लोग पिछले 15 वर्षों से लगातार कांवड़ यात्रा कर रहे हैं। (Kanwar Yatra 2026)
2024 से शुरू हुई विशाल कलश कांवड़ यात्रा
पहले हम सामान्य कांवड़ लेकर आते थे, लेकिन वर्ष 2024 से हमने इस विशाल कलश वाली कांवड़ यात्रा की शुरुआत की है।” उन्होंने आगे बताया कि इस कांवड़ के ढांचे को उन्होंने अपने साथियों के सहयोग से स्वयं तैयार किया है। इसे बनाने में बांस, रस्सी, तार और अन्य सामग्रियों का उपयोग किया गया है, जिसे लगभग 20 लोगों ने तीन दिनों की कड़ी मेहनत से जोड़कर खड़ा किया। यात्रा के आगामी पड़ाव के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि बाबा बैद्यनाथ धाम में जलाभिषेक करने के बाद यह जत्था बासुकीनाथ धाम के लिए रवाना होगा। (Kanwar Yatra 2026)
100 लीटर गंगाजल और तिरंगा थीम
इसके बाद, आगामी 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) को भूतनाथ से जल उठाकर वे बाबा तारकनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए आगे बढ़ेंगे। यही कारण है कि इस बार 100 लीटर वाले कलश को विशेष रूप से राष्ट्रध्वज तिरंगे की थीम पर सजाया गया है। श्रावणी मेले के कांवरिया पथ पर उज्जैन महाकाल की यह भव्य प्रतिमा, 100 लीटर गंगाजल से भरा तिरंगा कलश और शिवभक्तों की यह अटूट आस्था इस समय श्रद्धालुओं के लिए कौतूहल और श्रद्धा का विषय बनी हुई है। यह अनोखी कांवड़ यात्रा सावन के इस पावन महीने में हर किसी को शिवभक्ति के साथ-साथ राष्ट्रभक्ति का भी एक अद्भुत संदेश दे रही है। (Kanwar Yatra 2026)
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