दिव्यांगजनों की सहायता के लिए आरईसी और एलिम्को के बीच करार, जानें कितना है निर्धारित बजट

आरईसी प्रदत्त वित्तीय पोषण से भारत में हर चौथा बल्ब रोशन होता है। भारतीय कृत्रिम अंग विनिर्माण निगम (एलिम्को), भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अधीन दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत मिनी रत्न श्रेणी का केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम है।

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रूरल इलेक्ट्रीफिकेशन कारपोरेशन लिमिटेड (REC) की कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी शाखा आरईसी फाउंडेशन ने भारतीय कृत्रिम अंग विनिर्माण निगम (Alimco) के साथ एक समझौता (Agreement) ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। 11 नवंबर को एमओयू पर आरईसी फाउंडेशन के वरिष्ठ महाप्रबंधक व विभाग प्रमुख भूपेश चंदोलिया और एलिम्को के महाप्रबंधक (विपणन) अजय चौधरी ने हस्ताक्षर किए।

10 करोड़ रुपये की सहायता परियोजना
इस परियोजना का कार्यान्वयन एलिम्को करेगा। इसके तहत आरईसी देश के 25 स्थानों पर दिव्यांगजनों को सहायता और सहायक उपकरणों के वितरण की एक परियोजना के लिए 10 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान करेगी। इस परियोजना से समाज के वंचित वर्गों के 5,000 से अधिक लोगों के लाभान्वित होने की उम्मीद है।

प्रोत्साहित व विकसित करता है एलिम्को
आरईसी लिमिटेड, विद्युत मंत्रालय के तहत साल 1969 में स्थापित सार्वजनिक क्षेत्र की एक महारत्न कंपनी है। आरईसी प्रदत्त वित्तीय पोषण से भारत में हर चौथा बल्ब रोशन होता है। भारतीय कृत्रिम अंग विनिर्माण निगम (एलिम्को), भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अधीन दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत मिनी रत्न श्रेणी का केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम है। इसका शत प्रतिशत स्वामित्व भारत सरकार के पास है। इसका मुख्य उद्देश्य जरूरतमंद व्यक्तियों विशेष रूप से दिव्यांग रक्षा कर्मियों, अस्पतालों और ऐसे अन्य कल्याणकारी संस्थानों को उचित लागत पर कृत्रिम अंगों और सहायता व सहायक उपकरणों की उपलब्धता, उपयोग, आपूर्ति और वितरण को बढ़ावा देने के साथ प्रोत्साहित करना व विकसित करना है।

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