सिखों के साथ इस्लामी खेल, ‘एसएफजे’ का पन्नू भी पाकिस्तानी प्यादा

पाकिस्तान से हथियार, मादक पदार्थ और अमेरिका, कनाडा, इग्लैंड से धन का लालच, झूठे आश्वासन यही चला रहा है खालिस्तान का पंजाब में नेटवर्क। इसके लिए सुरक्षा एजेंसियां लगातार कड़े कदम उठा रही हैं। परंतु, हुर्रियत का सिख प्रेम, भगोड़ों का देश द्रोह भारत के लोगों को भी समझना होगा।

90 के दशक में हिंदुओं और सिखों का कश्मीर में नरसंहार करनेवाले इस्लामी कट्टरवादी अब सिखों के शुभचिंतक बन रहे हैं। खालिस्तानी आतंकियों पर कार्रवाई की 37वीं बरसी पर कश्मीर में मृतपाय पड़े हुर्रियत कॉन्फ्रेन्स के तथाकथित प्रवक्ता ने पाकिस्तानी पेपर के जरिये अपना समर्थन व्यक्त किया है। हुर्रियत की पाकिस्तान परस्ती जग जाहिर है, उसके द्वारा सिखों का समर्थन और सिख फॉर जस्टिस द्वारा पंजाब के स्थानीय अपराधियों से साठगांठ और किसान यूनियन आंदोलन में सहभागिता देश के विरुद्ध बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है।

ये भी पढ़ें – मुंबई इमारत दुर्घटना में आर्थिक सहायता, राज्य सरकार और प्रधानमंत्री ने की घोषणा

खालिस्तानी आतंकी विदेशों में बैठकर भारत को अशांत करना चाहते हैं। इसमें पाकिस्तान के प्यादे उन्हें खुलकर समर्थन कर रहे हैं। इसका साक्ष्य भी सामने आ रहा है। ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी पर हुर्रियत कॉन्फ्रेन्स के प्रवक्ता ने सिखों के प्रति अपनी सहानुभूति प्रकट की। हुर्रियत कॉन्फ्रेन्स अल्पसंख्यकों की आड़ में इस्लामी कट्टरवादियों के साथ सिख, दलित, ईसाई को भी जोड़ने के प्रयत्न में हैं। इसमें अमेरिका से रसद की आपूर्ति कर रहा है सिख फॉर जस्टिस का गुरपतवंतसिंह पन्नू। कनाडा से मनमंदर मो धालीवाल जिसका एक संबंधी ऑपरेशन ब्लू स्टार में मारा गया था, गुरमीत सिंह, अनीता लाल आदि।

पाकिस्तान का ‘के-2’ प्रोजेक्ट
पाकिस्तान लंबे समय से कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देकर छद्म युद्ध छेड़े हुए है, ऐसे में उसे पंजाब में खालिस्तान के रूप में एक नया हथियार मिला। जो काफी काल से शांत था पर अब उसे वह पुनर्जीवित करने के लिए विदेश में बैठे सिख समुदाय से जुड़े लोगों को हथियार के रूप में आजमा रहा है। पाकिस्तान, भारत में ‘के-2’ प्रोजेक्ट चला रहा है। यानी कश्मीर और खालिस्तान

अनुच्छेद 370 और 35-ए की समाप्ति के बाद जब जम्मू कश्मीर में पूरी तरह से भारतीय कानून लागू हुए तो आतंक भी दम तोड़ने लगा, ऐसी परिस्थिति में पाकिस्तान ने भारत द्वारा लाए गए संशोधित नागरिकता कानून को हथियार बनाकर खेलना शुरू किया। इसमें सबसे बड़े जांच का विषय रहा है अपरोक्ष धन मुहैया कराना। जिसके कारण शाहीन बाग लंबे समय तक बिरयानी और मुर्ग मुसल्लम खा सका और उसके तथाकथित कार्यकर्ताओं को रोजनदारी मिलती रही। आंदोलन भले ही समाप्त हो गया है लेकिन मुस्लिम संगठन अब भी इसे भुनाने की पूरी कोशिश में हैं। इसके लिए पॉप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया अब भी लगा हुआ है।

ये भी पढ़ें – टिकटॉक स्टार अरमान शेख गिरफ्तार! जानिये, क्या है मामला

सिख फॉर जस्टिस का पन्नू षड्यंत्रकारी
अमेरिका में रहनेवाला गुरपतवंतसिंह पन्नू खालिस्तान के नाम पर लंबे समय से विद्रोह का बीज बोता रहा है। वह रेफरेंडम 2020 के नाम से विश्व के विभिन्न देशों में रहनेवाले सिखों का जनमत संग्रह कराके भारत के पंजाब को खालिस्तान के रूप में स्वतंत्र राष्ट्र बनाने के स्वप्न बेच रहा है। इसके लिए उसे पैसे और लॉजिस्टिक सपोर्ट पाकिस्तान से मिल रहा है। जनमत संग्रह का खेल फेल होने के बाद उसने अपनी रणनीति पिछले कुछ महीनों में तेजी से बदली है…
किसान यूनियन को आर्थिक और अन्य समर्थन देकर भारत सरकार के विरुद्ध मोर्चा खोले रखना
इसमें खालिस्तान के झंडे, टी शर्ट, आतंकी भिंडरावाले की तस्वीर दिखाना
खालिस्तान के नाम पर पंजाब के स्थानीय अपराधियों को पैसा देकर लोगों में आतंक बनाना
खालिस्तान का विरोध करनेवालों को निशाना बनाना (बलविंदर सिंह संधू की हत्या)
ऑपरेशन ब्लू स्टार को अमृतसर नरसंहार के रूप मान्यता देने के नाम पर प्रोपेगांडा फैलाना
न्यूयॉर्क, कनाडा में भारतीय दूतावासों पर सिख खंडा या भारत तिरंगा के नाम से कैंपेन चलाना, अवमान करना

इसलिए पन्नू पाकिस्तानी प्यादा
भारत में पूरी शान, अधिकार और अभिन्न अंग के रूप रहनेवाले सिख समुदाय के लिए आंसू बहानेवाला गुरपतवंतसिंह पन्नू पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर होनेवाले अन्याय पर चुप्पी साधे बैठा है। वह कनाडा में बैठे खालिस्तानी और इंग्लैंड के हमदर्दों को भी नहीं दिखता है। जबकि पाकिस्तान में रहनेवाले प्रोफेसर कल्याण सिंह के शब्दों में कहें तो,
यह सच्चाई है कि पाकिस्तान में सिख जनसंख्या तेजी से कम हो रही है। इसके प्रमुख कारणों में निश्चित ही बलपूर्वक कराया जा रहा धर्मपरिवर्तन है।

सिखों को मारा जा रहा है, उनकी बेटियों को भगाकर धर्म परिवर्तन करवाकर मुस्लिमों से विवाह करवा दिया जा रहा है। इसकी कोई सुनवाई वहां की सरकार या पुलिस के पास नहीं होती।

इस विषय में पाकिस्तानी अमेरिकी फातिमा गुल का ये वीडियो महत्वपूर्ण है जो सिंध में अल्पसंख्यों की परिस्थितियों का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है। लेकिन इन सबके बावजूद भारत के भगोड़े सिखों को न तो पाकिस्तान में सिखों और अल्पसंख्यों पर हमला दिखता है और न ही धर्म परिवर्तन। वे तो यह भी भूल गए हैं कि कैसे उनके पूर्वजों को पाकिस्तान के गठन के बाद मुस्लिम लीग के लोगों ने बेरहमी से मारा, भगाया और महिलाओं से घृणित व्यवहार किये।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here